अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर एक बार फिर ईरान पर हमले का जुनून सवार हो गया है. उन्होंने ईरान को धमकाते हुए कहा है कि अगर उसने अमेरिका के साथ बिना किसी शर्त परमाणु समझौता नहीं किया तो वो ईरान पर हमला करेंगे. उन्होंने कहा है कि अमेरिका का ये हमला बेहद गंभीर होगा. ट्रंप की इन चेतावनियों पर ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि किसी भी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा. ईरान-अमेरिका में बढ़े तनाव के बीच क्षेत्र के मुस्लिम देश ईरान के प्रति अपना समर्थन जता रहे हैं जिसमें सऊदी अरब, तुर्की, कतर, यूएई जैसे कई देश शामिल हैं.
बुधवार को सऊदी अरब ने अमेरिका के बढ़ते खतरे के बीच ईरान से बात की है. सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने फोन पर अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची से बात की.
इससे एक रात पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) से बात की थी. इस दौरान एमबीएस ने कहा कि सऊदी अरब अपनी जमीन को ईरान पर हमले के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देगा.
एमबीएस और ईरानी राष्ट्रपति के बीच और क्या बात हुई?
बातचीत के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने सऊदी क्राउन प्रिंस से कहा कि अमेरिका का ईरान को धमकी देना केवल अस्थिरता पैदा करेगा.
ईरानी प्रेसिडेंट ऑफिस के अनुसार, पेजेश्कियान ने सऊदी क्राउन प्रिंस से कहा, 'अमेरिकियों की धमकियों और दबाव बनाने का मकसद क्षेत्र की सुरक्षा को कमजोर करना है. इससे उनके लिए अस्थिरता के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा.'
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ और अधिक हमलावर हो गए हैं. उन्होंने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वो बातचीत के लिए राजी नहीं होता तो अमेरिका का अगला हमला पिछले साल जून के हमले से भी ज्यादा गंभीर होगा.
इधर, ईरान ने भी कह दिया है कि वो सैन्य कार्रवाई की धमकी के साए में किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार नहीं है.
अमेरिका ने अपने विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके साथ मौजूद युद्धपोतों को मध्य पूर्व में ईरान के पास तैनात कर दिया है. ट्रंप ने बुधवार को कहा कि युद्धपोतों का एक और बेड़ा मध्य-पूर्व की ओर रवाना हो रहा है.
तुर्की भी लगातार कर रहा ईरान का समर्थन
इधर, तुर्की भी लगातार ईरान का समर्थन कर रहा है. दोनों देशों के बीच 560 किलोमीटर लंबी सीमा है और दोनों में पुराने समय से ही अनबन रही है. लेकिन अब जब अमेरिका ईरान पर हमले को उतावला है, तुर्की उसके बचाव में आ गया है.
तुर्की ने अपनी पुरानी दुश्मनी को एक तरफ रखकर ईरान का साथ देने का फैसला किया है. राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को फोन कर कहा था कि उनका देश ईरान की शांति और स्थिरता को बहुत महत्व देता है. एर्दोगन ने कहा था कि तुर्की किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का समर्थन नहीं करता.
एर्दोगन ने यह भी कहा कि मौजूदा समस्याओं का समाधान करना और क्षेत्र में किसी भी तरह के तनाव को बढ़ने से रोकना तुर्की के हित में है.
अब एर्दोगन ने अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपतियों के बीच तनाव कम करने के लिए एक टेली-कॉन्फ्रेंस की मेजबानी की पेशकश की है. तुर्की के एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार को ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत के दौरान एर्दोगन ने कूटनीति पर जोर देने का आग्रह किया और दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की.
अधिकारी के अनुसार, ट्रंप ने इसमें रुचि दिखाई है, लेकिन ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. तुर्की के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि इस हफ्ते ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची इस्तांबुल दौरे पर पहुंच रहे हैं और इस दौरान वो पेजेश्कियान का जवाब तुर्की को दे सकते हैं.
तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने कतर के ब्रॉडकास्टर अलजजीरा से बात करते हुए कहा है कि ईरान पर हमला करना या उसके साथ युद्ध शुरू करना बड़ी गलती होगी.
कतर, ओमान भी आए ईरान के साथ
अमेरिका ने मध्य-पूर्व में ईरान को अलग-थलग करने की पूरी कोशिश की लेकिन अब क्षेत्र के देश ईरान के प्रति खुलेआम अपना समर्थन दिखा रहे हैं जिसमें अमेरिका का अहम मिडिल ईस्ट सहयोगी कतर भी शामिल है.
कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल-थानी ने ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के महासचिव अली लारिजानी से फोन पर बातचीत की.
बातचीत के दौरान कतर ने ईरान के प्रति अपना समर्थन जताया. कतर ने कहा कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए बातचीत जरूरी है और इस तरह के किसी भी प्रयास को कतर का समर्थन रहेगा.
ईरान का करीबी सहयोगी ओमान भी ईरान के समर्थन में खड़ा दिख रहा है.
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी ईरान को दिया समर्थन
यूएई भी लगातार ईरान का समर्थन कर रहा है. उसने साफ कह दिया है कि वो ईरान के खिलाफ किसी भी 'शत्रुतापूर्ण सैन्य कार्रवाई' के लिए अपने हवाई क्षेत्र, जमीन या जल क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देगा.
एक बयान में यूएई के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वो ईरान के खिलाफ किसी भी हमले के लिए कोई लॉजिस्टिक समर्थन भी नहीं देगा.
मंत्रालय ने कहा, 'यूएई का मानना है कि बातचीत करना, तनाव कम करना, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन और देशों की संप्रभुता का सम्मान मौजूदा संकटों से निपटने की सबसे प्रभावी तरीका है.'
ईरान में पहले प्रदर्शन और अब अमेरिकी हमले का डर
पिछले साल के अंत में खराब आर्थिक हालात के बीच ईरान में विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए थे. जल्द ही प्रदर्शनों ने ईरानी शासन के खिलाफ विरोध का रूप ले लिया. विरोध-प्रदर्शनों पर काबू के लिए ईरानी शासन ने सख्ती दिखाई जिसमें कई लोग मारे गए. ट्रंप ने ईरान को धमकी दी कि वो प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती रोके नहीं तो सैन्य हमले के लिए तैयार रहे.
ईरान में प्रदर्शन रुक गए और माना जा रहा था कि मामला शांत हो जाएगा लेकिन ईरान के चारों तरफ अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती ने तनाव को बढ़ा दिया है.
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