समुद्र के नीचे नई घेराबंदी: कराची पहुंची चीन निर्मित 'हंगोर' पनडुब्बी, भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

पाकिस्तान को एक नई पनडुब्बी मिली है चीन से. इसका नाम है हंगोर. यह एक वर्ल्ड क्लास पनडुब्बी है और एआईपी तकनीक से लैस है. ये लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकता है. पाक नौसेना की क्षमता इसके आने से बढ़ गई है. चीन हिंद महासागर और अरब सागर में शक्ति-संतुलन बिगाड़ने के इरादे से इसे इस्लामाबाद को दिया है.

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चीन-पाकिस्तान नौसैनिक सहयोग पर भारत की नजरें टिकीं हुई हैं (Photo: Social Media) चीन-पाकिस्तान नौसैनिक सहयोग पर भारत की नजरें टिकीं हुई हैं (Photo: Social Media)

अनुराग कश्यप

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:56 PM IST

पाकिस्तान को चीन की ओर से मैन्युफैक्चर्ड पहली 'हंगोर' पनडुब्बी मिल गई है. पाक नौसेना के लिए ये बहुत बड़ी बात है. उनके नौसैनिक फ्लीट में एक ताकतवर पनडुब्बी शामिल हो गया है. इससे अरब सागर में हलचल बढ़ने वाली है और ये एक बड़े रणनीतिक भूचाल की दस्तक है. 

इतिहास गवाह रहा है कि अरब सागर और हिंद महासागर में भारतीय नौसेना का पलड़ा हमेशा से भारी रहा है. लेकिन, सतह के नीचे से वॉर करने वाले ये 'हंगोर' पनडुब्बी जो कि 'साइलंट किलर' है ने इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन को गंभीर चुनौती दी है. 

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'हंगोर' पनडुब्बी एआईपी जैसे मॉर्डन तकनीक से लैस है. जिसकी वजह से इस पनडुब्बी को हफ्तों तक सतह पर आने की ज़रूरत नहीं होगी. यह समुद्र की गहराइयों में लंबे समय तक ओझल रह सकती है. इस तकनीक की वजह से ये पनडुब्बी भारतीय रडारों और सर्विलांस नेटवर्क के लिए बड़ी सरदर्दी बन जाती है. 

पनडुब्बी के नाम रखने के पीछे भी पाकिस्तान की मनोवैज्ञानिक चाल है. 1971 की युद्ध के यादों को ताजा करने के लिए और भारतीय वेस्टर्न नेवल कमांड पर मानसिक दबाव बनाने के लिए इसका नाम 'हंगोर' रखा है. 1971 की युद्ध में पाक के 'हंगोर' नाम के ही पनडुब्बी ने भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS खुखरी को डुबोया था. इसलिए पाक ने ये नाम चुना है ताकि वह दिखा सके कि वह ताकतवर हो गए हैं.

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आइए तो अब समझते हैं कि भारत के वेस्टर्न नेवल कमांड के लिए ये कैसे बड़ी चुनौती है. 

1. चीन का 'प्रॉक्सी वॉरफेयर' और टू-फ्रंट नेवल थ्रेट

अरब सागर में चीन सीधे भारत से टकराने का जोखिम नहीं ले सकता है. ड्रैगन जानता है कि इस क्षेत्र में भारत का कोई मुकाबला नहीं कर सकता. इसलिए चीन अपने नापाक इरादों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान का सहारा लेता है. चीन पाकिस्तान को 'फ्रेंट' बनाकर प्रॉक्सी वॉरफेयर खेल रहा है. 

पाकिस्तान को चीन से करीब 8 ऐसे पनडुब्बी मिलने वाले हैं. इसके लिए 4-5 अरब की डील हुई है. अगर सभी पनडुब्बी पाकिस्तान को मिल जाते हैं तो भारत के सामने दोतरफा समुद्री युद्ध जैसे सिचुएशन पैदा हो सकता है. 

फ्यूचर में अगर चीन के साथ भारत का लद्दाख या अरुणाचल की सीमा पर विवाद बढ़ता है तो भारतीय नौसेना को अपनी पूरी ताकत बंगाल की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ मलक्का ड्रैगन के जहाजों को रोकने में लगाना पड़ेगा. वहीं, दूसरी ओर चीन का साथ देने के लिए पाकिस्तान की ये पनडुब्बियां भारत की वेस्टर्न कमांड को उलझा सकती हैं. इसकी वजह से भारतीय नौसैनिक अपनी पूरे ताकत का इस्तेमाल ड्रैगन के खिलाफ नहीं कर सकेगा.

