नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने गुरुवार को चेतावनी दी है कि युवाओं की नाराज़गी को दूर करने में नाकाम रहने पर देश में एक और बगावत हो सकती है. काठमांडू में नेपाली आर्मी पवेलियन में 76वें डेमोक्रेसी डे सेलिब्रेशन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि डेमोक्रेसी को रिजल्ट देने चाहिए, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और जवाबदेही पक्की करनी चाहिए.
पीएम कार्की की चेतावनी 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव से पहले आई है.
इस बीच नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने राजशाही की वापसी की मांग करते हुए कहा है कि अगर हम नेपाल के राष्ट्रीय संकट को सुलझाए बिना चुनाव में जाते हैं, तो इससे और ज़्यादा झगड़े हो सकते हैं.
पिछले साल सितंबर में Gen Z के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों का ज़िक्र करते हुए कार्की ने कहा, "उस आंदोलन का मकसद भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और भेदभाव को खत्म करना था. वह आंदोलन अच्छा शासन और बराबर न्याय चाहता था."
उन्होंने कहा, "सरकार को इसका जवाब न सिर्फ उदारता से देना चाहिए, बल्कि विनम्रता और कर्तव्य की गहरी भावना से भी देना चाहिए."
सत्ता और संसाधन पर एकाधिकार ने लोगों का भरोसा खत्म कर दिया
उन्होंने चेतावनी दी कि युवाओं की नाराज़गी को दूर न करने से एक और बगावत शुरू हो सकती है.
पिछले साल 12 सितंबर को अंतरिम प्रधानमंत्री बने कार्की ने कहा, "युवाओं को कमजोर करके कोई भी देश तरक्की नहीं कर सकता."
उन्होंने कहा, "युवाओं में एनर्जी, बदलाव की चाहत और नैतिक गुस्सा है," और कहा कि डेमोक्रेसी "सिर्फ़ एक प्रोसेस नहीं, बल्कि एक रिज़ल्ट-ओरिएंटेड सिस्टम है."
उन्होंने कहा, "हमने असल में लोकतंत्री को अपनाया फिर भी असल में हमने भेदभाव को बढ़ावा देना जारी रखा. हमने संविधान में बराबरी लिखी; फिर भी अपने समाज के अंदर हम गैर-बराबरी को बचाते रहे."
पीएम कार्की ने कहा कि सत्ता और संसाधन पर एकाधिकार ने लोगों का भरोसा खत्म कर दिया है, जिससे बगावत को बढ़ावा मिला है.
1950 की क्रांति को कभी नहीं भूलना चाहिए
इसके अलावा नेपाल के प्रेसिडेंट रामचंद्र पौडेल ने इच्छा जताई कि लोकतंत्र दिवस देश में लगातार शांति, अच्छा शासन, विकास और खुशहाली के राष्ट्रीय लक्ष्यों को पाने में मदद करे.
प्रेसिडेंट पौडेल ने कहा कि नेपाली लोगों को 1950 की क्रांति को कभी नहीं भूलना चाहिए क्योंकि यह फेडरल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक की स्थापना के लिए एक ज़रूरी नींव थी.
नेपाल में डेमोक्रेसी 1950 की क्रांति से स्थापित हुई थी, जिसने राणा प्रधानमंत्रियों के 104 साल पुराने खानदानी शासन को खत्म कर दिया था, जिससे राजा सिर्फ़ नाम के मुखिया रह गए थे.
राष्ट्रपति ने कहा, "डेमोक्रेसी डे सिविल राइट्स की अहमियत को बनाए रखता है और हमें हमेशा शहीदों की अमर कहानी की याद दिलाता है."
राजशाही की वापसी की ओर इशारा
इस बीच पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने कहा है कि "अगर हम नेशनल क्राइसिस को सुलझाए बिना चुनाव में जाते हैं, तो इससे और ज़्यादा झगड़े हो सकते हैं." उन्होंने यह नहीं बताया कि नेशनल क्राइसिस से उनका क्या मतलब है.
नेशनल डेमोक्रेसी डे पर ब्रॉडकास्ट किए गए एक वीडियो मैसेज में पूर्व राजा ने दावा किया, "पूरा देश एक अजीब संकट में फंस गया है और लोग देश की संप्रभुता के लिए खतरा महसूस कर रहे हैं."
बता दें कि नेपाल में 5 मार्च को आम चुनाव होने को हैं. ज्ञानेंद्र 5 मार्च के आम चुनाव से पहले राजशाही की बहाली की ओर अप्रत्यक्ष रूप से इशारा कर रहे थे. नेपाल में कई राजशाही समर्थक समूह इसे लेकर आवाज उठा रहे हैं.
ज्ञानेंद्र ने कहा, "हमें यह देखना होगा कि पिछले आंदोलनों और बदलावों से हमें क्या मिला है."
नेपाल में 5 मार्च को हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स के चुनाव होने वाले हैं, जो पिछले साल के जानलेवा Gen-Z प्रोटेस्ट के बाद पहला चुनाव है. इसी बगावत ने के पी शर्मा ओली की लीडरशिप वाली सरकार को गिरा दिया था.
aajtak.in