विदेश मंत्री जयशंकर ने UNSC में पेश की भारत की दावेदारी, उठाई संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 2028-29 अवधि के लिए अस्थायी सदस्य बनने के अभियान की शुरुआत करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और न्यायसंगत विश्व के निर्माण के लिए काम करेगा.

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सीट के चुनाव के लिए भारतीय अभियान का आगाज किया. (Photo: X/@DrSJaishankar) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सीट के चुनाव के लिए भारतीय अभियान का आगाज किया. (Photo: X/@DrSJaishankar)

aajtak.in

  • न्यूयॉर्क,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:53 AM IST

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 2028-29 अवधि के लिए अस्थायी सदस्य (Non-Permanent Member) बनने के भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसे सुरक्षित, शांतिपूर्ण और न्यायसंगत विश्व के लिए काम करेगा, जहां ग्लोबल साउथ (Global South) की आवाज को समान महत्व मिले.

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राजदूतों, राजनयिकों और संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में जयशंकर ने भारत के अभियान का शुभारंभ किया. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण 'SHANTI' (Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity) के सिद्धांत पर आधारित है.

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ऐसा विश्व हो जहां शांति-सुरक्षा और समानता हो

जयशंकर ने कहा, 'भारत का लक्ष्य एक ऐसे विश्व के निर्माण में योगदान देना है, जहां शांति, सुरक्षा और समानता हो. ऐसा विश्व, जहां ग्लोबल साउथ की आवाज को बराबर महत्व मिले, शांति स्थापना मिशन भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हों और बहुपक्षीय व्यवस्था आज की वास्तविकताओं के अनुरूप प्रभावी समाधान दे, केवल मूकदर्शक न बनी रहे.'

उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसी होनी चाहिए जहां तकनीक की पूरी क्षमता का लाभ उठाया जाए, लेकिन उसके दुरुपयोग को भी रोका जाए. साथ ही समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें ताकि वैश्विक व्यापार प्रभावित न हो. आतंकवाद का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले संसाधनों पर रोक लगाना जरूरी है. इसके साथ ही जलवायु, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास को भी वैश्विक प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

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एकमात्र सीट के लिए ताजिकिस्ता से मुकाबला

2028-29 कार्यकाल के लिए UNSC के चुनाव जून 2027 में होंगे. एशिया-प्रशांत समूह (Asia-Pacific Group) की एकमात्र सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा. यह चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब दुनिया यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और अमेरिका-ईरान-इजरायल से जुड़े तनाव जैसे बड़े भू-राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है.

भारत की UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग

भारत इससे पहले 2021-22 कार्यकाल में UNSC का अस्थायी सदस्य रह चुका है. यह सुरक्षा परिषद में भारत का आठवां कार्यकाल था. इससे पहले भारत 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और 2011-12 में भी परिषद का सदस्य रह चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और ऐसे समय में भारत जैसे विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी मिलनी चाहिए.

उन्होंने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार अब और टाला नहीं जा सकता. भारत लंबे समय से UNSC में व्यापक सुधार और स्थायी व अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग करता रहा है. भारत का कहना है कि 1945 में बनी 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती और इसलिए उसमें सुधार समय की जरूरत है. भारत लगातार यह भी कहता रहा है कि उसे सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए.

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