'वतन वापसी हर किसी के लिए जरूरी नहीं...', ग्रीन कार्ड पर US का यू-टर्न

अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले लाखों प्रवासियों को DHS की नई सफाई से राहत मिली है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश आवेदकों को स्थायी निवास की अर्जी पर फैसला होने तक अमेरिका छोड़ने की जरूरत नहीं होगी.

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ग्रीनकार्ड को लेकर DHS ने लाखों प्रवासियों को राहत दी है ग्रीनकार्ड को लेकर DHS ने लाखों प्रवासियों को राहत दी है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:51 PM IST

अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले लाखों प्रवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने हाल ही में जारी उस निर्देश पर सफाई दी है, जिससे ग्रीन कार्ड आवेदकों, कंपनियों और इमिग्रेशन विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ गई थी. विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश ग्रीन कार्ड आवेदकों को उनकी स्थायी निवास (Permanent Residency) की अर्जी पर फैसला होने तक अमेरिका छोड़ने की जरूरत नहीं होगी.

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दरअसल, एक सप्ताह पहले अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के एक बयान ने प्रवासी समुदाय में हलचल मचा दी थी. बयान में संकेत दिया गया था कि स्थायी निवास की मांग करने वाले लोगों को अपनी अर्जी पर फैसला होने तक अपने मूल देश लौटना पड़ सकता है, सिवाय कुछ असाधारण परिस्थितियों के. इस बयान के बाद अमेरिका में रह रहे हजारों विदेशी छात्रों, पेशेवरों और ग्रीन कार्ड के इंतजार में बैठे लोगों के बीच डर और उलझन की स्थिति बन गई थी. 

अब DHS ने कहा है कि नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. विभाग के मुताबिक, इमिग्रेशन अधिकारियों के पास पहले से ही यह अधिकार है कि वे हर मामले की अलग-अलग समीक्षा करें और तय करें कि किसी आवेदक को ग्रीन कार्ड प्रक्रिया अमेरिका के भीतर पूरी करने की अनुमति दी जाए या नहीं.

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क्या है मौजूदा नियम?
वर्तमान नियमों के तहत कई पात्र प्रवासी "एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस" (Adjustment of Status) प्रक्रिया के जरिए अमेरिका में रहते हुए ही ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं. इस दौरान उन्हें देश छोड़ने की जरूरत नहीं होती. आमतौर पर किसी व्यक्ति को उसका नियोक्ता (Employer) या परिवार का कोई करीबी सदस्य ग्रीन कार्ड के लिए स्पॉन्सर करता है.

यही सिस्टम बीते कई वर्षों से लागू है और बड़ी संख्या में लोग इसका लाभ उठाते रहे हैं. साल 2024 में अमेरिका ने लगभग 14 लाख ग्रीन कार्ड जारी किए थे, जिनमें बड़ी संख्या उन लोगों की थी जिन्होंने अमेरिका के भीतर रहते हुए 'एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस' के तहत आवेदन किया था.

विवाद तब शुरू हुआ जब USCIS के प्रवक्ता जैक कहलर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी के संदर्भ में कहा था कि अब अस्थायी वीजा पर अमेरिका में मौजूद लोगों को ग्रीन कार्ड अप्लाई करने के लिए अपने देश वापस लौटना होगा, जब तक कि उनके मामले में कोई विशेष परिस्थिति न हो.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कहलर ने कहा था, 'अब से अमेरिका में अस्थायी रूप से रह रहा कोई भी व्यक्ति अगर ग्रीन कार्ड चाहता है तो उसे आवेदन प्रक्रिया के लिए अपने देश लौटना होगा' उन्होंने यह भी कहा था कि इससे इमिग्रेशन सिस्टम कानून के अनुरूप काम करेगा और उन खामियों को बंद किया जा सकेगा जिनका फायदा उठाकर कुछ लोग ग्रीन कार्ड आवेदन खारिज होने के बाद भी अमेरिका में अवैध रूप से रुक जाते हैं.

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इस बयान के बाद प्रवासी समुदाय, विश्वविद्यालयों, तकनीकी कंपनियों और विदेशी कर्मचारियों पर निर्भर उद्योगों में चिंता बढ़ गई थी.

भारतीयों पर क्यों था सबसे ज्यादा असर?

इस मुद्दे का सबसे ज्यादा असर भारतीय समुदाय पर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी. इसकी वजह यह है कि अमेरिका में जारी होने वाले कुल H-1B वीजा में करीब 70 प्रतिशत भारतीयों को मिलते हैं. बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर H-1B वीजा पर अमेरिका में काम करते हैं और बाद में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं. इसके अलावा F-1 छात्र वीजा और टूरिस्ट वीजा धारकों में भी चिंता फैल गई थी. उन्हें डर था कि यदि उनका ग्रीन कार्ड आवेदन लंबित है तो उन्हें अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है.

H-1B धारकों को मिलेगी राहत

हालांकि नई सफाई के बाद H-1B वीजा धारकों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का कहना है कि H-1B कार्यक्रम "ड्यूल इंटेंट" (Dual Intent) सिद्धांत पर आधारित है. इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति अस्थायी वर्क वीजा पर अमेरिका में काम करते हुए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड के लिए भी प्रयास कर सकता है. इसी वजह से H-1B वीजा धारकों को ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के दौरान अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर किए जाने की संभावना काफी कम मानी जा रही है.

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DHS की ताजा सफाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़ी पुरानी व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. हालांकि अंतिम फैसला अब भी इमिग्रेशन अधिकारियों के विवेक पर निर्भर करेगा, लेकिन अधिकांश आवेदकों को अमेरिका छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे खासकर भारतीय पेशेवरों, छात्रों और ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे लाखों प्रवासियों को बड़ी राहत मिली है.

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