US-iran reach agreement live Updates: अमेरिका के साथ हुए समझौते के बीच ईरान की सेना का एक बड़ा बयान सामने आया है. ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने दावा किया है कि देश की जनता और सशस्त्र बलों ने यह साबित कर दिया है कि दुश्मन के पास सरेंडर करने के अलावा अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था. ईरान की सेना इस ऐतिहासिक डील को अपनी एक बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक जीत के रूप में देख रही है.
IDF का दावा है कि दक्षिणी लेबनान में हुए एक हवाई हमले में हिजबुल्लाह का टॉप कमांडर अली मूसा दकदुद की मौत हो गई है. सेना के मुताबिक, दकदुक को लिटानी नदी के दक्षिणी इलाके में निशाना बनाया गया. वह हिजबुल्लाह के पूर्व चीफ हसन नसरल्लाह की सुरक्षा यूनिट के हेड और एलीट राडवान फोर्स के कमांडर की जिम्मेदारी संभाल रहें थे.
बता दें कि अमेरिका-ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बन गई है, जिस पर आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. बताया जा रहा है कि इसके बाद तेहरान परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक विस्तृत चर्चा का दौर चलेगा.
पीस डील का ऐलान करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यूएस-ईरान के बीच पीस डील पूरी हो चुकी है. ऐसे में अब मैं होर्मुज को टोल-फ्री खोलने और नौसैनिक ब्लॉकेड हटाने की मंजूरी देता हूं. हालांकि, ईरान की ओर से लीडर को लेकर अभी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
अमेरिका-ईरान के बीच हुए इस समझौते पर दुनिया भर के देश खुशी जता रहे हैं, क्योंकि कई देश इस युद्ध के खत्म होने का इंतजार कर रहे थे.
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अमेरिका के साथ हुए समझौते के बीच ईरान की सेना का एक बड़ा बयान सामने आया है. ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने दावा किया है कि देश की जनता और सशस्त्र बलों ने यह साबित कर दिया है कि दुश्मन के पास सरेंडर करने के अलावा अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था. ईरान की सेना इस ऐतिहासिक डील को अपनी एक बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक जीत के रूप में देख रही है.
जापान के प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने को लेकर हुए समझौते का स्वागत किया है. पीएम ताकाइची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जापान हमेशा से इस इलाके में शांति चाहता था और दोनों देशों के बीच हुआ यह फैसला हालात को सुधारने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है. उन्होंने बातचीत का रास्ता चुनने के लिए दोनों देशों की तारीफ की. इसके अलावा, इस डील को कराने वाले बाकी मुल्कों की मध्यस्थता को भी सराहा. जापानी प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस समझौते को जमीन पर पूरी तरह लागू किया जाएगा, जिससे हॉर्मुज में जहाजों का आना-जाना सुरक्षित हो सके.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एलान किया है कि वह इस समझौते पर साइन करने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शुक्रवार को जिनेवा जाएंगे. जेडी वेंस ने यह भी संकेत दिए हैं कि इस बेहद अहम और बड़े मौके पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद भी जिनेवा पहुंच सकते हैं. इस हाई-प्रोफाइल दौरे के सामने आने के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें शुक्रवार को होने वाले इस समझौते पर टिक गई हैं.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने भी अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत किया है. उन्होंने सभी पक्षों से इसे तुरंत और पूरी तरह लागू करने की अपील की है. मैक्रॉन ने कहा कि इस समझौते के बाद अब हॉर्मुज को बिना किसी शर्त के तुरंत समुद्री जहाजों के लिए खोल देना चाहिए, क्योंकि ग्लोबल इकोनॉमी और क्षेत्र की शांति के लिए व्यापारिक जहाजों का बिना रोक-टोक आना-जाना बेहद जरूरी है. मैक्रॉन ने साफ किया कि यह डील मिडिल ईस्ट में स्थाई शांति का रास्ता खोलेगी, जिससे ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक प्रोग्राम जैसे मुद्दों का भी हल निकलेगा. इसके साथ ही उन्होंने लेबनान में पूर्ण युद्धविराम और वहां की स्थिरता का पूरा समर्थन करने की बात भी दोहराई है.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र में शांति के लिए एक बड़ा कदम बताया है. एर्दोगन ने ट्वीट कर कहा कि पूरी दुनिया को लंबे समय से इस अच्छी खबर का इंतजार था, लेकिन समझौता पूरी तरह लागू होने से पहले सभी देशों को भड़काऊ बयानबाजी और किसी भी तरह की साजिश से सावधान रहना होगा. इस ऐतिहासिक डील को कराने में पाकिस्तान ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है, जिसके लिए तुर्की के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान की तारीफ की और उसका विशेष आभार जताया. इसके साथ ही उन्होंने कतर और सऊदी अरब के कूटनीतिक सहयोग की भी सराहना की.
