अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से नाकेबंदी को हटाने के मूड में नहीं दिख रहे हैं. उनके मुताबिक ये नाकेबंदी ईरान पर दबाव बनाने का सबसे बड़ा हथियार है. ऐसे में ईरान दूसरे विकल्पों के जरिए चीन तक तेल पहुंचाने की तैयारी में है.
ट्रंप ने ईरान के बिना किसी परमाणु समझौते के होर्मुज खोलने के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है. होर्मुज बंद होने का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल रहा है. इस तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं.
चीन अपनी तेल जरूरतों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आयात करता है. नाकाबंदी का असर चीन और ईरान के बीच आयात-निर्यात पर पड़ रहा है. ऐसे में ये नाकाबंदी ट्रंप की चीन यात्रा को भी प्रभावित कर सकती है.
रेल के जरिए चीन को तेल भेजने की तैयारी
ईरान चीन को तेल निर्यात के नए विकल्प तलाश रहा है. फार्स न्यूज एजेंसी की मानें तो ईरानी शिपिंग एसोसिएशन का कहना है कि व्यापार के लिए खोजे जा रहे वैकल्पिक रास्ते पर्याप्त नहीं हैं. ईरान रेल के जरिए चीन को तेल भेजने और सड़क मार्ग से पाकिस्तान और काकेशस से खाद्य सामग्री लाने की भरपूर कोशिश कर रहा है.
हालांकि, आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 40 प्रतिशत व्यापार ही इन रास्तों पर मोड़ा जा सकता है, जो अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कम है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ की गई सैन्य नाकेबंदी अब उनकी चीन यात्रा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली ट्रंप की मुलाकात में अब युद्ध के आर्थिक नतीजों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है. चीन के लिए ये कूटनीतिक दौरा ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
ट्रंप के चीन दौरे से निकल सकता है हल
होर्मुत पर नाकाबंदी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मांग की है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सामान्य आवाजाही के लिए तुरंत फिर से खोला जाए. उनका कहना है कि बढ़ते वैश्विक आर्थिक जोखिमों को और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
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डेविड डेस रोचेस जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि रुकावट का मतलब नियंत्रण नहीं होता. जैसे-जैसे अमेरिका में 'वॉर पावर्स' की समयसीमा नजदीक आ रही है, ट्रंप पर सैन्य विकल्पों और तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर घरेलू राजनीतिक दबाव भी बढ़ता जा रहा है. अब सबकी निगाहें चीन यात्रा पर टिकी हैं, क्योंकि चीन इस युद्ध के समाधान के लिए एक सबसे अहम कड़ी बन गया है.
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