क्रांति से निकले 'न्यू नेपाल' में इंडिया फैक्टर कहां है? चुनाव को कैसे देख रहे वहां के प्रवासी

नेपाल में 5 मार्च के चुनाव से पहले पलायन बड़ा मुद्दा बन गया है. भारत में काम कर रहे लाखों नेपाली मतदाता वोट नहीं दे पा रहे. रोजगार की कमी से पुरुषों के साथ महिलाएं और युवा भी भारत आ रहे हैं. गांव खाली हो रहे हैं और चुनावी माहौल फीका पड़ता दिख रहा है.

Advertisement
नेपाल में 5 मार्च को आम चुनाव होना है. (Photo: ITG) नेपाल में 5 मार्च को आम चुनाव होना है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:50 AM IST

नेपाल में 5 मार्च को होने वाले चुनाव की तैयारियां तेज हैं. Gen-Z क्रांति के बाद यह देश का पहला चुनाव है, जिसमें लोगों ने भ्रष्टाचार और असमानता जैसे मुद्दों पर केपी ओली सरकार को सत्ता से बाहर किया था. इस बार भी चुनावी बहस रोजगार, बेहतर जीवन, महिलाओं के अधिकार और पलायन जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रही है.

कान्तिपुर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र में रहने वाले मान बहादुर शाही कहते हैं कि उन्हें नेपाल से ज्यादा भारत की राजनीति की समझ है. 55 वर्षीय शाही सुदूरपश्चिम प्रांत के अछाम जिले से हैं. वे कहते हैं, "मैं 55 साल का हूं. मुझे भारत में काम करते हुए 40 साल हो गए हैं."

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'नेपाल के Gen-Z आंदोलन से प्रेरित था कांग्रेसियों का AI समिट में प्रोटेस्ट', दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा

वे आगे कहते हैं, "मुझे नहीं पता कि अछाम में कौन सी पार्टी या नेता है, मुझे तभी पता चलेगा जब भारत में चुनाव होंगे." उन्होंने बताया कि पहली बार घर जाने पर उन्होंने अपना नाम वोटर लिस्ट में दर्ज कराया था, लेकिन अब तक वोट नहीं दे पाए. उन्होंने बताया, "मैं अभी तक वोट नहीं दे पाया हूं."

बहादुर शाही कहना है कि अब सिर्फ पुरुष और महिलाएं ही नहीं, बल्कि बच्चे भी काम की तलाश में भारत आने लगे हैं. "घर के काम के बोझ की वजह से बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं. वे बिना मां-बाप के बच्चों जैसे हो गए हैं. अगर उन्हें नेपाल में काम मिल जाता, तो इतनी परेशानी नहीं होती."

Advertisement

सिर्फ पुरुष ही नहीं, महिलाओं का वर्क डेस्टिनेशन भी भारत

कान्तिपुर ने बिहार में काम कर रही खीमा नाम की महिला से भी बात की. वह पहले एक राजनीतिक कार्यकर्ता और एक्टिविस्ट थीं. खीमा कहती हैं, "एक्टिविस्ट बनने के मुकाबले विदेश आकर काम करना बेहतर रहा." उनके मुताबिक पहले दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों के लोग ही रोजगार के लिए भारत आते थे, लेकिन अब गांवों से भी महिलाएं बड़ी संख्या में आ रही हैं. वे बताती हैं कि महिलाएं भारत में घरों में काम, सफाई, बुज़ुर्गों और बच्चों की देखभाल और कार धोने का काम कर रही हैं.

भारत में काम कर रहे नेपाली युवाओं में कई मार्केट वॉचमैन, हाउसकीपर, क्लीनर और होटल में बर्तन धोने का काम करते हैं. पुष्पा नाम की एक महिला कहती हैं कि वह वोट देने नेपाल नहीं जा पाएंगी. उन्होंने कहा, "आप बस काम छोड़कर वोट देने नहीं जा सकते, हमने यहां मजदूरी करते हुए अपना समय बिताया है ताकि हमारे बच्चों को इस तरह की तकलीफ न हो." वह चाहती हैं कि इस बार मजदूरों की आवाज सत्ता तक पहुंचे.

यह भी पढ़ें: नेपाल फिर सुलग सकता है, पीएम सुशीला कार्की ने विद्रोह पार्ट-2 को लेकर जारी की ये चेतावनी

'उन लोगों को नहीं करना वोट जो बोलते हैं झूठ'

Advertisement

एक अन्य नेपाली मजदूर कहते हैं, "गांव में सिर्फ बुजुर्ग और बच्चे ही बचे हैं. बहुत से वोटर भारत में हैं, इसलिए हम उन लोगों को वोट देने भी नहीं जा सकते जो झूठे भरोसे देते हैं." रिपोर्ट बताती है कि सुदूर-पश्चिमी जिलों के कई गांवों में युवाओं का बड़ा हिस्सा भारत में काम कर रहा है. ऐसे में चुनावी माहौल गांवों में फीका पड़ता दिख रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में मतदाता रोज़गार की तलाश में सीमा पार हैं.

भारत में 50 लाख नेपाली

रिपोर्ट में बताया गया है कि सुदूर पश्चिम प्रांत के बड़ी संख्या में लोग भारत काम की तलाश में आते हैं. बताया जाता है कि अछाम जिले के 73,000 से ज्यादा लोग भारत में हैं. इससे पता चलता है कि फ़ार वेस्ट के तहत आने वाले सभी जिलों में अछाम से सबसे ज्यादा लोग भारत में काम करते हैं. आंकड़ों के मुताबिक, 50 लाख नेपाली भारत में रहते हैं. आमतौर पर वे यहां मजदूरी करते हैं. यहां तक कि सीमाई इलाकों में देहाड़ी पर काम करने के लिए भी लोग नेपाल से भारत आते हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement