बैंक में डकैती डाली, लोगों के फोन और सिक्युरिटी कैमरे भी ले गए, फिर भी छप गए पोस्टर

ये मामला है पाकिस्तान के कराची इलाके का. यहां की एक छोटी सी बैंक में डकैत पूरी तैयारी के साथ आए. उन्होंने बंदूक की दम पर न सिर्फ पैसे लूटे. बल्कि किसी को खबर न हो, कहीं तस्वीर न आए, इसलिए वहां के लोगों के फोन और बैंक में लगे कैमरे भी लूट ले गए. फिर भी उनकी तस्वीरें हर कहीं छाई हुई हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

aajtak.in

  • कराची,
  • 07 अगस्त 2013,
  • अपडेटेड 2:39 PM IST

ये मामला है पाकिस्तान के कराची इलाके का. यहां की एक छोटी सी बैंक में डकैत पूरी तैयारी के साथ आए. उन्होंने बंदूक की दम पर न सिर्फ पैसे लूटे. बल्कि किसी को खबर न हो, कहीं तस्वीर न आए, इसलिए वहां के लोगों के फोन और बैंक में लगे कैमरे भी लूट ले गए. फिर भी उनकी तस्वीरें हर कहीं छाई हुई हैं.

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पाकिस्तान के एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक चार डकैत बैंक में घुसे. उन्होंने सबसे पहले हथियारों के दम पर सिक्युरिटी गार्ड्स को कब्जे में लिया और उनकी बंदूकें जब्त कर लीं. फिर कैश काउंटर पर रखा पैसा उठा लिया. स्ट्रॉन्ग रूम खुलवाया और वहां से भी पैसा निकलवाया. ये रकम थी 22 लाख रुपये.

इसके बाद एक डकैत ने बैंक में मौजूद सभी ग्राहकों और कर्मचारियों की तलाशी ली. इसका मकसद नकदी लूटना नहीं, बल्कि उन सभी के फोन लेना था. इस काम के बाद दो डकैत बैंक में जगह जगह लगे कैमरे निकालने में जुट गए. इस काम के बाद डकैत इस इत्मिनान से रुखसत हुए कि उन्होंने अपने पीछे कोई निशान नहीं छोड़ा है.

मगर शातिर भी छोड़ता है निशां

अब आप याद करिए सत्तर के दशक की हिंदी फिल्मों का वो डायलॉग. अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, अपने पीछे कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है. ये डकैत सब कुछ ले गए. मगर बैंक के एक कमरे में रखा डीवीआर रेकॉर्डर छोड़ गए. कैमरे चले गए थे. मगर उन्हें निकाले जाने से पहले तक की रेकॉर्डिंग इसमें महफूज थी. अब पुलिस इसी फुटेज के सहारे जांच कर रही है. डकैतों की शक्ल चस्पा कर पोस्टर बनाए जा रहे हैं और उन्हें आसपास के इलाकों में लगाया जा रहा है.

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