Ukraine-Russia War के बीच आज अमेरिका के NSA और चीन के टॉप अधिकारी की मुलाकात

Ukraine-Russia War: रूस ने अमेरिका पर यूक्रेन में रासायनिक और जैविक हथियारों की प्रयोगशाला चलाने का आरोप लगाया था. इस बीच चीन ने रूस के आरोपों का समर्थन किया था. रूस और चीन के इस दांव से अमेरिका पर दबाव बढ़ गया था.

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युद्ध के दौरान घायल सैनिक को ले जाते उसके साथी. (File Photo) युद्ध के दौरान घायल सैनिक को ले जाते उसके साथी. (File Photo)

aajtak.in

  • रोम,
  • 14 मार्च 2022,
  • अपडेटेड 8:41 AM IST
  • चीन को रूस की मदद करने से मना कर रहा अमेरिका
  • अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ बिगड़ रहे चीन के रिश्ते

Ukraine-Russia War: रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और चीन के विदेश नीति सलाहकार की इटली के रोम में आज मुलाकात होने वाली है. रूस के साथ जारी यूक्रेन के युद्ध के कारण चीन और अमेरिका के बीच भी तनाव बढ़ रहा है. बता दें कि अमेरिका, चीन को लगातार मना कर रहा है कि वह किसी भी तरह से रूस की मदद न करे.

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इस मुलाकात से पहले व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने चीन को चेतावनी भी दी है. उन्होंने कहा है कि रूस पर लगे वैश्विक प्रतिबंध से बचने में चीन को उसकी मदद नहीं करनी चाहिए. अमेरिका, चीन पर रूस के दुष्प्रचार का भी आरोप लगा रहा है. अमेरिका का मानना है कि रूस ऐसा इसलिए कर रहा है कि उस पर लगे रासायनिक और जैविक हथियार इस्तेमाल करने के आरोप से रूस बच सके. इसमें चीन भी रूस का साथ दे रहा है. 

यूक्रेन पर रूस के हमले के कारण चीन के अमेरिका और यूरोपीयन यूनियन से रिश्ते लगातार खराब हो रहे हैं, जबकि दोनों ही चीन के 2 सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं. चीन को दोनों के बाजार की जरूरत है. इसके बाद भी वह दबे शब्दों में रूस का समर्थन कर रहा है. 

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अमेरिका के NSA जेक सुलिवन चीन की विदेश नीति के वरिष्ठ सलाहकार यांग जिएची के साथ मुलाकात करेंगे. मुलाकात से पहले उन्होंने कहा कि वह सार्वजनिक मुलाकात करने या धमकियां देने के लिए नहीं जा रहे हैं. लेकिन वे चीन से सीधे तौर पर बात करेंगे कि अगर चीन, रूस का साथ देता है तो उसे भी इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

चीन से क्यों चिंतित है अमेरिका

दरअसल, रूस ने आरोप लगाया था कि अमेरिका, यूक्रेन में रासायनिक और जैवि हथियारों की प्रयोगशाला च ला रहा है. रूस के इस आरोप के बाद चीन ने भी इसका समर्थन किया था. चीन के समर्थन के बाद अमेरिका पर दबाव बढ़ गया है. इस मसले पर ही अमेरिका, चीन से बात कर सकता है. अमेरिका का मानना है कि ऐसे आरोप लगाकर रूस अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाह रहा है.

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