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क्या मुंबई ने कोरोना संक्रमण पर काबू पाना शुरू कर दिया है?

कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से ही मुंबई भारत में सबसे ज्यादा प्रभावित शहर रहा है. लेकिन पिछले एक हफ्ते में, मुंबई में 6,729 केस सामने आए, वहीं दिल्ली में इसी अवधि में नए केसों की संख्या लगभग तिगुनी यानि 20,411 रही.

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महामारी शुरू होने के बाद से ही मुंबई भारत में सबसे ज्यादा प्रभावित शहर रहा है (फाइल फोटो-PTI)
महामारी शुरू होने के बाद से ही मुंबई भारत में सबसे ज्यादा प्रभावित शहर रहा है (फाइल फोटो-PTI)

  • पिछले एक हफ्ते में, मुंबई में 6,729 केस सामने आए
  • दिल्ली में नए केस लगभग तिगुने यानी 20,411 रहे हैं

दिल्ली ने 25 जून को कोरोना वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित शहर के तौर पर मुंबई को पीछे छोड़ दिया. ये ऐसी दौड़ है जिसे कोई भी नहीं जीतना चाहता है. ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि पिछले कुछ दिनों में मुंबई केसों की संख्या बढ़ने पर काबू पाने में सफल रहा है, जबकि दिल्ली में नए केसों का बढ़ना बदस्तूर जारी है.

महामारी शुरू होने के बाद से ही मुंबई भारत में सबसे ज्यादा प्रभावित शहर रहा है. लेकिन पिछले एक हफ्ते में, मुंबई में 6,729 केस सामने आए, वहीं दिल्ली में इसी अवधि में नए केसों की संख्या लगभग तिगुनी यानि 20,411 रही.

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मुंबई में एक दिन में सर्वाधिक 1,751 केस रिपोर्ट होने को एक महीने से ज्यादा हो गया है. डेटा से पता चलता है कि यह उम्मीद से अधिक तेजी से वायरस से उभरने लगा है. इतना अधिक सुधार है कि गुरुवार को, महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की कि आने वाले हफ्ते में, जिम और सैलून को भी कुछ प्रोटोकॉल के साथ खोलने की अनुमति दी जाएगी.

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लगभग एक महीने पहले, मुंबई में कोरोना वायरस केस हर 11 दिनों में दोगुने हो रहे थे. पिछले एक हफ्ते के आंकड़ों से पता चलता है कि मुंबई में केस दोगुने होने में अब 40 दिन से भी अधिक लग रहे हैं. राष्ट्रीय औसत 19 दिनों से भी केस दोगुने होने की ये कहीं ज्यादा कम रफ्तार है. 24 जून तक, मुंबई में कुल 69,528 केस थे, जिनमें 3,964 (5.7 प्रतिशत) मौतें और 37,000 से अधिक रिकवरी शामिल थीं.

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महाराष्ट्र सरकार की ओर से नियुक्त Covid-19 टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. शशांक जोशी ने इंडिया टुडे को बताया, “मुंबई में आंकड़ों में सुधार हो रहा है. मुंबई के कुछ क्षेत्रों में केस दोगुने होने में 45 दिनों से ऊपर लग रहे हैं. मुंबई का वक्र स्थिर हो रहा है. पड़ोसी जिलों में, केस अपने शिखर पर पहुंच रहे हैं. हालांकि, मुंबई में कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिन पर नजर रखने की जरूरत है.”

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केस बढ़ने की रफ्तार कम होने के साथ रिकवरी में भी वृद्धि हुई है. महज एक महीने पहले, 25 मई तक, मुंबई में रिकवरी दर 22 प्रतिशत थी, जो बुधवार को बढ़कर 53 प्रतिशत हो गई. इसका मतलब है, मुंबई में सक्रिय केसों की तुलना में अधिक रिकवरी है. भारत में औसत रिकवरी दर 57 फीसदी है.

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बुधवार तक, मुंबई में कुल सक्रिय केस 28,653 थे, जबकि रिकवरी 37,010 थी, इसके अलावा, 12 से 25 जून के बीच, कुल 11,858 मरीजों को छुट्टी दे दी गई, जबकि सक्रिय केसों की संख्या लगभग समान रही,

दैनिक बढ़ोतरी

मुंबई के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि रोजाना नए केसों की संख्या घटना है. 22 मई को, मुंबई ने एक दिन में 1,751 नए केस दर्ज किए थे. तब से, इसमें गिरावट देखी गई है. शहर में 23 जून को 824 केस और इसके एक दिन बाद 1,118 केस रिपोर्ट हुए. सात-दिवसीय रोलिंग औसत से पता चलता है कि दैनिक बढ़ोतरी का वक्र थोड़ी देर के लिए स्थिर रहने के बाद नीचे आया है.

दूसरी ओर, दिल्ली ने बुधवार को 3,947 नए केस जोड़े हैं, ये भारत में किसी भी शहर में महामारी शुरू होने के बाद एक दिन में नए केसों का सबसे ऊंचा आंकड़ा है. दिल्ली में केसों का रोलिंग औसत भी बढ़ रहा है.

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टेस्ट स्कोर

जून के मध्य तक, मुंबई की टेस्टिंग क्षमता प्रति दिन 4,000 पर निश्चित की गई थी. हालांकि, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने तब टेस्टिंग को बढ़ाकर 4,500 प्रति दिन कर दिया था. मुंबई में टेस्टिंग बढ़ने के साथ दैनिक केस बढ़ने की संख्या में वृद्धि नहीं हुई है. वास्तव में, दैनिक बढ़ोतरी का सात-दिवसीय रोलिंग औसत 13 जून को 1,353 से घटकर 24 जून को 1,121 हो गया है.

कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि मुंबई में चिंता की सिर्फ दो वजहें हैं. पहली मुंबई में कोरोना से होने वाली मृत्यु दर और दूसरी बारिश (मॉनसून). ऐसी आशंका है कि मॉनसून में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं.

15 जून से ही राज्य में Covid-19 से संक्रमित लोगों की मौतों के आंकड़े बढ़े हैं. बुधवार तक मुंबई में कोरोना संक्रमण के चलते 3,962 लोगों की जान जा चुकी है. इसके उलट 14 जून तक केवल 2,190 मौतें हुई थीं. दस दिनों के भीतर ही कुल 1,772 लोगों की मौत हो गई.

भारतीय जनता पार्टी के नेता किरीट सोमैया का कहना है कि मुंबई में 15 जून तक मृत्यु दर 3.79 फीसदी रही, लेकिन यह दर बढ़कर 24 जून तक 5.69 फीसदी हो गई. इस अवधि में बीएमसी ने मौत के पुराने डेटा को दर्ज किया, जिसकी वजह से मृत्यु दर बढ़ी.

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