बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह दिसंबर 2026 में भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और वहां की अदालत के सामने आत्मसमर्पण करेंगी. मौत की सजा सुनाए जाने के बावजूद हसीना ने कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा है, लेकिन वह अपने देश लौटने का फैसला नहीं बदलेंगी.
रॉयटर्स को दिए करीब एक घंटे के टेलीफोनिक इंटरव्यू में 78 वर्षीय हसीना ने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी बांग्लादेश लौटेंगे और न्यायिक प्रक्रिया का सामना करेंगे. शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में तख्तापलट और हिंसक छात्र आंदोलन के बाद देश छोड़कर भारत आ गई थीं, जिसके बाद भारत ने उन्हें शरण दी.
इसके बाद नवंबर 2025 में, बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए दमन और मौतों के मामले में शेख हसीना को उनकी गैरमौजूदगी में ही मौत की सजा सुना दी थी. हालांकि, हसीना इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करती रही हैं.
मुझे जाना ही होगा- हसीना
उनका ये बयान ऐसे समय में आया है जब ढाका लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है. हसीना ने कहा कि मौत की सज़ा के बावजूद वह लौटेंगी. शेख हसीना ने रॉयटर्स से कहा, "जब मैं वापस लौटूंगी, तो वे मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है. यहां तक कि वे मेरी हत्या भी की जा सकती है.. लेकिन फिर भी, मुझे जाना ही होगा. मेरी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर इस वक्त बांग्लादेश में भयानक अत्याचार और दमन किया जा रहा है. अगर मुझे मौत आनी ही है, तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी मिट्टी पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहा था."
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आपको बता दें कि शेख हसीना के साथ लौटने वाले नेताओं की लिस्ट में देश के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमा खान कमाल भी शामिल हो सकते हैं, जिन्हें बांग्लादेश की अदालत ने मौत की सजा सुनाई है.
ढाका लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है. बांग्लादेश में पहले मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार और अब प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अगुवाई वाली बीएनपी (BNP) सरकार लगातार भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है. हसीना ने रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने अपनी वापसी के बारे में किसी विदेशी सरकार से कोई बातचीत नहीं की है.
भारत का क्या है रुख?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत बांग्लादेश के प्रत्यर्पण अनुरोध की समीक्षा कर रहा है. साथ ही नई सरकार के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखने और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की इच्छा भी जताई है.
हसीना ने कहा कि ढाका सरकार लगातार भारत को पत्र भेज रही है, लेकिन उन्होंने दोहराया कि "मुझे किसी के भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी, मैं खुद अपने देश लौटूंगी."
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