scorecardresearch
 

कोरोना से लड़ने में कारगर सोशल डिस्टेंसिंग, 62% तक आ सकती है कमी

आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ रमन गंगाखेडकर ने कहा कि गणितीय मॉडल का अध्ययन किया गया है. उन्होंने कहा कि थर्मल स्क्रीनिंग से कोरोना वायरस के संक्रमण को तीन हफ्ते तक रोका जा सकता है. इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग से कोविड-19 केस में 62 फीसदी की कमी लाई जा सकती है.

Advertisement
X
रांची में लॉकडाउन के दौरान की तस्वीर (फोटो- पीटीआई)
रांची में लॉकडाउन के दौरान की तस्वीर (फोटो- पीटीआई)

  • कोरोना को रोकने में कारगर है सोशल डिस्टेंसिंग
  • आईसीएमआर के नेटवर्क में टेस्ट के लिए 118 लैब
  • बिना सलाह के कोरोना टेस्ट कराने की जरूरत नहीं

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि सामाजिक दूरी बनाकर कोरोना वायरस के संक्रमण में 62 फीसदी की कमी लाई जा सकती है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोशल डिस्टेंसिंग की अहमियत को भी बताया है.

कोरोना रोकने में कारगर सोशल डिस्टेंसिंग

आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ रमन गंगाखेडकर ने कहा कि गणितीय मॉडल का अध्ययन किया गया है. उन्होंने कहा कि थर्मल स्क्रीनिंग से कोरोना वायरस के संक्रमण को तीन हफ्ते तक रोका जा सकता है. इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग से कोविड-19 केस में 62 फीसदी की कमी लाई जा सकती है. डॉ गंगाखेडकर ने कहा कि अगर किसी में भी फ्लू के लक्षण हैं तो घर में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाना चाहिए.

Advertisement

पढ़ें- कई बार अमेरिका में भी फैल चुका है हंता वायरस, अब चीन में हुई एक मौत

डॉक्टर के कहने पर ही करवाएं टेस्ट

आईसीएमआर के वैज्ञानिकों का कहना है कि अपने मन से निजी क्लीनिक में कोरोना का टेस्ट नहीं करवाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर डॉक्टर आपको इसकी सलाह देते हैं तभी कोरोना का टेस्ट करवाएं.

ICMR नेटवर्क में 118 लैब

डॉ रमन गंगाखेडकर ने कहा कि आईसीएमआर के नेटवर्क में 118 लैब हैं. इन लैब में एक दिन में 12000 सैंपल टेस्ट किए जा सकते हैं. इसके अलावा 22 निजी लैब को एप्रूवल दे दिया गया है.

पढ़ें- क्या होती है इकोनॉमिक इमरजेंसी, भारत में अब तक कभी नहीं हुई लागू

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि अगर किसी के अंदर कोविड-19 के लक्षण दिखते हैं तो उसके लिए दवाइयां खरीदने में जल्दबाजी न करें. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 का कोई निश्चित इलाज नहीं है. प्रतिबंधित ड्रग्स का उपयोग केवल नामित अस्पतालों द्वारा इलाज कर रहे डॉक्टर की देखरेख में और रोगी की सहमति से ही किया जा सकता है.

Advertisement
Advertisement