'बर्फ खाकर जिंदा रहा...', एवरेस्ट की जानलेवा ठंड में 6 दिन! डेथ जोन के पास इस हाल में जिंदा मिला शेरपा

माउंट एवरेस्ट के डेथ जोन में छह दिनों तक लापता रहने के बाद 52 साल के शेरपा हिलेरी दावा को एक हिमखंड से रेस्क्यू किया गया है. उन्हें एक कचरा साफ करने वाली टीम ने रेस्क्यू किया और अस्पताल में भर्ती कराया गया. दावा बिना भोजन, पानी और अतिरिक्त ऑक्सीजन के अकेले जीवित रहे.

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6 दिनों तक लापता रहने के बाद शेरपा जिंदा रेस्क्यू किया गया है (Photo: Kathmandu Post Via Captain Bibek Khadka) 6 दिनों तक लापता रहने के बाद शेरपा जिंदा रेस्क्यू किया गया है (Photo: Kathmandu Post Via Captain Bibek Khadka)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 05 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:13 PM IST

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के डेथ जोन के पास एक चमत्कार देखने को मिला है. छह दिनों से लापता एक शेरपा, जिसे मृत मान लिया गया था, गुरुवार को जीवित पाए गए हैं.
 
52 साल के हिलेरी दावा शेरपा को एवरेस्ट से कचरा साफ करने वाली एक टीम ने ढूंढा है. अधिकारियों के अनुसार, टीम ने माउंटेन गाइड को एवरेस्ट बेस कैंप के ठीक ऊपर स्थित एक विशाल हिमखंड में फिसलते और रेंगते हुए नीचे आते देखा.

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लापता शेरपा की तलाश में शामिल कंपनी 8K एक्सपीडिशन्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पेम्बा शेरपा ने काठमांडू पोस्ट से कहा, 'जब हमारी टीम ने उन्हें देखा तो वो धीरे-धीरे बर्फीली जगह से नीचे खिसक रहे थे. यह अपने आप में एक हैरान कर देने वाली घटना है.'

दावा की तलाश में शामिल नेपाल माउंट एवरेस्ट नामक ट्रेकिंग कंपनी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि माउंटेन गाइड ने करीब एक हफ्ते तक बिना भोजन, पानी और एक्स्ट्रा ऑक्सीजन के अकेले रहकर यह कठिन समय बिताया.

कंपनी ने पोस्ट में कहा, 'यह किसी चमत्कार से कम नहीं है.'

शेरपा दावा को जब रेस्क्यू किया गया तो वो बहुत ज्यादा थके हुए थे, ठंड की वजह से उनके हाथों की हालत बहुत खराब हो चुकी थी. उन्हें हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू कर नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित HAMS अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके परिवार से उनकी मुलाकात हुई.

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दावा की बेटी म्हेन्दो ल्हामो शेरपा ने अस्पताल में पत्रकारों से कहा, 'उन्होंने मुझे पहचान लिया... उनकी हालत अच्छी है और वे बात कर रहे हैं. हम बहुत खुश हैं.'

शेरपा दावा ने बताया कि उनके पास खाने-पीने को कुछ नहीं था, चारों ओर बस बर्फ ही बर्फ थी और वो बर्फ खाकर जिंदा रहे.

दावा पिछले शुक्रवार, 29 मई को लापता हो गए थे. वो पोलैंड के एक पर्वतारोही के साथ माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर रहे थे तभी 24,600 फीट की ऊंचाई पर उससे बिछड़ गए थे. यह स्थान एवरेस्ट के कुख्यात 'डेथ जोन' से लगभग 1,600 फीट नीचे है. डेथ जोन वो जगह है जहां इंसानी शरीर अत्यधिक ऊंचाई के हिसाब से खुद को ढाल नहीं पाता और वहां लंबे समय तक जिंदा रहना भी बेहद मुश्किल है.

अधिकारियों के मुताबिक, दावा और उनका पोलिश ग्राहक एवरेस्ट की 29,032 फीट ऊंची चोटी तक पहुंचने में नाकाम रहने के बाद बेस कैंप लौट रहे थे.

यह साफ नहीं हो सका है कि वो पोलिश पर्वतारोही से कैसे अलग हुए. अलग होने के बाद पर्वतारोही वापस बेस कैंप पहुंच गया था. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, एवरेस्ट पर्वतारोहण सीजन समाप्त होने के दौरान वे पर्वत से नीचे उतरने वाले आखिरी पर्वतारोही थे. जब वो गायब हुए तो उनकी खोज के लिए हेलिकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन चलाया गया लेकिन वो वहां नहीं मिले जिसके बाद खोज रोक दी गई थी.

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सागरमाथा प्रदूषण नियंत्रण समिति (SPCC) की एक टीम बेस कैंप क्षेत्र में कचरा इकट्ठा कर रही थी, साथ ही शिखर तक जाने वाले रास्ते से रस्सियां हटाने और सीढ़ियों की मरम्मत का काम कर रही थी. इसी दौरान टीम ने दावा को खुम्बू आइसफॉल से नीचे आते हुए देखा.

बहुत खतरनाक माना जाता है खुम्बू आइसफॉल

करीब 17,999 फीट की ऊंचाई पर स्थित खुम्बू आइसफॉल को बेहद खतरनाक ग्लेशियर माना जाता है. इसमें बहुत विशाल बर्फीले खंड और गहरी दरारें हैं जहां अगर एक बार कोई गिर गया तो जिंदा बच पाना लगभग असंभव है.

दावा ने चढ़ाई के समय भारी गर्म जैकेट और इंसुलेटेड पैंट पहन रखी थे जिससे वो ठंड के बीच भी जिंदा रह सके. समिति के सदस्य लामा काजी शेरपा ने बताया कि उनकी टीम ने दावा को सुरक्षित रूप से बेस कैंप तक पहुंचाने में मदद की.

दावा को उस समय खोजा गया जब एक बचाव हेलीकॉप्टर उनके लापता होने वाले क्षेत्र में व्यापक खोज अभियान चला चुका था. अस्पताल तक पहुंचाने वाले बचाव अभियान Altitude Air Nepal के कैप्टन बिबेक खड़का ने काठमांडू पोस्ट को यह जानकारी दी.

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