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Explainer: जानिए Covovax वैक्सीन के बारे में सबकुछ जो भारत में 7 से 11 साल के बच्चों को देने के लिए मंजूर हुई है

Corona Vaccine for Kids: 7 से 11 साल के बच्चों के लिए केंद्र सरकार ने एक और वैक्सीन को मंजूरी दे दी है. ये कोवोवैक्स वैक्सीन है, जिसे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया बना रही है. वैक्सीन की कितनी डोज लगेगी? इसकी कीमत कितनी होगी? जानें...

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कोवोवैक्स अब 7 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों को लगाई जाएगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर) कोवोवैक्स अब 7 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों को लगाई जाएगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 21 दिन के अंतर से लगेगी दो डोज
  • 90% तक असरदार है कोवोवैक्स

Corona Vaccine for Kids: बच्चों के लिए कोरोना की एक और वैक्सीन आ गई है. केंद्र सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) की वैक्सीन कोवोवैक्स (Covavax) को 7 से 11 साल के बच्चों के लिए मंजूरी दे दी है. इससे पहले 9 मार्च को कोवोवैक्स को 12 से 17 साल के लोगों पर इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी मिली थी. इसी के साथ कोवोवैक्स अब 7 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों को लगाई जा सकेगी. 

भारत में कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन का अभियान पिछले साल 16 जनवरी से शुरू हुआ था. दो महीने पहले ही सरकार ने 5 साल और उससे ऊपर के बच्चों के लिए वैक्सीनेशन को मंजूरी दी थी. अभी 5 साल से कम उम्र के बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू नहीं हुआ है. 

अभी ड्रग्स रेगुलेटर ने जिस कोवोवैक्स को 7 से 11 साल के बच्चों के लिए मंजूरी दी है, उसे अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स (Novavax) ने बनाया है. भारत में इस वैक्सीन को कोवोवैक्स के नाम से सीरम इंस्टीट्यूट बना रहा है. 

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने पिछले साल 28 दिसंबर को कोवोवैक्स को वयस्कों पर आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी थी. इसके बाद 9 मार्च को 12 से 17 साल की उम्र के लिए भी इसे मंजूर कर दिया गया था और अब 7 से 11 साल के बच्चों को भी ये वैक्सीन लगाई जा सकेगी.

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कितनी सेफ है कोवोवैक्स?

- नोवावैक्स की वैक्सीन दुनिया के कई देशों में इस्तेमाल हो रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस वैक्सीन को इमरजेंसी यूज की लिस्ट में शामिल किया है.

- भारत में भी इस वैक्सीन का ट्रायल किया गया है. इसका ट्रायल 2 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों पर किया गया है.

- सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कोरोना के खिलाफ ये वैक्सीन 90 फीसदी तक असरदार है.

कितनी डोज लगेगी इसकी?

- ये वैक्सीन भी इंटरमस्क्यूलर वैक्सीन है. यानी, इसे इंजेक्शन के जरिए बांह में लगाया जाएगा और दवा को शरीर में डाला जाएगा. 

- इस वैक्सीन की दो डोज लगाई जाएगी. इसके दो डोज में 21 दिन का अंतर होगा. सीरम के मुताबिक, दूसरे डोज के 7 दिन बाद कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी बन जाती है.

- कोई भी वैक्सीन कोरोना से पूरी तरह नहीं बचाती है. वैक्सीन लगने का मतलब ये नहीं है कि अब आप कोरोना संक्रमित नहीं होंगे. सीरम का कहना है कि कोवोवैक्स लगने के बाद अगर संक्रमित होते भी हैं तो गंभीर बीमारी का खतरा बहुत कम है.

इसके साइड इफेक्ट्स क्या हैं?

- कंपनी के मुताबिक, बाकी वैक्सीन और दवा की तरह इसके भी कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं. हालांकि, इसके बहुत गंभीर साइड इफेक्ट्स नहीं हैं.

- वैक्सीनेशन के बाद वैक्सीन वाली जगह पर सूजन या दर्द, सिरदर्द, बुखार, जी मचलाना, थकान, उल्टी और कमजोरी जैसे सामान्य साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं. 

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कितनी कीमत होगी इसकी?

- सरकारी अस्पतालों और सरकारी वैक्सीनेशन सेंटर पर कोरोना की वैक्सीन फ्री में लगाई जा रही है. वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है.

- हालांकि, प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन के लिए पैसे देने होंगे. कोवोवैक्स की एक डोज की कीमत 225 रुपये है. इसके अलावा निजी अस्पताल 150 रुपये तक सर्विस चार्ज ले सकते हैं. 

18 साल से कम वालों के लिए कितनी वैक्सीन?

1. कोवैक्सीनः इसे भारत बायोटेक ने बनाया है. ये वैक्सीन अभी 6 साल और उससे ज्यादा उम्र के बच्चों को लग रही है.

2. कोर्बीवैक्सः इसे हैदराबाद स्थित बायोलॉजिकल ई ने बनाया है. इस वैक्सीन को 5 साल से ऊपर के बच्चों को लगाया जा रहा है.

3. जायकोव-डीः जायडस कैडिला की इस वैक्सीन को 12 साल और उससे ऊपर के बच्चों को लगाया जा रहा है.

4. कोवोवैक्सः अब तक ये 12 से 17 साल के बच्चों को लगाई जा रही थी. अब 7 से 11 साल की उम्र के बच्चों को भी इसे लगाया जाएगा.

बच्चों के लिए वैक्सीन क्यों जरूरी?

- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि ऐसा कोई डेटा नहीं है, जिससे ये साबित हो कि 18 साल से कम उम्र वालों को कोरोना का खतरा नहीं है. 

- WHO का 30 दिसंबर 2019 से 25 अक्टूबर 2021 तक का डेटा बताता है कि इस दौरान दुनियाभर में 5 साल से कम उम्र के 18.90 लाख बच्चे संक्रमित हुए और उनमें से 1,797 की मौत हो गई. वहीं, 5 से 14 साल की उम्र के बच्चों में 70.58 लाख मामले आए और 1,328 मौतें हुईं.

- WHO का कहना है कि भले ही 18 से कम उम्र वालों में संक्रमण की गंभीरता और मौत का खतरा कम हो, लेकिन उन्हें भी वैक्सीन की उतनी ही जरूरत है, जितनी वयस्कों को है. 

- इसके अलावा वैक्सीन सेफ्टी पर बनी ग्लोबल एडवाइजरी कमेटी का कहना है कि कोरोना संक्रमितों को अस्पताल में भर्ती होने और मौतों को रोकने के लिए सभी एजग्रुप का वैक्सीनेट होना जरूरी है.

 

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