'यहां से बाहर निकलो', सिडनी की मस्जिद में PM अल्बानीज का जमकर हुआ विरोध

सिडनी की लेकम्बा मस्जिद में ईद मनाने पहुंचे ऑस्ट्रेलियाई PM एंथोनी अल्बानीज को गाजा जंग पर उनके रुख के कारण भारी विरोध और हूटिंग झेलनी पड़ी. प्रदर्शनकारियों ने उन्हें 'नरसंहार समर्थक' बताते हुए 'बाहर निकलो' और 'शर्म करो' के नारे लगाकर मस्जिद से खदेड़ दिया.

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सिडनी की मस्जिद में पीएम का भारी विरोध (Photo: Reuters) सिडनी की मस्जिद में पीएम का भारी विरोध (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:17 PM IST

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज को सिडनी की एक मस्जिद में भारी विरोध का सामना करना पड़ा. वे वहां ईद की नमाज और जश्न में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया. जैसे ही पीएम अल्बानीज़ और गृह मंत्री टोनी बर्क लेकम्बा मस्जिद के अंदर दाखिल हुए, वहां मौजूद भीड़ ने उनकी हूटिंग शुरू कर दी. प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चिल्लाकर कहा, 'यहां से बाहर निकलो.'

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लेकम्बा ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यहां ईद पर हजारों लोग जुटे थे. अल्बानीज के पहुंचने के महज 15 मिनट बाद ही गाजा जंग को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. प्रदर्शनकारियों ने उन्हें 'नरसंहार का समर्थक' तक कह डाला. आयोजकों ने माइक पर चिल्लाकर कहा, 'आज ईद है, खुशी का दिन है, प्लीज शांत हो जाइए.' लेकिन भीड़ का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा था और विरोध बढ़ता ही गया.

आखिर क्यों हुआ विरोध?

इस हंगामे की सबसे बड़ी वजह गाजा में जारी युद्ध है. ऑस्ट्रेलिया का मुस्लिम समुदाय इस बात से नाराज है कि अल्बानीज सरकार इजरायल के बचाव के अधिकार का समर्थन कर रही है. लोगों को सरकार का यह रुख दोहरा लग रहा है और वे इसे लेकर काफी गुस्से में हैं. इसके अलावा, हाल ही में सरकार ने एक इस्लामी संगठन 'हिज्ब-उत-तहरीर' पर बैन लगाया है. इससे भी समुदाय के एक हिस्से में काफी नाराजगी है. हंगामा यहीं नहीं रुका, जब पीएम अल्बानीज वहां से जाने लगे तो गुस्साए लोगों ने 'तुम्हें शर्म आनी चाहिए' के नारे लगाते हुए काफी दूर तक उनका पीछा किया.

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हालात इतने बिगड़ गए थे कि एक सुरक्षा गार्ड को एक प्रदर्शनकारी को जमीन पर पटकते हुए देखा गया. हालांकि, बाद में पीएम ने इस घटना को बहुत तवज्जो नहीं दी. उन्होंने कहा कि 30,000 की भीड़ में कुछ लोगों के शोर मचाने को पूरे समुदाय का गुस्सा नहीं मानना चाहिए.

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