US ने ईरान के चंगुल से पायलट को कैसे बचाया? ट्रंप कल करेंगे रेस्क्यू प्लान का खुलासा

ईरान में फंसे वेपन सिस्टम्स ऑफिसर को भी अमेरिका ने रेस्क्यू कर लिया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक यह बेहद खतरनाक ऑपरेशन था, जिसमें अमेरिकी टीम कई घंटों तक ईरान के अंदर एक्टिव रही. अब इस पूरे मामले पर सोमवार को राष्ट्रपति प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्यादा जानकारी देंगे.

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि  यह बेहद खतरनाक और मुश्किल मिशन था (Photo: White House) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह बेहद खतरनाक और मुश्किल मिशन था (Photo: White House)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:48 PM IST

कुछ दिन पहले ईरान ने अमेरिका के दो लड़ाकू विमान मार गिराए थे. एक F-15 फाइटर जेट और एक A-10 विमान. एक पायलट को तो बचा लिया गया था, लेकिन कम से कम एक वेपन सिस्टम्स ऑफिसर लापता था. उसकी मां ने सोशल मीडिया पर दुआ मांगी थी. ईरान ने कहा था कि क्रू मेंबर उनकी पकड़ में ज्यादा सुरक्षित रहेगा, डोनाल्ड ट्रंप के मुकाबले में. 

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अब इस मामले में ताजा अपडेट है कि अमेरिका ने वेपन सिस्टम्स ऑफिसर को भी रेस्क्यू कर लिया है. अमेरिका ने ईरान के पहाड़ों के अंदर घुसकर अपने घायल वेपंस ऑफिसर को बचा लिया. यह कोई साधारण बात नहीं थी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी और बताया है कि सोमवार को भारतीय समयनुसार रात के 10:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और इस रेस्क्यू मिशन के बारे में विस्तार से जानकारी साझा करेंगे.

उन्होंने बताया कि बचाया गया वेपन सिस्टम्स ऑफिसर एक बहुत सम्मानित कर्नल हैं. वो बुरी तरह घायल थे और ईरान के गहरे पहाड़ी इलाके में फंसे हुए थे. ईरानी सेना उन्हें ढूंढ रही थी और काफी करीब भी पहुंच गई थी.

यह दो अलग अभियानों में हुआ. पहले एक पायलट को दिन की रोशनी में बचाया गया जो अपने आप में बहुत असामान्य बात है. इस पूरे अभियान में अमेरिकी टीम करीब सात घंटे तक ईरान के आसमान में रही. दूसरा बचाव अभियान पहले के बाद चला.

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यह इतना बड़ा क्यों है?

राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद कहा कि इस तरह के बचाव अभियान बहुत कम होते हैं क्योंकि यह बेहद खतरनाक होते हैं. दुश्मन के इलाके में, वो भी पहाड़ों में, घुसकर किसी को बचाना और सात घंटे वहां के आसमान में रहना, यह आसान काम नहीं है.

जिस देश से जंग चल रही हो, उसके पहाड़ों के अंदर घुसकर अपने आदमी को उठा लाना. यह हॉलीवुड की फिल्म जैसा लगता है, लेकिन यह सच में हुआ. अमेरिका ने यह ईरान में करके दिखाया है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे अपनी सेना की बहादुरी और काबिलियत का सबूत बताया. उन्होंने सोमवार को अमेरिकी समयनुसार दोपहर 1 बजे (भारत में सोमावर रात के 10:30 बजेंगे) व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में सेना के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी है जहां पूरी जानकारी दी जाएगी.

ईरान के लिए यह क्या मायने रखता है?

ईरान ने कहा था कि पायलट उनकी पकड़ में आएगा तो उसके साथ अच्छा व्यवहार होगा. लेकिन अमेरिका ने उसे वापस निकाल लिया. यह ईरान के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि जिसे वो अपना "ट्रम्प कार्ड" मान रहे थे, वो उनके हाथ से निकल गया.

असली बात क्या है?

यह बचाव अभियान दिखाता है कि अमेरिका और ईरान की यह जंग सिर्फ हवाई हमलों तक नहीं रही. अब जमीन पर, पहाड़ों में, ईरान के अंदर तक अमेरिका पहुंच रहा है. और राष्ट्रपति ट्रंप इसे अपनी सबसे बड़ी जीत की तरह दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं.

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नेतन्याहू ने ट्रंप को दी बधाई: यह सिर्फ पायलट की वापसी नहीं, यह हिम्मत की जीत है

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप को बधाई देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ने जो किया वो कमाल है. ईरान के पहाड़ों में घुसकर अपने पायलट को बचाना कोई छोटी बात नहीं.

उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि जब कोई देश हिम्मत से खड़ा होता है तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी पार हो जाती है. नेतन्याहू ने एक निजी बात भी शेयर की. उन्होंने बताया कि वो खुद एक बचाव मिशन में घायल हुए थे और उनके भाई की मौत 1976 के एंटेबी ऑपरेशन में हुई थी, जो इतिहास का सबसे मशहूर बचाव मिशन माना जाता है. तो वो जानते हैं कि ऐसा फैसला लेना कितना मुश्किल होता है.

उन्होंने ट्रंप को 'मेरे प्रिय दोस्त' कहते हुए कहा कि एक बार फिर आपके मजबूत फैसले ने अमेरिका को जीत दिलाई. और अंत में कहा, 'मैं सलाम करता हूं, हम सब करते हैं.'

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