ऑस्ट्रेलिया इन दिनों एक अनोखे लेकिन गंभीर संकट का सामना कर रहा है. देश के कई हिस्सों में चूहों की आबादी इतनी तेजी से बढ़ गई है कि किसान, स्थानीय प्रशासन और आम लोग सभी परेशान हैं. हालात ऐसे हैं कि खेतों से लेकर घरों और यहां तक कि जेलों तक में चूहों का आतंक देखने को मिल रहा है.
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया के बड़े कृषि क्षेत्रों में चूहों का यह प्रकोप किसानों के लिए भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन गया है. हजारों की संख्या में चूहे खेतों में फसलों को खा रहे हैं. किसान या तो दोबारा बुवाई करने को मजबूर हैं या फिर जहर मिले चारे पर लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं.
किसानों का कहना है कि उन्होंने 25 साल की खेती में ऐसा संकट बहुत कम देखा है. रात में चूहों की आवाजें छत, दीवारों और एयर कंडीशनिंग यूनिट तक में सुनाई देती हैं. इतना ही नहीं, उनकी बदबू सड़े हुए शव जैसी महसूस होती है.
रिकॉर्ड पैदावार से पैदा हुआ संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल हुई रिकॉर्ड पैदावार इस संकट की सबसे बड़ी वजह है. अच्छी फसल के दौरान खेतों में बड़ी मात्रा में अनाज बिखर जाता है, जो चूहों के लिए भरपूर भोजन बन जाता है. इसके बाद गर्मियों में हुई बारिश ने हरी घास और नई वनस्पति उगा दी, जिससे चूहों को भोजन के और ज्यादा सोर्स मिल गए.
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि इस बार चूहों को सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि ताजी हरियाली भी मिल गई. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि चूहों को "सिर्फ स्टेक नहीं, बल्कि स्टेक के साथ सलाद भी मिल गया." यानी उनके लिए हालात किसी स्वर्ग से कम नहीं थे.
2021 में भी ऑस्ट्रेलिया में देखा गया माउस प्लेग
ऑस्ट्रेलिया इससे पहले भी 2021 में ऐसे माउस प्लेग का सामना कर चुका है. उस समय न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड के कई इलाकों में हालात इतने खराब हो गए थे कि एक जेल में चूहों द्वारा भारी नुकसान पहुंचाने के बाद सैकड़ों कैदियों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा था.
इस बार भी किसानों को डर है कि अगर जल्द नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है. पहले से ही ईंधन और उर्वरक आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे किसान अब चूहों के खिलाफ नई लड़ाई लड़ रहे हैं.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क