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'राष्‍ट्रकवि' की कविता पढ़ पीएम मोदी ने बढ़ाया हौसला, जानिए क्‍यों खास हैं 'दिनकर'

Ramdhari Singh Dinkar: रामधारी सिंह 'दिनकर' एक हिंदी कवि, निबंधकार और अकादमिक थे, जिन्हें आधुनिक हिंदी कवियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. वह भारतीय स्वतंत्रता के पहले के दिनों में लिखी गई अपनी राष्ट्रवादी कविताओं के कारण विद्रोह के कवि के रूप में प्रसिद्ध हुए. वह मुख्‍य रूप से वीर रस की कविताएं लिखते थे और उनकी देशभक्ति रचनाओं के कारण वह राष्ट्रकवि कहलाए जाने लगे.

Ramdhari Singh Dinkar (File Photo) Ramdhari Singh Dinkar (File Photo)

Ramdhari Singh Dinkar: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 16 जनवरी 2021 को कोरोना वैक्सीनेशन शुरू होने के मौके पर देश को संबोधित किया. इस मौके पर उन्‍होंने देशवासियों के हौसले की सराहना करते हुए एक कविता की पंक्ति पढ़ी- "मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है". इस कविता के माध्‍यम से उन्‍होंने देश के 'राष्‍ट्रकवि' रामधारी सिंह दिनकर को याद किया. आइये जानते हैं दिनकर के बारे में खास बातें.

रामधारी सिंह 'दिनकर' एक हिंदी कवि, निबंधकार और अकादमिक थे, जिन्हें आधुनिक हिंदी कवियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. वह भारतीय स्वतंत्रता के पहले के दिनों में लिखी गई अपनी राष्ट्रवादी कविताओं के कारण विद्रोह के कवि के रूप में प्रसिद्ध हुए. वह मुख्‍य रूप से वीर रस की कविताएं लिखते थे और उनकी देशभक्ति रचनाओं के कारण वह राष्ट्रकवि कहलाए जाने लगे.

वह शुरुआत में क्रांतिकारियों के समर्थक रहे मगर बाद में गांधी जी के साथ हो लिए. दिनकर को तीन बार राज्य सभा के लिए चुना गया था, और वह 03 अप्रैल, 1952 से 26 जनवरी, 1964 तक राज्‍यसभा सांसद रहे. इमरजेंसी के दौरान, जयप्रकाश नारायण ने रामलीला मैदान में एक लाख लोगों के जमावड़े के सामने राष्ट्रकवि दिनकर की कविता 'सिंहासन खाली करो,  जनता आती है' गाई थी. दिनकर को वर्ष 1959 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. 

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दिनकर का जन्म बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गांंव में एक गरीब भूमिहार ब्राह्मण परिवार में हुआ था. वह इकबाल, रवींद्रनाथ टैगोर, कीट्स और मिल्टन से काफी प्रभावित थे. उन्‍होंने रवींद्रनाथ टैगोर की कृतियों का बंगाली से हिंदी में अनुवाद भी किया. उनकी रचनाएं अधिकतर 'वीर रस' की हैं, हालांकि 'उर्वशी' इसमें एक अपवाद है. उनकी कुछ महान कृतियां हैं 'रश्मिरथी' और 'परशुराम की प्रतिमा'.

सम्‍मान

1999 में, भारत सरकार ने दिनकर की तस्‍वीर डाक टिकटों पर छापी. हिंदी को अपनी आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाए जाने की 50वीं वर्षगांठ पर 'भाषाई सद्भावना' का सम्‍मान करने के लिए ऐसा किया गया. इसी समय पटना में दिनकर चौक पर उनकी एक प्रतिमा का भी अनावरण किया गया और कालीकट विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. बिहार सरकार ने घोषित किया है कि बेगूसराय में उनके नाम पर एक हिंदी विश्वविद्यालय बनाया जाएगा. इस यूनिवर्सिटी का नाम 'राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर हिंदी विश्वविद्यालय' होगा.

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