एयर मार्शल नागेश कपूर ने गुरुवार को भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ) का कार्यभार संभाल लिया. उन्होंने एयर मार्शल नरमदेश्वर तिवारी का स्थान लिया, जो चार दशक से अधिक की गौरवशाली सेवा के बाद बुधवार को रिटायर हुए.
नए दायित्व संभालने से पहले एयर मार्शल कपूर साउथ वेस्टर्न एयर कमांड (SWAC) के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में सेवाएं दे रहे थे. उन्होंने वायु भवन में औपचारिक रूप से उप प्रमुख का पद ग्रहण किया, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की.
शानदार सैन्य करियर और अनुभव
एयर मार्शल नागेश कपूर नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के स्नातक हैं. उन्होंने दिसंबर 1985 में एनडीए से ट्रेनिंग पूरी की और 6 दिसंबर 1986 को फ्लाइंग ब्रांच की फाइटर स्ट्रीम में भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया. वे एक कुशल फाइटर पायलट, योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और फाइटर कॉम्बैट लीडर हैं.
अपने विशिष्ट उड़ान करियर के दौरान एयर मार्शल कपूर ने मिग-21 और मिग-29 के सभी वेरिएंट उड़ाए हैं. उन्होंने विभिन्न लड़ाकू और प्रशिक्षण विमानों पर 3,400 घंटे से अधिक की ऑपरेशनल और इंस्ट्रक्शनल फ्लाइंग की है.
डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र एयर मार्शल कपूर ने 39 वर्षों से अधिक की उत्कृष्ट सेवा दी है. अपने करियर में उन्होंने कमांड, ऑपरेशनल, प्रशिक्षण और स्टाफ से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं.
उनके प्रमुख ऑपरेशनल कार्यकालों में सेंट्रल सेक्टर में एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, वेस्टर्न सेक्टर में एक अग्रिम उड़ान बेस के स्टेशन कमांडर और एक प्रमुख एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग के पद शामिल हैं. प्रशिक्षण क्षेत्र में उन्होंने एयर फोर्स एकेडमी में चीफ इंस्ट्रक्टर (फ्लाइंग) तथा वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में सेवाएं दीं.
एयर फोर्स एकेडमी में रहते हुए उन्होंने वायुसेना में PC-7 Mk II विमान के शामिल होने और उसके संचालन को सफलतापूर्वक लागू करने में अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा वे पाकिस्तान में डिफेंस अटैचे के रूप में राजनयिक नियुक्ति पर भी रह चुके हैं.
सम्मान और पुरस्कार
स्टाफ नियुक्तियों में उन्होंने एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (ऑपरेशंस-स्ट्रैटेजी), साउथ वेस्टर्न एयर कमांड में एयर डिफेंस कमांडर, सेंट्रल एयर कमांड मुख्यालय में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर और एयर हेडक्वार्टर में एयर ऑफिसर-इन-चार्ज पर्सनल जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया.
उप प्रमुख बनने से पहले एयर मार्शल कपूर ट्रेनिंग कमांड और उसके बाद साउथ वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं. देश के लिए उनकी असाधारण और विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें वायु सेना मेडल (2008), अति विशिष्ट सेवा मेडल (2022) तथा परम विशिष्ट सेवा मेडल और सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (2025) जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है.
लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने भी पद संभाला
लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने आधिकारिक रूप से सीमा सड़क संगठन (BRO) के 29वें महानिदेशक (DGBR) का कार्यभार संभाल लिया है. पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने BRO के अधिकारियों और कर्मियों से देश के सामरिक हितों से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को उसी जोश, ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया, जिसके लिए संगठन जाना जाता है.
नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला के स्नातक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह को वर्ष 1982 में कोर ऑफ इंजीनियर्स में कमीशन मिला था. अपने लंबे और विशिष्ट सैन्य करियर के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर में बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स की कमान संभाली, भूटान में प्रोजेक्ट दांतक के मुख्य अभियंता के रूप में सेवाएं दीं, मुंबई में चीफ इंजीनियर (नेवी) तथा ईस्टर्न कमांड मुख्यालय में चीफ इंजीनियर के पद पर कार्य किया.
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश की कई महत्वपूर्ण और रणनीतिक सुरंग परियोजनाओं को पूरा कराने में अहम भूमिका निभाई, जिनमें अटल टनल, थिंग टनल (सिक्किम), सेला और नेचिफू टनल (अरुणाचल प्रदेश) शामिल हैं. इसके अलावा वे तेलंगाना सरकार के सिंचाई सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.