ट्रंप ने स्पेन के साथ ट्रेड रोकने का दिया आदेश, NATO समिट में बताया 'बहुत बुरा' पार्टनर

नाटो समिट का मकसद सहयोगियों के बीच भरोसा मजबूत करना था, लेकिन एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप के तेवर हावी रहे. डिफेंस खर्च, ईरान और यूरोप के साथ रिश्तों पर उनके सख्त रुख ने सहयोगी देशों की मुश्किलें बढ़ा दीं. स्पेन और डेनमार्क को लेकर दिए गए बयानों ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी.

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नाटो समिट में ट्रंप का नया विवाद, स्पेन पर बरसे, डेनमार्क को ग्रीनलैंड पर दी चेतावनी. (Photo: Reuters) नाटो समिट में ट्रंप का नया विवाद, स्पेन पर बरसे, डेनमार्क को ग्रीनलैंड पर दी चेतावनी. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:44 PM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट को स्पेन के साथ सारा ट्रेड तुरंत रोकने का आदेश दिया है. ट्रंप ने मैड्रिड को NATO में 'बहुत बुरा पार्टनर' बताते हुए कहा कि वो स्पेन के साथ कोई कारोबार नहीं करना चाहते. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब डिफेंस खर्च और ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और स्पेन के बीच तनाव पहले से बना हुआ है.

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बुधवार को अंकारा में आयोजित NATO समिट के दौरान ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर स्पेन को निशाने पर लिया. यूरोपीय नेताओं को उम्मीद थी कि इस बैठक से सैन्य गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेद कम होंगे, लेकिन ट्रंप ने स्पेन के साथ विवाद को फिर हवा दे दी. इतना ही नहीं उन्होंने डेनमार्क को भी नाराज कर दिया. ट्रंप ने दोहराया कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण होना चाहिए.

राष्ट्रपति ट्रंप ने दूसरी बार कहा है कि स्पेन द्वारा NATO के नए डिफेंस खर्च लक्ष्य को मानने से इनकार करने पर उसके साथ व्यापार रोका जाना चाहिए. NATO ने सदस्य देशों के लिए GDP का 5 प्रतिशत रक्षा खर्च का नया लक्ष्य तय किया है, लेकिन स्पेन ने स्वीकार नहीं किया है. इससे पहले मार्च में भी ट्रंप ने ऐसा कहा था, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार सामान्य रूप से चलता रहा.

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NATO महासचिव मार्क रूट के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, "स्पेन किसी भी बात पर राजी नहीं है. आपको उन्हें साथ नहीं रखना चाहिए." इसके बाद रूट ने माहौल को शांत करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि स्पेन ने पिछले साल रक्षा खर्च बढ़ाकर GDP का 2 प्रतिशत कर दिया था. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अभी कुछ मुद्दे ऐसे हैं, जिन्हें सुलझाया जाना बाकी है.

इसी दौरान ट्रंप ने अपने ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की ओर मुड़कर कहा, "मैं उनके साथ कोई ट्रेड नहीं करना चाहता, ठीक है?" इस पर बेसेंट ने जवाब दिया, "हां सर." इसके बाद ट्रंप ने कहा, "इसे तुरंत ले लो. उनसे बात भी मत करो. वे बेकार हैं. वे बुरे लोग हैं. वे हमारे साथ बहुत पैसा कमाते हैं और हम देखेंगे कि वे बहुत कम कमाएं." इस पर स्पेन की भी प्रतिक्रिया सामने आई है.

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज के कार्यालय ने ट्रंप के बयानों पर कहा कि वो इन्हें हमेशा की तरह मान रहे हैं और वॉशिंगटन के साथ अपने बहुत अच्छे संबंध बनाए रखने का इरादा रखते हैं. यह भी कहा गया कि अमेरिका के साथ व्यापार में स्पेन का ट्रेड डेफिसिट है. दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते सरकारों की बजाय निजी कंपनियों के जरिए विकसित हुए हैं.

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स्पेन ने यह भी याद दिलाया कि वो यूरोपीय यूनियन के कस्टम्स और ट्रेड यूनियन का हिस्सा है. ऐसे में यूरोपीय यूनियन के नियमों के मुताबिक ट्रेड बातचीत पूरे समूह के साथ होती है, किसी एक सदस्य देश के साथ अलग से नहीं. इसलिए किसी एक सदस्य देश को अलग करके व्यापारिक फैसला लागू करना आसान नहीं होगा. ट्रंप लंबे समय से स्पेन के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करते रहे हैं. 

इसकी एक बड़ी वजह ईरान युद्ध को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद भी है. प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज एक सोशलिस्ट नेता हैं और माइनॉरिटी लेफ्टिस्ट सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्होंने ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका को अपने एयरस्पेस या स्पेन में मौजूद सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. अमेरिका और स्पेन दो अहम सैन्य अड्डों का संयुक्त संचालन करते हैं. 

इनका इस्तेमाल नौसैनिक और वायु अभियानों के लिए किया जाता है. ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव रणनीतिक स्तर पर भी अहम माना जा रहा है. आर्थिक मोर्चे पर भी स्पेन की अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण भागीदारी है. स्पेन दुनिया का सबसे बड़ा ऑलिव ऑयल एक्सपोर्टर है. इसके अलावा वह अमेरिका को ऑटो पार्ट्स, स्टील और केमिकल्स का भी निर्यात करता है. 

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