अपनी ही अवाम की आवाज दबा रहा पाकिस्तान... पूर्व PM इमरान खान समेत 27 यूट्यूब चैनलों पर लगाया बैन

पाकिस्तान की इस्लामाबाद अदालत ने देश विरोधी, झूठी सामग्री फैलाने के आरोप में 27 यूट्यूब चैनलों पर बैन का आदेश दिया है, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का चैनल भी शामिल है, यह फैसला फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) की अपील पर सुनाया गया. बैन किए गए चैनलों में पत्रकारों और राजनीतिक टिप्पणीकारों के कई नाम शामिल हैं.

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इमरान खान समेत 27 यूट्यूब चैनलों पर पाकिस्तान ने बैन लगाया (फोटो क्रेडिट-AP) इमरान खान समेत 27 यूट्यूब चैनलों पर पाकिस्तान ने बैन लगाया (फोटो क्रेडिट-AP)

सुबोध कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 7:48 PM IST

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की सरकार अपने ही अवाम की आवाज दबाने की कोशिश में जुटी है. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक अदालत ने 27 यूट्यूब चैनलों पर कथित तौर पर देश विरोधी, झूठी, भ्रामक और फर्जी कंटेंट प्रकाशित करने को लेकर बैन लगाने का आदेश आज (मंगलवार) को जारी किया है. इनमें पत्रकार, राजनीतिक टिप्पणीकारों और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का चैनल भी शामिल है. अदालत ने ये कार्रवाई पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) की अपील पर की है. 

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किन यूट्यूब चैनलों को किया गया बैन?

  • हैदर मेहदी
  • सिद्दीकी जान
  • सबीक काज़मी
  • ओरया मकबूल जान
  • आरज़ू काज़मी
  • राणा उज़ैर बोलते हैं
  • साजिद गोंडल
  • हबीब अकरम
  • मतिउल्लाह जान
  • असद तूर
  • इमरान रियाज़ खान
  • नया पाकिस्तान
  • साबिर शाकिर
  • इमरान खान
  • आफताब इकबाल
  • रील एंटरटेनमेंट टीवी
  • पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ
  • दैनिक कुदरत
  • कादिर कादरी
  • चंदसाई पत्रकार
  • नैला पाकिस्तानी प्रतिक्रिया
  • वजाहत सईद खान
  • अहमद नूरानी
  • नज़र चौहान
  • मोईद पीरजादा
  • मखदूम शहाब उद दीन
  • शयान अली

एफआईए का आरोप है कि ये चैनल देश विरोधी कंटेंट पोस्ट कर देश को बदनाम करने की साजिश रच रहे थे. अदालत के न्यायिक मजिस्ट्रेट अब्बास शाह ने कहा कि एफआईए की ओर से इन चैनलों के विरुद्ध जो भी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए उनसे अदालत संतुष्ट रही. 

टेक्निकल रूप से कितना प्रभावी होगा यह आदेश?

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यूट्यूब खुद सरकार के साथ मिलकर किसी चैनल को ब्लॉक न करे, तो ऐसी रोकें पूरी तरह कारगर नहीं होतीं. एक वरिष्ठ आईटी सलाहकार ने कहा कि कोर्ट का आदेश सिर्फ प्रतीकात्मक है जब तक यूट्यूब प्लेटफॉर्म खुद उस पर कार्रवाई न करे. इसलिए जब तक यूट्यूब जियो-फेंसिंग या प्रतिबंध नहीं लगाता है तब तक ये कार्रवाई महज बस प्रतीकात्मक है.

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यह भी पढ़ें: बांग्लादेश की तरफ से भारत को घेरने की कोशिश! पाकिस्तान-तुर्की मिलकर खेल रहे ये कैसा खेल?

चैनलों के खिलाफ पहले से हो रही कार्रवाई

बीते कुछ महीनों में कई पाकिस्तानी यूट्यूबर्स ने शिकायत की है कि उनके चैनलों पर शैडो बैन, सीमित पहुंच, या देश में पूरी तरह देखे जाने पर रोक लगाई जा रही है. कुछ कंटेंट क्रिएटर्स तो गिरफ्तारी और गायब कर दिए जाने के डर से देश छोड़कर विदेशों से ही अपना चैनल चला रहे हैं. इन सबके पीछे अक्सर पाकिस्तान की गुप्त एजेंसियों की भूमिका मानी जाती है. 

अपने ही लोगों की आवाज बंद कर रहा है पाकिस्तान

यह आदेश ऐसे समय में आया है जब भारत ने हाल ही में कई पाकिस्तानी यूट्यूब चैनलों को फर्जी खबरें और प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए ब्लॉक किया था. अब पाकिस्तान अपने ही नागरिकों के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को "एंटी-स्टेट" बताकर बंद कर रहा है.

दिलचस्प बात यह है कि आरजू काज़मी का चैनल अब भारत और पाकिस्तान दोनों में बैन हो चुका है, जिससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या डिजिटल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अब सीमाओं के आर-पार भी खतरे में है?
 

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