2. 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' से आगे: 'मैरीटाइम डिनायल' की नई नीति

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चीन भारत पर को घेरने के लिए 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति का इस्तेमाल करता है. यानि वह भारत के पड़ोसी देशों को अपने 'प्रॉक्सी वॉरफेयर' के लिए इस्तेमाल करता है. श्रीलंका, म्यांमार और पाकिस्तान जैसे देशों को आर्थिक तौर पर मदद करता है, उसके बंदरगाह को विकसित करता है. इसका मकसद है कि वह भारत पर चारों ओर से दबाव बनाए. पाकिस्तान को चीन से ये मिली ये पनडुब्बी भी इसी रणनीति का हिस्सा है. 

पाकिस्तान को इस पनडुब्बी को अच्छे तरीके से चलाने नहीं आता है. यानि कि पनडुब्बी के तकनीक अभी फिलहाल पाक के नौसेना से समझ से बाहर है. इन पनडुब्बियों के रखरखाव, तकनीकी सपोर्ट और बेसिक चीजों के लिए चीन के इंजीनियर कराची और ग्वादर बंदरगाह पोर्ट पर टेंपररी तौर पर मौजूद रहेंगे. 

चीन के इंजीनियर कराची और ग्वादर बंदरगाह पोर्ट पर रहने से डेटा शेयरिंग का खतरा है. पनडुब्बी जो अरब सागर में पानी के टेंपरेचर, डेंसिटी और लहरों के पैटर्न का डाटा जुटाएगी उसे बीजिंग भेज सकती है. ऐसा होना से चीन अरब सागर में बिना अपना जहाज भेजे जासूसी कर सकता है. 

3. ब्लू इकोनॉमी पर वार: भारत के एनर्जी कॉरिडोर पर दुश्मनों की नजर

जियोपॉलिटिक्स में समुद्र केवल युद्ध की जगह नहीं होती है. ये ग्लोबल ट्रेड का रास्ता होता है. दुनिया की इकोनॉमी समुद्री रास्ते पर निर्भर करते हैं. भारत भी अपना 80 फीसदी जरूरत से ज्यादा कच्चा तेल और गैस समुद्री रास्तों से इम्पोर्ट करता है. इसके लिए भारत खाड़ी देशों से होकर अरब सागर के रास्ते से ही आता है. 

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'हंगोर' पनडुब्बी क्रूज मिसाइल 'बाबर-3' और घातक टॉरपीडो फायर करने की क्षमता रखता है. इसका मतलब है कि पाकिस्तान समुद्र के अंदर से भारत के तटीय शहरों और ऑयल रिफाइनरी पर परमाणु या कन्वेंशनल अटैक कर सकता है. 

4. भारत का पलटवार: वेस्टर्न कमांड कैसे तोड़ेगा यह घेराबंदी?

भारतीय नौसेना पाकिस्तान के हर चाल पर बारीकी से नजर रखता है. भारत के पास फ्रांस के सहयोग से बनी स्कॉर्पीन क्लास की छह मॉर्डन तकनीक वाली पनडुब्बियां हैं. इन पनडुब्बियों में भले ही एआईपी नहीं है. लेकिन इनकी मारक क्षमता बेहतरीन है. 

भारतीय वेस्टर्न कमांड की ये रणनीति होगी कि इस 'हंटर-किलर' पनडुब्बियों को पाक के पोर्ट के मुहाने पर तैनात कर दे. जैसे ही पाक पनडुब्बियों की थोड़ी भनक लगेगी तो भारतीय पनडुब्बियां उसके पीछे लग जाएगी. 

आसमान से भी भारत पाकिस्तान के पनडुब्बियों पर नजर रख सकता है. हाल के दिनों में अमेरिका से भारत ने MH-60R 'रोमियो' हेलीकॉप्टर्स लिए थे. ये हेलीकॉप्टर्स मॉर्डन पनडुब्बियों का भी शिकार कर सकता है. ये अचूक हेलीकॉप्टर है, जो कि अब भारत के पास भी है. 

इन हेलीकॉप्टर्स को वेस्टर्न फ्लीट के अग्रिम युद्धपोतों पर तैनात करके भारतीय नौसेना पानी के नीचे एक अभेद्य सुरक्षा दीवार खड़ी की जाएगी. 

भारत के लिए ये एक बड़ा सबक का समय है. सालों से भारत का पनडुब्बी प्रोजेक्ट लालफीताशाही की वजह से लटका हुआ है. पाकिस्तान को चीन से पनडुब्बी मिलने के बाद भारत पर ज्यादा प्रेशर हो गया है कि वह अपना पनडुब्बी को जल्दी से विकसीत करे और जल्द स्वदेशी DRDO का एआईपी सिस्टम फिट करने का भारी दबाव होगा. 

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