ईरान से अपने पायलट का रेस्क्यू करके अमेरिका ने बड़ी अचीवमेंट हासिल की है. ईरान के जैग्रोस पहाड़ों में फंसे इस पायलट का रेस्क्यू वाली यूनिट 'नेवी सील टीम 6' थी. खास बात ये है कि ये वही दस्ता है जिसने 2011 में ओसामा बिन लादेन को मारा था.
अमेरिका के ये रेस्क्यू मिशन अमेरिकी सैन्य इतिहास के सबसे मु्श्किल रेस्क्यू ऑपरेशनों में शामिल हो गया है. 2011 में एबटाबाद मिशन के लिए सिर्फ 24 सील्स और दो 'स्टील्थ ब्लैक हॉक' हेलीकॉप्टर भेजे गए थे. लेकिन 2026 में एक वेपन्स सिस्टम ऑफिसर (WSO) को बचाने के लिए अमेरिका ने एक पूरा हवाई बेड़ा उतार दिया.
कहा जा रहा है कि अगर 2011 का मिशन एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' था, तो 2026 का यह मिशन एक 'हथौड़े' की तरह था, जिसने इस बात का ध्यान रखा कि 'स्कैलपल' (सील टीम 6) पायलट का रेस्क्यू करके सुरक्षित घर लौट सके. इस मिशन में सैकड़ों विशेष अभियान सैनिक, दर्जनों लड़ाकू विमान और अंतरिक्ष और सायबर खुफिया सिस्टम की पूरी ताकत झोंक दी गई.
पहाड़ी की दरार में छिपा था अमेरिकी पायलट
3 अप्रैल को ईरान ने अमेरिका का F-15E लड़ाकू विमान मार गिराया था. इस हमले में पायलट 'कोहगिलुये और बोयर-अहमद' के पहाड़ों में उतर गया था. जब ईरानी टीवी ने उसकी गिरफ्तारी पर इनाम घोषित किया, तब वो 7,000 फीट ऊंची पहाड़ी की दरार में छिपा था. जख्मी पायलट के पास एक पिस्तौल और एक एन्क्रिप्टेड बीकन था.
इस दौरान CIA ने ईरानी खोज दलों को गुमराह करने के लिए एक 'फ्रॉड ऑपरेशन' चलाया था. रेस्क्यू टीम ने इस्फहान से 50 किलोमीटर दूर ईरान के अंदर ही एक सुनसान हवाई पट्टी पर अपना ठिकाना बनाया. यहां दो MC-130J ट्रांसपोर्ट विमान और नाइट स्टॉकर AH-6 लिटिल बर्ड हेलीकॉप्टर तैनात किए गए.
मिशन के दौरान दोनों ट्रांसपोर्ट विमान तकनीकी रूप से फंस गए. अमेरिकी सिद्धांतों के मुताबिक, तकनीक दुश्मन के हाथ न लगे, इसलिए कमांडो ने विमानों के सीक्रेट सिस्टम और सॉफ्टवेयर को धमाके से उड़ा दिया.
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विमान तबाह होने के बाद, तीन और ट्रांसपोर्ट विमान भारी गोलीबारी के बीच वहां पहुंचे. सील टीम 6 ने घायल अधिकारी और फंसी हुई बचाव टीम को सुरक्षित निकाला. इस पूरे ऑपरेशन में किसी भी अमेरिकी सैनिक की जान नहीं गई. अधिकारी को इलाज के लिए कुवैत ले जाया गया है.
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