'रोने के बजाए...', नेपाली PM ओली के इस कदम से गदगद हुआ ग्लोबल टाइम्स, भारत पर किया तंज

नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली अगले महीने की शुरुआत में चीन दौरे पर जाने वाले हैं. उनके इस दौरे को लेकर भारत में काफी चर्चा है क्योंकि वो लंबे समय से चली आ रही वो परंपरा तोड़ रहे हैं जिसमें कोई भी नेपाली पीएम पद ग्रहण करने के बाद अपने पहले विदेश दौरे में भारत आता है. इसे लेकर चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख प्रकाशित किया है.

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नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Photo- China_Amb_India/X) नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Photo- China_Amb_India/X)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 5:28 PM IST

नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली दिसंबर की शुरुआत में चीन के दौरे पर जाने वाले हैं. 4 महीने पहले पद ग्रहण करने के बाद ओली की यह पहली विदेश यात्रा होगी और इसी के साथ ही नेपाल में लंबे समय से चली आ रही वो परंपरा भी टूट जाएगी कि नया प्रधानमंत्री अपने पहले विदेश दौरे में भारत आता है. नेपाली प्रधानमंत्री के आगामी चीन दौरे को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ओली पहले से ही चीन समर्थक माने जाते हैं और अब उनका पहले विदेश दौरे में भारत के बजाए चीन जाना इस धारणा को और मजबूत ही करेगा.

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ओली के चीन दौरे को लेकर भारतीय मीडिया में इसी तरह के विश्लेषण चल रहे हैं जिसे लेकर चीन का सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स जल-भुन गया है.

चीन की सत्ताधारी कम्यूनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने इसे लेकर एक लेख प्रकाशित किया है और आरोप लगाया है कि भारत का मीडिया नेपाली पीएम के आगामी चीन दौरे को भारत और नेपाल के बीच तनावपूर्ण संबंधों के संकेत के रूप में प्रचारित कर रहा है.

ग्लोबल टाइम्स ने कथित एक्सपर्ट के हवाले से लिखा भारत को इस बात पर विचार करना चाहिए कि दक्षिण एशियाई देशों में चीन का स्वागत क्यों बढ़ रहा है.

'रोने के बजाए भारत को...'

चीनी अखबार ने सिंघुआ विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय रणनीति संस्थान में शोध विभाग के निदेशक कियान फेंग के हवाले से लिखा, 'एक संप्रभु राष्ट्र के कूटनीतिक संबंधों के चुनाव पर रोने के बजाए भारत को इस बात पर विचार करना चाहिए कि दक्षिण एशियाई देशों में चीन का स्वागत क्यों बढ़ रहा है. स्वतंत्र देश नेपाल के राजकीय यात्रा के विकल्पों पर भारत का अधिक ध्यान देना न केवल नेपाल की संप्रभुता के प्रति भारत की उपेक्षा दिखाता है बल्कि इससे भारत की मानसिकता भी दिखती है कि वो बाकी दक्षिण एशियाई देशों को अपना पिछलग्गू समझता है.'

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नेपाल के प्रमुख अखबार, काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री की पार्टी सीपीएन-यूएमएल ने शनिवार को कहा कि ओली की आगामी चीन यात्रा पिछले समझौतों को लागू करने पर केंद्रित होगी. इसमें कहा गया है कि चीन यात्रा की तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं.

अखबार के अनुसार, चीन दौरे को लेकर पीएम ओली ने कहा, 'मैं पहले चीन जा रहा हूं, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत के साथ हमारे संबंध अच्छे नहीं हैं. जब भारत ने [2015-16 में] नाकाबंदी की थी, तब हमने एक रुख अपनाया था, इसलिए वे खुश नहीं थे. अब उनके लिए हमसे नाखुश होने का कोई कारण नहीं है क्योंकि हम अपने दोनों पड़ोसियों के साथ मैत्रीपूर्ण, संतुलित और अच्छे संबंध बनाए रखेंगे.'

'दक्षिण एशियाई देशों के साथ चीन का सहयोग...'

चीनी एक्सपर्ट ने कहा कि नेपाली पीएम की चीन यात्रा अनिवार्य तरीके से भारत के साथ नेपाल के संबंधों में बदलाव का संकेत नहीं है. उन्होंने कहा कि चीन के साथ सहयोग और भारत के साथ सहयोग नेपाल के लिए दो अलग-अलग चीजें नहीं हैं. कियान का कहना है कि दक्षिण एशियाई देशों के साथ चीन का सहयोग बिना किसी शर्त और प्रतिबंध के पारस्परिक लाभकारी संबंधों पर आधारित है.

द डिप्लोमैट मैगजीन की दक्षिण एशिया एडिटर सुधा रामचंद्रन ने मैगजीन में एक लेख लिखा है जिसमें वो कहती हैं कि ओली को भारत, चीन और नेपाल में व्यापक रूप से चीन समर्थक माना जाता है और उनकी चीन यात्रा इस धारणा को और मजबूत करेगी.

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