'बोर्ड ऑफ पीस' की लॉन्चिंग से भारत की दूरी, तो ट्रंप से चिपके रहे शहबाज... क्या है ये डिप्लोमेसी

पीस बोर्ड पर साइन करने वाले देशों में अमेरिका, बहरीन, मोरक्को, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बेल्जियम, बुल्गारिया, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, मंगोलिया, पाकिस्तान, पराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और उज्बेकिस्तान हैं. इस तरह बोर्ड में आठ इस्लामिक देश शामिल हैं.

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बोर्ड ऑफ पीस के लॉन्च में भारत नदारद रहा. (Photo: AP) बोर्ड ऑफ पीस के लॉन्च में भारत नदारद रहा. (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:08 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान गुरुवार को बोर्ड ऑफ पीस को लॉन्च किया. इस दौरान 22 देशों ने औपचारिक रूप से इस बोर्ड की साइन सेरेमनी में हिस्सा लिया. इस मंच पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ यूएस राष्ट्रपति ट्रंप के साथ नजर आए लेकिन भारत ने इस मंच से दूरी बनाए रखी. इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं.

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दावोस में आयोजित यह समारोह पूरी तरह से योजनाबद्ध और प्रतीकात्मक था. ट्रंप के साथ कई मुल्कों के प्रमुख मंच पर नजर आए. एक-एक कर सभी ने बोर्ड ऑफ पीस के चार्टर पर साइन किए. इस दौरान शहबाज शरीफ, ट्रंप के दाईं ओर बैठे नजर आए. उन्होंने ट्रंप से हाथ मिलाया और इस बीच उन्हें ट्रंप के कान में फुसफुसाते भी देखा गया.

भारत उन कई बड़े देशों में शामिल था, जो इस बोर्ड के औपचारिक गठन के समय मौजूद नहीं था जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था. इस मामले से जुड़े जानकार ने बताया कि भारत ने ना तो इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और ना ही औपचारिक रूप से ठुकराया.

अमेरिका की ओर से हफ्तों तक चले कूटनीतिक प्रयासों के बाद 20 से ज्यादा देशों ने इस चार्टर पर हस्ताक्षर किए. हालांकि फ्रांस, ब्रिटेन, चीन और जर्मनी जैसे अहम देश भी इस कार्यक्रम से दूर रहे.

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भारत ने न्योते पर विचार किया, पाकिस्तान ने सदस्यता ली

‘बोर्ड ऑफ पीस’ के लॉन्च के दौरान भारत की गैरमौजूदगी खासतौर पर इसलिए उभरी क्योंकि पाकिस्तान, ट्रंप और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ मंच पर मौजूद था. माना जा रहा है कि यह भारत को रास नहीं आया. वो भी ऐसे समय में जब भारत बार-बार पाकिस्तान की सीमा-पार आतंकवाद में भूमिका को उजागर करता रहा है. इसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए हमले का जिक्र भी शामिल है.

अधिकारियों के मुताबिक, भारत इस प्रस्ताव से जुड़े भूराजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों को ध्यान में रखते हुए इसकी गहराई से समीक्षा कर रही है. भारत फिलिस्तीन मुद्दे पर टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन करता रहा है और यह पक्ष रखता है कि इजराइल और फिलिस्तीन मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति और सुरक्षा के साथ साथ-साथ अस्तित्व में रहें.

पाकिस्तान की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के सदस्य के रूप में पुष्टि हो चुकी है. पाकिस्तान के साथ इस समूह में अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, कजाकिस्तान, मोरक्को, तुर्की, पैराग्वे, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और वियतनाम भी शामिल हैं. वहीं जर्मनी, इटली, रूस, स्लोवेनिया और यूक्रेन समेत कई देश अब तक इस पहल पर स्पष्ट रुख अपनाने से बचते नजर आ रहे हैं.

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ट्रंप ने दोहराया भारत-पाकिस्तान को लेकर दावा

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर यह दावा किया कि उनके हस्तक्षेप से भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष टल गया था. हालांकि भारत इस दावे को पहले ही खारिज कर चुका है.

ट्रंप ने कहा था कि हमें बहुत खुशी है कि हम भारत और पाकिस्तान दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच शुरू हो चुके युद्ध को रोक पाए. मुझे बहुत सम्मान महसूस हुआ जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने हालात को बिगड़ने से ठीक पहले रोककर करोड़ों लोगों की जान बचाई.

ट्रंप ने ऐसा ही दावा एक दिन पहले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के विशेष संबोधन में भी किया था. उस दौरान उन्होंने तर्क दिया था कि व्यापार और टैरिफ से जुड़े दबाव जरिए अमेरिका ने संघर्षों को टालने में भूमिका निभाई.

वैश्विक महत्वाकांक्षाओं वाला एक नया बोर्ड

डोनाल्ड ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में पेश किया है, जिसका उद्देश्य संघर्षग्रस्त या संकट की आशंका वाले इलाकों में स्थिरता को बढ़ावा देना, वैध शासन की बहाली करना और स्थायी शांति सुनिश्चित करना है. शुरुआत में इसे इजराइली सैन्य अभियानों के दो साल बाद गाजा के पुनर्निर्माण के लिए शासन व्यवस्था की निगरानी और फंडिंग के समन्वय के तौर पर सोचा गया था, लेकिन इसके चार्टर में इससे कहीं व्यापक भूमिका तय की गई है.

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बोर्ड की लॉन्चिंग के दौरान ट्रंप ने कहा कि एक बार यह बोर्ड पूरी तरह से गठित हो जाए, तो हम लगभग जो चाहें कर सकते हैं और यह सब हम संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर करेंगे. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में अपार संभावनाएं” हैं, जिनका अब तक पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाया है.

इस बोर्ड की अध्यक्षता स्वयं ट्रंप करेंगे और शीर्ष स्तर पर इसमें केवल राष्ट्राध्यक्ष ही शामिल होंगे. अमेरिका का कहना है कि यह बोर्ड ट्रंप की 20 सूत्रीय गाजा योजना को लागू करने में अहम भूमिका निभाएगा. इस योजना में गाजा को कट्टरपंथ से मुक्त, आतंकवाद रहित क्षेत्र बनाने और वहां के निवासियों के हित में उसके पुनर्विकास की बात शामिल है. 

संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को लेकर चिंताएं

इस पहल ने कई देशों की राजधानियों में बेचैनी पैदा कर दी है. राजनयिकों का सवाल है कि क्या यह नया मंच वैश्विक कूटनीति और संघर्ष समाधान के लिए मुख्य मंच माने जाने वाले संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकता है. अमेरिका को छोड़कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के किसी भी स्थायी सदस्य देश ने अब तक इसमें शामिल होने की प्रतिबद्धता नहीं जताई है.

फ्रांस ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. ब्रिटेन ने कहा है कि वह फिलहाल इसमें शामिल नहीं हो रहा, जबकि चीन ने अब तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है. रूस ने कहा है कि वह इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिया है कि मॉस्को फिलिस्तीनी समर्थन के लिए धन मुहैया कराने को तैयार है.

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संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के साथ किसी भी तरह की भागीदारी ट्रंप की गाजा योजना का समर्थन करने वाले सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के दायरे में ही होगी.

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