यानी राज्य में अब अगर कोई सरकारी अस्पताल जाता है, तो फिर उसे मोबाइल फोन को बाहर जमा करवाना होगा.
दरअसल, केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डालकर दावा किया था कि एमआर बंगुर के अस्पताल में दो शवों को साधारण मरीजों के पास ही रखा हुआ है. ये वीडियो कोरोना वायरस से जुड़े अस्पताल के होने का दावा किया जा रहा है. इसी के बाद ममता सरकार के द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश सामने आया.
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फैसले के बाद बाबुल सुप्रियो ने लिखा कि ममता सरकार ने जिस तरह मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला लिया है, इसका मतलब यही है कि वीडियो सही साबित हुआ है. बाबुल सुप्रियो के अलावा बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट कर ममता बनर्जी पर निशाना साधा.
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हालांकि, राज्य सरकार की ओर से अबतक वायरल वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है. वीडियो को शूट करने वाले शख्स ने वीडियो में कहा कि कोरोना पीड़ित इस अस्पताल में दो शव पिछले कुछ घंटे से ऐसे ही पड़े हैं, जबकि यहां पास में अन्य मरीज़ मौजूद हैं.
गौरतलब है कि कोरोना संकट के बीच ममता बनर्जी की सरकार और भारतीय जनता पार्टी में आर-पार की जंग चल रही है. ममता सरकारी की ओर से केंद्र की भाजपा सरकार पर पक्षपात करने का आरोप लगाया गया है और राज्य की मदद ना करने का दावा किया गया है.