'ट्रंप को उकसा रहे MBS...', ईरान पर हमले से जुड़ी रिपोर्ट पर बवाल! सऊदी को देनी पड़ गई सफाई

रविवार की न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमले जारी रखने की सलाह दे रहे हैं. हालांकि, सऊदी सूत्रों ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह झूठा बताया है.

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एमबीएस को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट पर बवाल हो रहा है (File Photo: Getty) एमबीएस को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट पर बवाल हो रहा है (File Photo: Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:43 PM IST

बीते रविवार को अमेरिकी अखबार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट आई थी जिस पर काफी बवाल हुआ. रिपोर्ट में दावा किया गया कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर जोरदार हमले जारी रखने की सलाह दे रहे हैं. रिपोर्ट के सामने आने के बाद सऊदी अरब पर सवाल उठे जिसके बाद किंगडम के सूत्रों को सफाई देनी पड़ी है. 

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सोमवार को एक सऊदी सूत्र ने न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि सऊदी अरब की लीडरशिप ट्रंप को ईरान के खिलाफ युद्ध लंबा खींचने के लिए उकसा रही है. सऊदी अरब के सरकारी टेलीविजन नेटवर्क अल अरबिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी सूत्र ने इस खबर को पूरी तरह 'झूठा' बताया. 

न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक दिन पहले अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि सऊदी क्राउन प्रिंस सलमान ट्रंप को सलाह दे रहे थे कि 'ईरानियों पर जोरदार हमले जारी रखें.'

खाड़ी देशों पर भड़के ईरानी विदेश मंत्री

हालांकि, सोमवार को एक सऊदी सूत्र ने रिपोर्ट को पूरी तरह गलत बताया. रिपोर्ट के सामने आने के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने उन रिपोर्टों पर तुरंत सफाई मांगी थी, जिनमें कहा गया था कि कुछ पड़ोसी देश अमेरिका के ईरान पर हमलों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे हैं.

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, 'इजरायल-अमेरिका की बमबारी में सैकड़ों ईरानी नागरिक मारे जा चुके हैं, जिनमें 200 से ज्यादा बच्चे शामिल हैं. रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कुछ पड़ोसी देश, जो अपने यहां अमेरिकी सैन्य बलों को तैनात रखते हैं और ईरान पर हमले की इजाजत देते हैं, इस कत्लेआम को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित भी कर रहे हैं.  इन देशों को अपनी स्थिति तुरंत साफ करनी चाहिए.'

ईरान की खाड़ी के कई देशों के साथ समुद्री सीमाएं लगती हैं और इन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी मौजूद हैं. 

इससे पहले ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि वो आक्रामकता के आगे झुकने वाला नहीं है और अमेरिकी तथा इजरायली हमलों से उसके नागरिक 'गंभीर खतरे' में हैं. 

जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक के दौरान ईरान ने कहा कि असली ध्यान मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध पर होना चाहिए. 

जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अली बहरेनी ने कहा, 'ईरान से जुड़ा सबसे जरूरी और बुनियादी मानवाधिकार मुद्दा 9 करोड़ लोगों की जान पर मंडरा रहा खतरा है, जो आक्रामकता की वजह से गंभीर खतरे में हैं.'

बहरेनी ने कहा कि अगर इस तरह की आक्रामकता भरी सैन्य कार्रवाई पर दुनिया चुप रहती है, तो 'ईरान आखिरी देश नहीं होगा, बल्कि आने वाले समय में और देशों पर भी ऐसे हमले देखने को मिल सकते हैं.'

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राजदूत ने कहा कि अमेरिका-इजरायल के हमले शुरू होने के बाद से ईरान में 1,300 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 7,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं. 

उन्होंने सवाल उठाया, 'ऐसी स्थिति में आखिर ईरान से क्या उम्मीद की जाती है? ईरान ऐसा देश नहीं है जो दबाव, धमकी या आक्रामकता के आगे झुक जाए.'

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