अमेरिका-ईरान पीस डील पर UN महासचिव ने खुशी जताते हुए कहा, 'मैं अमेरिका और ईरान को शांति समझौते पर पहुँचने के लिए बधाई देता हूं. इस समझौते में तुरंत और स्थायी युद्धविराम, होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और आगे की बातचीत के लिए एक रूपरेखा तैयार करने की व्यवस्था है. ये संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.'
उन्होंने आगे कहा कि मैं पाकिस्तान, कतर, मिस्र, सऊदी अरब, तुर्की और क्षेत्र के अन्य देशों का भी आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने शांति समझौते तक दोनों देशों के पहुंचाने वाली बातचीत का समर्थन करने में खास भूमिका निभाई है.
ईरान-अमेरिका के बीच शांति समझौते पर बनी सहमति को लेकर अब ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिवालय ने आधिकारिक बयान जारी किया है. बयान में कहा गया है कि शहीद नेता की अगुवाई में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने अमेरिकी-जियोनिस्ट दुश्मन पर अपनी श्रेष्ठता साबित की है. सुप्रीम लीडर (ईरानी नेता) के मार्गदर्शन में, पूरे राष्ट्र के समर्थन और इस्लाम के योद्धाओं के प्रयासों से कई महीनों की कठिन और गहन वार्ताओं (इस्लामाबाद वार्ता) के बाद 14 जून की शाम को अमेरिका के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का मसौदा अंतिम रूप दे दिया गया.
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने अपने बयान में कहा कि हुए समझौतों के अनुसार, लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य अभियान आज रात से ही तुरंत और हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे और इसके अलावा ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी तुरंत और पूरी तरह से हटा ली जाएगी. इस समझौता ज्ञापन पर आधिकारिक तौर पर शुक्रवार, 19 जून को हस्ताक्षर किए जाएंगे.
सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने ये भी कहा कि अंतिम समझौते के लिए बातचीत तब तक टाल दी जाएगी, जब तक कि दूसरी पार्टी (अमेरिका) समझौता ज्ञापन के अनुसार, अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर लेती. बयान में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान, पाकिस्तान और कतर सरकार के प्रयासों की भी सराहना की गई है.
UK, फ्रांस, जर्मनी और इटली समेत E4 देशों ने रविवार को कहा कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कदमों के जवाब में उस पर से प्रतिबंध हटाने को तैयार हैं, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच अपना टकराव खत्म करने के लिए समझौता हो गया है.
ईरानी मीडिया आउटलेट मेहर ने अमेरिका के साथ ईरान के प्रस्तावित 14 सूत्री ड्राफ्ट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) जारी किया है. ईरान इसे दोनों देशों के बीच हो रहे शांति समझौते का प्रारूप बता रहा है. ईरानी मीडिया के अनुसार, ये ड्राफ्ट दोनों पक्षों के बीच चल रही गहन कूटनीतिक वार्ताओं का नतीजा है. मेहर ने इसे पूर्ण 14-पॉइंट ड्राफ्ट बताते हुए दावा किया है कि इसमें ईरान की अधिकांश प्रमुख मांगों को शामिल किया गया है.