AI की दुनिया में पिछले दो साल से एक ही कहानी सुनाई जा रही थी. जो AI सीखेगा, वही दुनिया जीतेगा. अमेरिका से लेकर चीन, दक्षिण कोरिया और भारत तक हर देश AI पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा है. निवेशकों को भी लग रहा था कि AI कंपनियां आने वाले समय की सबसे बड़ी कमाई करेंगी. इसी उम्मीद में टेक कंपनियों के शेयर लगातार बढ़ रहे थे. लेकिन 22 जून को अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे AI वर्ल्ड को एक्सपोज कर दिया. इसी क्रैश की वजह से एलॉन मस्क भी ट्रिलियनेअर की लिस्ट से बाहर हो गए.
एक ही दिन में दुनिया की सबसे बड़ी AI कंपनियों के शेयर लड़खड़ा गए. NVIDIA को कमोबेश 200 अरब डॉलर का नुकसान हुआ. अमेजन लगभग 5% नीचे आ गया. मेटा के शेयर करीब 2% गिर गए. गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट में भी भारी बिकवाली हुई और कंपनी के मार्केट कैप से कमोबेश 270 अरब डॉलर तक साफ हो गए. दुनिया के शेयर बाजारों में बेचैनी फैल गई. सवाल सिर्फ इतना नहीं था कि शेयर क्यों गिरे. असली सवाल था कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिससे पूरा AI सेक्टर ही हिल गया?
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सबसे हैरानी की बात यह थी कि न कोई बड़ा युद्ध छिड़ा था, न ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव हुआ था और न ही किसी सरकार ने AI पर कोई प्रतिबंध लगाया था. लेकिन जब असली वजह सामने आई तो पूरी दुनिया हैरान रह गई.
सिर्फ दो लोगों की वजह से क्रैश हुआ मार्केट
कहानी की शुरुआत 16 जून को हुई. गूगल के सबसे काबिल AI रिसर्चर नोम शजीर (Noam Shazeer) ने कंपनी छोड़कर ओपन एआई जॉइन करने का ऐलान कर दिया. नोम शजीर वही वैज्ञानिक हैं जो 2017 के ऐतिहासिक ट्रांसफॉर्मर रिसर्च पेपर के को-राइटर थे. यही ट्रांसफॉर्मर टेक्नोलॉजी आज ChatGPT, Gemini, Claude और लगभग सभी अडवांस्ड AI मॉडल की नींव मानी जाती है. अभी बाजार इस खबर को समझ ही रहा था कि 19 जून को दूसरी बड़ी खबर आ गई.
गूगल डीपमाइंड के मशहूर वैज्ञानिक और रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार विजेता जॉन जंपर (John Jumper) ने भी गूगल छोड़कर एंथ्रॉपिक जॉइन करने का फैसला कर लिया. दोनों खबरें वीकेंड और इसके आसपास सामने आईं. 22 जून को जैसे ही बाजार खुला, निवेशकों ने अल्फाबेट के शेयर बेचने शुरू कर दिए. कुछ ही घंटों में कंपनी का शेयर इंट्राडे ट्रेडिंग में करीब 7.2% तक टूट गया, जो एक साल से ज्यादा समय में उसकी सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है.
आखिर दो कर्मचारियों के जाने से 250 बिलियन डॉलर क्यों डूब गए?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दो कर्मचारियों के सिर्फ नौकरी बदलने भर से एआई कंपनियों को इतना बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. अगर कोई सामान्य कर्मचारी नौकरी छोड़ता है तो किसी कंपनी के शेयर पर शायद ही कोई असर पड़ता है. लेकिन यहां मामला सामान्य कर्मचारियों का नहीं है.
नोम शजीर और जॉन जंपर AI इंडस्ट्री के उन चुनिंदा वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं जिनके रिसर्च पर पूरी इंडस्ट्री आगे बढ़ रही है. दिलचस्प बात यह भी है कि Google ने दो साल पहले ही नोम शजीर को हायर करने के लिए करीब 2.7 बिलियन डॉलर खर्च किए थे. कैरेक्टर एआई से जुड़े सौदे और उनकी टीम को वापस लाने पर इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद उनका फिर ओपन एआई चले जाना निवेशकों के लिए बड़ा झटका था.
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इससे निवेशकों में गलत संदेश गया और गूगल पर उनका विश्वास टूट गया. निवेशकों को लगा कि अगर Google अपने सबसे अहम AI टैलेंट को भी रोक नहीं पा रहा, तो भविष्य में AI की रेस में वो पीछे हो सकता है. यहीं से निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगा.
