'हमेशा कर्जदार रहूंगा...', ऑपरेशन सिंदूर पर ट्रंप का कौन सा एहसान चुका रहे शहबाज

पाकिस्तान, ट्रंप को खुश करने का कोई भी मौका छोड़ता नहीं है. पाकिस्तान स्थित अमेरिकी दूतावास एक कार्यक्रम कर रहा था और इस प्रोग्राम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मेहमान बन गए और अमेरिका को खूब सराहा, उन्होंने ट्रंप का एहसान कभी नहीं भूलने की बात कही.

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शहबाज शरीफ ने कहा कि वे हमेशा ट्रंप के आभारी रहेंगे. (Photo: ITG) शहबाज शरीफ ने कहा कि वे हमेशा ट्रंप के आभारी रहेंगे. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 05 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:57 PM IST

एक वर्ष से ज्यादा गुजर गए. पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के प्रहार से बाहर नहीं निकल पा रहा है. पाकिस्तान की अमेरिका नीति इस युद्ध के आस-पास आकर टिक गई है. पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने इस युद्ध में सीजफायर करवाने के लिए एक बार फिर से आभार जताया है और कहा है कि पाकिस्तान इस बात के लिए हमेशा पाकिस्तान का कर्जदार रहेगा. 

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अमेरिका को लेकर पाकिस्तान इस कदर झुका है कि वहां के पीएम अमेरिकी दूतावास के मामूली कार्यक्रम में भी शामिल हो रहे हैं. गुरुवार को इस्लामाबाद अमेरिकी दूतावास द्वारा अमेरिकी आज़ादी की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे शहबाज शरीफ ने कहा कि उनका मुल्क हमेशा के लिए अमेरिका का आभारी रहेगा. 

शहबाज़ ने पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों को लगभग आठ दशकों से चले आ रहे 'सच्चे और खास रिश्ते' के तौर पर बताया.

पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था. इस दौरान आतंकियों ने 26 लोगों की निर्दयता से हत्या कर दी थी. 

इसके बाद 7 मई को भारत ने इन हमलों का जवाब देते हुए पाकिस्तान के आतंकी कैंपों पर अटैक किया था. और इसका नाम ऑपरेशन सिंदूर रखा था. चार दिनों तक चले इस टकराव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री शहबाज ने कहा कि ट्रंप की दखलंदाजी ने दुश्मनी खत्म करने में अहम भूमिका निभाई. 

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भारत के एक्शन से खौफ खाए शहबाज भारत की जवाबी कार्रवाई को हमेशा से 'बिना उकसावे की आक्रामकता' बताते रहे हैं. अमेरिकी दूतावास के कार्यक्रम में भी उन्होंने यहीं कहा. शहबाज ने आगे बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के समय पर और सबसे निर्णायक दखल की वजह से ही पिछले साल 10 मई को पाकिस्तान और भारत के बीच युद्धविराम हुआ था."

ट्रंप के प्रति पाकिस्तान का एहसान चुकाते हुए शहबाज का टोन चापलूसी से भरा और तथ्यों से परे था.

पाकिस्तान पीएम शहबाज़ ने कहा, "दक्षिण एशिया में शांति बहाल करने और लाखों लोगों की जान बचाने के लिए हम हमेशा राष्ट्रपति ट्रंप के कर्जदार रहेंगे. इस संदर्भ में उन्हें हमेशा शांति के दूत के तौर पर याद किया जाएगा."

ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि सैन्य टकराव के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कायम करने में उन्होंने मदद की थी.

हालांकि भारत ने साफ और दो टूक कहा है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच सीधे तौर पर हुआ था और उसने किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावों को खारिज किया है. भारत ने यह भी कहा कि समझौते के लिए पहल पाकिस्तान के DGMO ने की थी. 

शहबाज़ ने ट्रंप की "अनोखी" लीडरशिप शैली की भी तारीफ की और कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने वॉशिंगटन के अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव और अपने हितों को आगे बढ़ाने के काम में "ऊर्जा और संकल्प" का संचार किया है. 

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शहबाज ने अमेरिकी नेता की चापलूसी करते हुए कहा कि उनकी "साहसी और दूरदर्शी लीडरशिप" में अमेरिका शांति, प्रगति और समृद्धि को आगे बढ़ाते हुए भरोसा और गतिशीलता का संचार कर रहा है. 

दोनों देशों के रिश्तों के इतिहास को याद करते हुए शहबाज़ ने बताया कि 1947 में पाकिस्तान बनने के बाद उसे मान्यता देने वाले शुरुआती देशों में अमेरिका शामिल था. उन्होंने सुरक्षा, व्यापार, निवेश, कृषि, विज्ञान, शिक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग का भी ज़िक्र किया. 

उन्होंने कहा, "हमारा रिश्ता सच्चा और खास है, जो लगभग आठ दशकों से चला आ रहा है. इसमें न सिर्फ़ सुरक्षा और आतंकवाद-विरोधी अभियानों में सहयोग शामिल है, बल्कि व्यापार, निवेश, कृषि, विज्ञान, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और लोगों के बीच आपसी मेलजोल में भी सहयोग शामिल है."

क्षेत्रीय कूटनीति पर बात करते हुए शहबाज़ ने दावा किया कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संपर्क बनाने में भूमिका निभा रहा है. उन्होंने शांति की जारी कोशिशों में योगदान के लिए अपने ही आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का शुक्रिया अदा किया. 

उन्होंने कहा, "अभी जब मैं बात कर रहा हूं ईरान और अमेरिका के समर्थन से ये कोशिशें जारी हैं, और आइए हम दुआ करें कि हमें जल्द से जल्द लंबे समय तक चलने वाली शांति मिले." 

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पाकिस्तान लंबे समय से ईरान वॉर में मध्यस्थता का दावा कर रहा है, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला है. 
 

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