ईरान-अमेरिका युद्धविराम की कोशिशों को झटका, 'बिचौलिए' पाकिस्तान ने साधी चुप्पी, तेहरान ने रखीं ये बड़ी सख्त शर्तें

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं. शांति प्रस्ताव की खबरों पर पाकिस्तान ने चुप्पी साध ली है, लेकिन बातचीत जारी होने की पुष्टि की है. पर्दे के पीछे चल रही कूटनीति, सख्त शर्तें और ट्रंप की चेतावनियों ने पूरे घटनाक्रम को संवेदनशील बना दिया है.

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शांति प्रस्ताव पर बोलने से पाकिस्तान का इनकार, लेकिन बैकचैनल बातचीत जारी है. (File Photo: ITG) शांति प्रस्ताव पर बोलने से पाकिस्तान का इनकार, लेकिन बैकचैनल बातचीत जारी है. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली/इस्लामाबाद,
  • 06 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:14 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की कोशिशों को झटका लगता दिख रहा है. इस मामले में 'बिचौलिए' की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने अब चुप्पी साध ली है. उसने उस रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिसमें दावा किया गया कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने के लिए कोई प्रस्ताव दिया है. हालांकि, उसने यह जरूर कहा कि शांति प्रक्रिया अभी जारी है.

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सरकारी चैनल 'पाकिस्तान टीवी' के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि 45 दिनों के संघर्ष-विराम या 15-सूत्रीय प्रस्ताव को लेकर कई तरह की खबरें सामने आई हैं, लेकिन पाकिस्तान इस तरह की बातों पर किसी तरह की कोई टिप्पणी नहीं करता. हालांकि, पश्चिमी मीडिया में यह दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने वॉशिंगटन और तेहरान को एक युद्धविराम प्रस्ताव सौंपा है.

इस प्रस्ताव का उद्देश्य पहले युद्धविराम लागू करना और फिर व्यापक बातचीत के जरिए संघर्ष को खत्म करना था. पाकिस्तान ने इस दिशा में अपने प्रयास पिछले महीने ही शुरू कर दिए थे. एक समय ऐसा भी आया जब वह अमेरिका और ईरान के अधिकारियों की मेजबानी के करीब पहुंच गया था, लेकिन दोनों पक्षों के सख्त रुख और ट्रंप के भड़काऊ बयान के कारण ये कोशिश सफल नहीं हो सकी.

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कुछ समय पहले संघर्ष समाप्त कराने के लिए पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के साथ बैठक आयोजित की थी. इसके बाद पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच भी बातचीत हुई थी. दोनों नेताओं ने मिलकर एक पांच-सूत्रीय शांति योजना जारी की थी, जिसमें संघर्ष-विराम और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया गया था.

ईरान की शर्तें और सख्त रुख

जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रहे हैं. वो लगातार अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के संपर्क में हैं. पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह तभी किसी प्रस्ताव पर विचार करेगा, जब अमेरिका और इजरायल उसके खिलाफ सभी तरह की सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद कर दे. 

स्वीकार्य नहीं अस्थायी युद्धविराम

इसमें ईरान के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाना भी शामिल है. सूत्रों का कहना है कि तेहरान ने यह भी मांग रखी है कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दी गई समय सीमा बिना शर्त वापस ली जाए. इस बीच ईरान ने संकेत दिया है कि किसी भी तरह का अस्थायी युद्धविराम स्वीकार्य नहीं है. ईरान का मानना है कि इससे विरोधियों को दोबारा संगठित होने का मौका मिल सकता है.

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पर्दे के पीछे कूटनीति तेज

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और इशाक डार लगातार अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के संपर्क में हैं. कोशिश यह है कि दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाया जा सके. बताया जा रहा है कि प्रस्तावित योजना में तत्काल युद्धविराम, होर्मुज स्ट्रेट को खोलना और इस्लामाबाद में आमने-सामने बातचीत शामिल है.

शर्तों से पीछे नहीं हटेगा ईरान

इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तो हमले तेज किए जा सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि समझौते की संभावना बनी हुई है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने भी संकेत दिया है कि उनकी मांगें तीसरे पक्षों के जरिए अमेरिका तक पहुंचा दी गई हैं. उन्होंने कहा कि ईरान अपनी जायज मांगों से पीछे नहीं हटेगा.

पाक की भूमिका पर नजर

गौरतलब है कि पाकिस्तान खुद को इस पूरे विवाद में एक मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहा है. वह अमेरिका और ईरान दोनों के साथ अपने संबंधों के साथ-साथ चीन और सऊदी अरब के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है. फिलहाल, पाकिस्तान भले ही किसी प्रस्ताव की पुष्टि नहीं कर रहा, लेकिन पर्दे के पीछे कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं. 

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