मिडिल ईस्ट संकट के बीच अजित डोभाल रूस में क्या कर रहे हैं? आतंकवाद को लेकर सुनाई खरी-खरी

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल रूस की राजधानी मॉस्को में हैं. अजित डोभाल ने रूसी सुरक्षा सलाहकार सर्गेई शोइगु के साथ बैठक की.

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रूसी सुरक्षा सलाहकार के साथ होर्मुज संकट पर भी हुई बात (Photo: ITG) रूसी सुरक्षा सलाहकार के साथ होर्मुज संकट पर भी हुई बात (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:29 AM IST

पश्चिम एशिया में जंग की आग फिर भड़कती दिख रही है. अमेरिका और ईरान में एक तरफ जहां जंग समाप्त करने के लिए बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी तरफ दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर बम और ड्रोन भी दाग रहे हैं. इस लुकाछिपी के खेल जैसी स्थिति में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल रूस की राजधानी मॉस्को में हैं.

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अजित डोभाल मॉस्को में आयोजित पहले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच और सुरक्षा मामलों पर बैठक में शामिल हुए. इस बैठक में पाकिस्तान का नाम लिए बिना डोभाल ने आतंकवाद के मुद्दे पर खरी-खरी सुनाई. उन्होंने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरा रवैया नहीं चलेगा. जो देश आतंकियों को पनाह देते हैं, उन्हें तय करना होगा कि वो किस तरफ खड़े हैं.

अजित डोभाल ने रूसी सुरक्षा सलाहकार सर्गेई शोइगु से भी मुलाकात की. दोनों अधिकारियों की बैठक में रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार के साथ ही आर्थिक संबंधों में सहयोग की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की.

अजित डोभाल और सर्गेई शोइगु की इस मुलाकात में दोनों अधिकारियों ने ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की आगामी बैठक की तैयारियों पर भी चर्चा की, जो नई दिल्ली में होनी है. हालांकि, इस बैठक की तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है. गौरतलब है कि अजित डोभाल की यह रूस यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिम एशिया में जंग चल रही है. व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.

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विश्व व्यवस्था में महाशक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण भू-राजनीतिक स्थिति भी काफी नाजुक बनी हुई है. होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही पिछले तीन महीनों से बाधित है. इस मार्ग से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और वाणिज्यिक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है. होर्मुज और लाल सागर, इन मार्गों पर किसी भी तरह की रुकावट का असर कीमतों और दुनिया की आर्थिक स्थिरता पर पड़ता है.

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रूस-यूक्रेन युद्ध का भी वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ रहा है. इस युद्ध को शुरू हुए चार साल बाद भी रूस और पश्चिमी देशों के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस युद्ध की वजह से ऊर्जा के साथ ही खाद्य आपूर्ति चेन भी प्रभावित हुई है और वैश्विक सुरक्षा संरचना को लेकर बहस तेज हो गई है.

यूक्रेनी विदेश मंत्री से जयशंकर की मुलाकात

गौरतलब है कि 27 मई को ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साइप्रस में यूक्रेनी विदेश एंड्री सिबिहा से मुलाकात की थी. भारत और यूक्रेन के विदेश मंत्रियों की इस मुलाकात में शांति स्थापित करने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई थी. इस मुलाकात के बाद सिबिहा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा था कि हम भारत की मजबूत आवाज और उसके सुझावों का स्वागत करेंगे.
 

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