scorecardresearch
 
इतिहास

अमेरिका-इंग्लैंड नहीं, भारत में ईजाद हुआ था शैम्पू, जानिए- इसका पूरा इतिहास

प्रतीकात्मक फोटो (Getty)
  • 1/8

आधुनिक संस्कृति में शैंपू ने आज सभी घरों में अपनी पुख्ता जगह बना ली है. लोग अक्सर यह सोचते हैं कि शैम्पू एक आधुनिक खोज होने के कारण जरूर ये व‍िदेशों से भारत में आया होगा. लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि शैम्पू का सबसे पहले प्रचलन और खोज भारत में हुई. भारत के एक विशेष समुदाय ने शैम्पू का इस्तेमाल सबसे पहले किया. इसके नाम से लेकर इतिहास तक जानें- शैम्पू की उत्पत्त‍ि और इससे जुड़े खास बातें... 

प्रतीकात्मक फोटो (Getty)
  • 2/8

ऐतिहासिक तथ्यों में इस बात का जिक्र है कि औपनिवेशिक युग के दौरान शैम्पू शब्द ने भारतीय उपमहाद्वीप से अंग्रेजी भाषा में प्रवेश किया. इसका पहला नाम 1962 में इस्तेमाल हुआ, ये संस्कृत के मूल शब्द चपति से लिया गया है, जिसका एक अर्थ स्मूद या शांत करना है. हिंदी में इसे चांपो कहा गया जो बाद में अंग्रेजी में शैम्पू बन गया. इसके आगे के इतिहास को आगे पढ़ें. 

प्रतीकात्मक फोटो (Getty)
  • 3/8

बताया जाता है कि यूं तो भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीन काल से ही विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियों और उनके अर्क का उपयोग शैम्पू के रूप में किया जाता रहा है. पहले सपिंडस को सूखे आंवले (आंवला) के साथ उबालकर और अन्य जड़ी-बूटियों को मिलाकर एक अर्क बनता था. फिर इसी का उपयोग करके ही सबसे पहले शैम्पू बनाया गया था. 

प्रतीकात्मक फोटो (Getty)
  • 4/8

बता दें कि Sapindus जिसे साबुनबेरी या साबुन के रूप में भी जाना जाता है. ये भारत में व्यापक रूप से एक उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के वृक्ष हैं, इसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों में कुसुना (संस्कृत: क्षुण) कहा जाता है. इसके फलों के गूदे में सैपोनिन होते हैं जो एक प्राकृतिक सर्फेक्टेंट होते हैं. सोपबेरी का अर्क झाग बनाता है जिसे भारतीय ग्रंथ फेनाका (संस्कृत: फेनक) कहते हैं. ये बालों को मुलायम, चमकदार और प्रबंधनीय बनाता है. 

 

प्रतीकात्मक फोटो (Getty)
  • 5/8

पहले बालों को साफ करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले शिकाकाई (बबूल कॉन्सिना), हिबिस्कस (गुड़हल) फूल, रीठा (सपिंडस मुकोरोसी) और अराप्पू (अल्बिजिया अमारा) आदि उत्पाद थे. सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम गुरु गुरु नानक ने 16वीं शताब्दी में साबुन के पेड़ और साबुन का उल्लेख किया था. 

प्रतीकात्मक फोटो (Getty)
  • 6/8

भारत में शुरुआती औपनिवेशिक व्यापारियों ने अपने दैनिक स्नान के दौरान बालों और शरीर की मालिश (चंपू) को साफ करना शुरू किया था. फिर जब वो यूरोप लौटे तो उन्होंने नई सीखी हुई आदतों को पेश किया, जिसमें बालों का उपचार भी शामिल था, जिसे वे शैंपू कहते थे. यही शैंपू आगे चलकर विदेशी कंपनियों ने एक उत्पाद के दौरान पूरी दुनिया में प्रचल‍ित करने का काम किया. 

प्रतीकात्मक फोटो (Getty)
  • 7/8

एक भारतीय यात्री, सर्जन और उद्यमी साके डीन मोहम्मद को ब्रिटेन में शैंपू या "शैम्पूइंग" की प्रथा शुरू करने का श्रेय दिया जाता है. साल 1814 में मोहम्मद ने अपनी आयरिश पत्नी जेन डेली के साथ ब्रा‍इटन में इंग्लैंड में पहला व्यावसायिक "शैम्पूइंग" वाष्प मालिश स्नान खोला. उन्होंने एक स्थानीय पत्र में उपचार का वर्णन "द इंडियन मेडिकेटेड वेपर बाथ के रूप में किया, जो कई बीमारियों का इलाज है. प्रचार में कहा गया कि जब सब कुछ विफल हो जाता है तो पूरी राहत देता है. विशेष रूप से आमवाती और लकवाग्रस्त, गठिया, कठोर जोड़, पुरानी मोच, लंगड़ा पैर, जोड़ों में दर्द और आम दर्द के तौर पर इसे प्रचलित क‍िया गया. 

प्रतीकात्मक फोटो (Getty)
  • 8/8

यूरोप में शैम्पू के शुरुआती चरणों के दौरान अंग्रेजी हेयर स्टाइलिस्टों ने पानी में स्थानीय साबुन उबाला और बालों को चमक और खुशबू देने के लिए जड़ी-बूटियों को मिलाया. फिर व्यावसायिक रूप से निर्मित शैम्पू 20वीं सदी के अंत से उपलब्ध था. अमेरिकन मैगजीन में कैंथ्रोक्स शैम्पू के लिए साल 1914 के एक विज्ञापन में कैंप में युवतियों को एक झील में कैंथ्रोक्स से अपने बाल धोते हुए दिखाया गया.