बाजार को किस बात का डर सताने लगा?
असल चिंता सिर्फ दो वैज्ञानिकों के जाने की नहीं थी. डर इस बात का था कि क्या AI इंडस्ट्री असल में कुछ गिने-चुने लोगों के भरोसे चल रही है? अगर आज गूगल का वैज्ञानिक ओपन एआई चला जाता है, कल ओपन एआई का वैज्ञानिक किसी और स्टार्टअप में चला जाए और फिर एंथ्रोपिक का वैज्ञानिक किसी नई कंपनी में तो क्या मार्केट पर इसी तरह का असर होगा?
इस कहानी का दूसरा दिलचस्प पहलू भी है. गूगल के शेयर टूट गए, लेकिन ओपन एआई और एंथ्रोपिक पर कोई नेगेटिव असर नहीं दिखा. इसकी वजह साफ है. दोनों कंपनियां अभी भी प्राइवेट कंपनियां हैं. इनके शेयर स्टॉक मार्केट में लिस्टेड नहीं हैं. इसलिए निवेशक इनके शेयर बेच ही नहीं सकते. उल्टा, दोनों कंपनियों को फायदा हुआ. ओपन एआई को एआई के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में से एक नोम शजीर मिल गए और एंथ्रोपिक ने भी इसी लेवल के टैलेंट को अपने साथ जोड़ने में कामयाब रहा.
इनके अलावा Gemini डेवलपमेंट से जुड़े दो और वैज्ञानिकों जोनास एडलर और अलेक्जेंडर प्रिट्जेल ने भी नौकरी छोड़ने का ऐलान कर दिया है. वे एंथ्रोपिक जॉइन करने वाले हैं. यानी गूगल को टॉप टैलेंट का नुकसान हुआ तो वहीं इसकी राइवल कंपनियों को फायदा हुआ.
AI बूम पर पहला बड़ा सवाल
इस घटना ने निवेशकों के सामने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. AI पर खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कमाई कहां है? Microsoft, Google, Meta, Amazon और दूसरी कंपनियां अरबों डॉलर AI मॉडल बनाने में लगा रही हैं. बड़े डेटा सेंटर बन रहे हैं. लाखों GPU खरीदे जा रहे हैं. लेकिन अभी तक AI से उतनी कमाई नहीं हो रही जितनी उम्मीद की गई थी.
ओपन एआई के सोरा मॉडल पर भी यूजर्स की एक्टिविटी कम है. कई कंपनियां अभी तक यह तय नहीं कर पाई हैं कि अरबों डॉलर का निवेश आखिर कैसे वापस निकल पाएगा. यानी बाजार अब सिर्फ AI की संभावनाओं पर नहीं, बल्कि उसकी कमाई पर भी सवाल पूछने लगा है.
शेयर क्रैश की जद में एलॉन मस्क की कंपनी भी
एलॉन मस्क AI को लेकर सबसे बड़े आशावादी हैं. वह लगातार कहते रहते हैं कि दुनिया में करोड़ों ह्यमनाइड रोबोट्स होंगे. उससे लोगों की जिंदगी आसान बनेगी लेकिन स्टॉक मार्केट में इस तरह के झटकों की वजह से निवेशकों का विश्वास कम हुआ. SpaceX के शेयरों में 22 जून को करीब 16% तक गिरावट दर्ज की गई. तीन दिनों में कंपनी को 600 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है. इससे उनके ट्रिलियन डॉलर क्लब में पहुंचने की चर्चा को भी बड़ा झटका लगा.
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शेयर मार्केट में इतने बड़े क्रैश को लेकर कुछ लगे न लगे लेकिन लेकिन इतना जरूर है कि इस घटना ने निवेशकों को पहली बार यह एहसास कराया कि AI की दुनिया सिर्फ तकनीक की नहीं, बल्कि टैलेंट, भरोसे और बिजनेस मॉडल की भी लड़ाई है.
यही वजह है कि सिर्फ दो वैज्ञानिकों के इस्तीफे ने दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों को हिला दिया. इस घटना ने निवेशकों को यह याद दिला दिया कि AI की दौड़ अभी खत्म नहीं हुई है. असली मुकाबला अब सिर्फ बेहतर मॉडल ही बनाने का नहीं, बल्कि बेहतर टैलेंट को अपने साथ बनाए रखने और उस तकनीक को मुनाफे में बदलने का भी है. तभी तय होगा कि AI का यह बूम फ्यूचर की सबसे बड़ी आर्थिक क्रांति बनेगा या फिर इतिहास के सबसे बड़े टेक बबल्स में शामिल हो जाएगा.
एम. नूरूद्दीन