नेपाल की राजनीति में बड़ा फेरबदल, प्रधानमंत्री ओली ने बनाए 8 नए मंत्री, जिनमें 5 'प्रचंड' खेमे से

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपनी कैबिनेट में 8 नए मंत्रियों को जगह दी है. इनमें कुछ मंत्री ऐसे हैं जो प्रचंड कैंप के माने जाते हैं, चूंकि वे ओली का समर्थन करने के लिए आए हैं इसलिए मंत्री बनाए जाने के रूप में उन्हें इनाम दिया जा रहा है.

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नेपाल का राजनीतिक संकट बढ़ता ही जा रहा है नेपाल का राजनीतिक संकट बढ़ता ही जा रहा है

सुजीत झा

  • नेपाल,
  • 25 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:05 PM IST
  • नेपाल में संवैधानिक संकट लगातार जारी है
  • पीएम ओली ने 8 नए मंत्रियों को शामिल किया
  • पहले प्रचंड खेमे के 7 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था

नेपाल में चल रहे राजनीतिक संकट के बीच केपी शर्मा ओली ने एक और दांव खेला है. केपी शर्मा ने अपनी कैबिनेट में 8 नए मंत्रियों को जगह दी है. इनमें कुछ मंत्री तो ऐसे हैं जो प्रचंड कैंप के माने जाते हैं, चूंकि वे ओली का समर्थन करने के लिए आए हैं इसलिए मंत्री बनाए जाने के रूप में उन्हें इनाम दिया जा रहा है.

ओली कैबिनेट में शामिल इन नए मंत्रियों में बहादुर रायमाझी, प्रभु साह, मणि थापा, गौरी शंकर चौधरी और दया लामा ऐसे हैं जिन्हें प्रचंड खेमे का माना जाता है. इसके अलावा प्रेम अले, बिमला बीके और गणेश थगना ओली कैंप के ही माने जाते हैं.

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आपको बता दें कि इससे पहले प्रचंड दहल खेमे के 7 मंत्रियों ने रविवार के दिन प्रधानमंत्री ओली द्वारा संसद भंग करने के फैसले को अलोकतांत्रिक और संवैधानिक कहते हुए इस्तीफा दे दिया था. ये सात मंत्री, गिरिराज मणि पोखरेल, वर्षा मान पुन, घनश्याम भुसाल, योगेश भट्टाराई, शक्ति बसनेट, रामेश्वर राय यादव और बीना मागर थे.

कुछ दिन पहले ही नेपाल की सत्तारुढ़ पार्टी यानी कम्युनिस्ट पार्टी (प्रचंड समूह) ने केपी ओली को संसदीय दल के नेता पद से हटाकर पुष्प कमल दहल 'प्रचंड ' को नया संसदीय दल का नेता चुन लिया है. जिस तरह से ओली द्वारा संसद भंग किए जाने का विरोध पूरे देशभर में हुआ है उससे ओली की स्थिति कमजोर लग रही है. 

बीते दिनों केपी ओली ने संसद भंग करने को लेकर सफाई देते हुए कहा था 'हमारी चुनी हुई सरकार को किनारे किया जा रहा था और हमें सुचारू रूप से काम नहीं करने दिया जा रहा था. राष्ट्रपति के खिलाफ भी महाभियोग लगाने की भी साजिश रची जा रही थी. इसलिए संसद भंग करने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा था.'

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