मिडिल-ईस्ट में चल रहे तनाव का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ा है. तेल निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) के सदस्यों में से एक कुवैत ने अप्रैल 2026 में कच्चे तेल का एक भी बैरल निर्यात नहीं किया है. पिछले तीन दशकों से भी ज्यादा समय में ये पहली बार हुआ है जब कुवैत ने कच्चे तेल का निर्यात नहीं किया है.
जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली वेबसाइट टैंकर ट्रैकर्स ने इसकी जानकारी दी. वेबसाइट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, 'अप्रैल 2026 के दौरान कुवैत ने शून्य बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया. प्रथम खाड़ी युद्ध खत्म होने के बाद ये पहला ऐसा मौका है.'
कुवैत का तेल निर्यात रुकना एशिया और यूरोप के ऊर्जा बाजारों के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है. अगर ये स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है.
कच्चे तेल का निर्यात पूरी तरह बंद
कुवैत अभी भी तेल का प्रोडक्शन कर रहा है, लेकिन निर्यात पूरी तरह से ठप है. निकाले गए तेल का एक हिस्सा स्टोरेज में भेजा जा रहा है, जबकि कुछ हिस्से को रिफाइंड प्रोडक्ट्स में बदला जा रहा है. इनमें से कुछ रिफाइंड प्रोडक्ट्स का निर्यात जरूर हुआ है, लेकिन कच्चे तेल का निर्यात पूरी तरह बंद है.
मिडिल-ईस्ट में मौजूदा हालात और शिपिंग रूट्स पर लगी बंदिशों की वजह से कुवैत कच्चा तेल निर्यात नहीं कर पाया. ग्लोबल एनर्जी सप्लाई की लाइफलाइन कहलाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगी पाबंदियों ने तेल की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है.
खतरे में ग्लोबल एनर्जी और फूड सप्लाई
व्यापार पर बढ़ते बुरे प्रभावों और आर्थिक नुकसान के बीच कतर ने ईरान से अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने और क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील की है. कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जासिम अल-थानी ने चेतावनी दी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करना या इसे सौदेबाजी के लिए इस्तेमाल करना ग्लोबल एनर्जी और फूड सप्लाई के लिए खतरनाक हो सकता है.
दूसरी तरफ, अमेरिकी नौसेना ने मिडिल-ईस्ट में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, पिछले 20 दिनों में फारस की खाड़ी में 48 जहाजों का रास्ता बदला गया है.
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