मध्य-पूर्व में चल रही जंग से पैदा हुए तेल-गैस की सप्लाई संकट के बीच भारत को तेल बेचने के लिए रूस जैसे तैयार बैठा था. जैसे ही अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने पर प्रतिबंधों से छूट दी, वैसे ही अब खबर आ रही है कि रूस ने भारत की पहुंच के भीतर समुद्र में 1.5 करोड़ बैरल से अधिक तेल तैनात कर रखा है.
शिप ट्रैकिंग डेटा के आधार पर तैयार की गई ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कच्चा तेल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में एक दर्जन से अधिक टैंकरों पर मौजूद है. ये कार्गो फिलहाल या तो नहीं बिके हैं या इनका तेल किस बंदरगाह पर उतारा जाना है, यह तय नहीं है. ऐसे में ये जहाज एक हफ्ते या उससे भी कम समय में भारत पहुंच सकते हैं.
इसके अलावा करीब 70 लाख बैरल रूसी यूराल्स तेल लेकर आठ और जहाज सिंगापुर के पास खड़े हैं और वो भी लगभग एक हफ्ते में भारत पहुंच सकते हैं. इसके अलावा कुछ और खेपें भूमध्यसागर और स्वेज नहर के रास्ते पूरब की ओर बढ़ रही हैं, जो एक महीने से कम समय में भारत पहुंच सकती हैं.
भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता था रूस
फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रियायती रूसी तेल का बड़ा आयातक बन गया था. लेकिन अमेरिकी दबाव के कारण भारत ने हाल के समय में इस खरीद को काफी कम कर दिया था और फरवरी में सऊदी अरब भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया.
लेकिन अब मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण सऊदी, यूएई जैसे देशों से आने वाले तेल में भारी गिरावट आई है. इसी वजह से अमेरिका ने भारत को एक महीने की छूट दी है ताकि वो फिर से रूसी तेल खरीद सके.
रूसी तेल खरीद के टूटेंगे सारे रिकॉर्ड?
अमेरिका की तरफ से भारत को लाइसेंस जारी किए जाने से पहले ही रूसी तेल लेकर चल रहे कई टैंकरों ने अपना डेस्टिनेशन बदलकर भारतीय बंदरगाहों की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया था. शिपिंग डेटा फर्म केप्लर के अनुसार, फिलहाल करीब 18 जहाज यूराल्स तेल लेकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं.
अपने पीक पर भारत हर दिन रूस से 20 लाख बैरल तेल खरीद रहा था. जून 2023 में भारत ने रूस से हर दिन 22 लाख बैरल तेल खरीदा जो अब तक का रिकॉर्ड है. माना जा रहा है कि अमेरिका की तरफ से दी गई छूट की अवधि के दौरान यह रिकॉर्ड टूट सकता है.
डेटा इंटेलिजेंस कंपनी के विश्लेषक सुमित रितोलिया का कहना है कि रिफाइनरियां जल्दी ही खरीद बढ़ा सकती हैं और जल्द ही रूसी तेल का आयात फिर से 20 लाख बैरल प्रतिदिन से ऊपर पहुंच सकता है. उन्होंने कहा कि पहले रूसी कच्चे तेल पर जो भारी छूट मिल रही थी, वो अब काफी कम हो सकती है और कुछ मामलों में प्रीमियम भी लग सकता है.
भारत की तरफ से खरीद कम करने और चीन पर अतिरिक्त सप्लाई का बोझ आने की वजह से रूस का प्रमुख यूराल्स ग्रेड तेल पहले बेंचमार्क क्रूड ब्रेंट के मुकाबले भारी छूट पर बिक रहा था. लेकिन भारत की खरीद फिर से शुरू होने और मध्य-पूर्व संकट से पैदा हुई कमी के कारण यह रुझान फिलहाल उलट सकता है और रूसी तेल काफी महंगा हो सकता है.
भारतीय रिफाइनरियों ने हाल के दिनों में पहले ही एक करोड़ बैरल से अधिक यूराल्स तेल खरीद लिया है. इन कार्गो के लिए ब्रेंट के मुकाबले प्रीमियम दिया जा रहा है, जिसमें माल ढुलाई और डिलीवरी की खर्चा भी शामिल है. कीमतें पिछले हफ्तों की तुलना में प्रति बैरल करीब 12 डॉलर तक अधिक हो गई हैं.
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