scorecardresearch
 

FRDI बिल के 'बेल इन' क्लॉज पर संसदीय समिति करेगी चर्चा

पिछले कुछ महीनों में जमाकर्ताओं द्वारा नकद निकासी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे. फाइनेंश‍ियल रेजोल्यूशन एंड डिपोजिट इंश्योरेंस (FRDI) बिल, 2017 की वजह से शुरू हुई इस बहस को लेकर  संसदीय संयुक्त समिति आज बैठक करने वाली है.

Advertisement
X
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

पिछले कुछ महीनों में जमाकर्ताओं द्वारा नकद निकासी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे. फाइनेंश‍ियल रेजोल्यूशन एंड डिपोजिट इंश्योरेंस (FRDI) बिल, 2017 की वजह से शुरू हुई इस बहस को लेकर संसदीय संयुक्त समिति आज बैठक करने वाली है. इस बैठक में  इस बिल के विवाद‍ित प्रस्ताव 'बेल इन' की जांच होगी.

सोमवार को समिति अपनी दसवीं बैठक करने के लिए तैयार है. एफआरडीआई बिल के 'बेल इन' प्रस्ताव पर इस बैठक में विस्तार से चर्चा हो सकती है. ईटी ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सरकार की बेल इन को लेकर सफाई जारी करने के बाद भी इस पर विस्तार में चर्चा होना तय माना जा रहा है.

बता दें कि इस बिल को संसदीय संयुक्त समिति के पास भेजा गया है. यह समिति एफआरडीआई बिल के प्रावधानों पर सभी हितधारकों से विचार-विमर्श कर रही है. समिति को मानसून सत्र, 2018 के अंतिम दिन तक संसद को अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया है.

Advertisement

समिति ने अपनी नौवीं बैठक से पहले ही सभी ह‍ितधारकों को जैसे कि मंत्रालयों, आरबीआई, भारत प्रतिस्पर्धा आयोग, केंद्रीय जांच ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, उद्योग और वाणिज्य के अलग-अलग कक्षों और बैंकिंग प्रतिनिधियों को सुना है. लघु उद्योग विकास बैंक- सिडबी और अन्य ह‍ितधारक 14 मई को समिति के सामने अपना प्रतिनिधि‍त्व प्रस्तुत कर सकते हैं.

क्या है एफआरडीआई बिल

प्रस्तावित एफआरडीआई बिल के जरिए केंद्र सरकार सभी वित्तीय संस्थाओं जैसे बैंक, इंश्योरेंस कंपनी और अन्य वित्तीय संगठनों का इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड के तहत उचित निराकरण करना चाह रही है. इस बिल को कानून बनाकर केंद्र सरकार बीमार पड़ी वित्तीय कंपनियों को संकट से उबारने की कोशिश करेगी. इस बिल की जरूरत 2008 के वित्तीय संकट के बाद महसूस की गई जब कई हाई-प्रोफाइल बैंकरप्सी के मामले देखने को मिले थे.

केंद्र सरकार ने जनधन योजना और नोटबंदी जैसे फैसलों से लगातार कोशिश की है कि ज्यादा से ज्यादा लोग बैंकिंग व्यवस्था के दायरे में रहें. इसके चलते यह बेहद जरूरी हो जाता है कि बैंकिंग व्यवस्था में शामिल हो चुके लोगों को बैंक या वित्तीय संस्था के डूबने की स्थिति में अपने पैसों की सुरक्षा की गारंटी रहे.

एफआरडीआई बिल का प्रमुख प्रावधान

इस बिल में एक रेजोल्यूशन कॉरपोरेशन का प्रावधान है जिसे डिपॉजिट इंश्योरेंस और क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन की जगह खड़ा किया जाएगा. यह रेजोल्यूशन कॉरपोरेशन वित्तीय संस्थाओं के स्वास्थ्य की निगरानी करेगा और उनके डूबने की स्थिति में उसे बचाने का प्रयास करेगा. वहीं, जब वित्तीय संस्था का डूबना तय रहेगा, तो ऐसी स्थिति में उनकी वित्तीय देनदारी का समाधान करेगा. रेजोल्यूशन कॉरपोरेशन का एक अहम काम ग्राहकों को डिपॉजिट इंश्योरेंस देने का भी है हालांकि अभी इस इंश्योरेंस की सीमा निर्धारित नहीं की गई है.

Advertisement

क्यों है एफआरडीआई बिल से डर

एफआरडीआई बिल के जरिए रेजोल्यूशन कॉरपोरेशन को फेल होने वाली संस्था को उबारने के लिए (बेल इन) कदम उठाने का भी अधिकार है. जहां बेल आउट के जरिए सरकार जनता के पैसे को सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था में निवेश करती है जिससे उसे उबारा जा सके वहीं बेल इन के जरिए बैंक ग्राहकों के पैसे से संकट में पड़े बैंक को उबारने का काम किया जाता है.

एफआरडीआई बिल के इसी प्रावधान के चलते आम लोगों में डर है कि यदि उनका बैंक विफल होता है तो उन्हें अपनी गाढ़ी कमाई से हाथ धोना पड़ सकता है. गौरतलब है कि मौजूदा प्रावधान के मुताबिक किसी बैंक के डूबने की स्थिति में ग्राहक को उसके खाते में जमा कुल रकम में महज 1 लाख रुपये की गारंटी रहती है और बाकी पैसा लौटाने के लिए बैंक बाध्य नहीं रहते. प्रस्तावित एफआरडीआई बिल में फिलहाल सरकार ने गांरटी की इस रकम पर अभी कोई फैसला नहीं लिया है.

Advertisement
Advertisement