PAK में इजरायल का खौफ! इस्लामाबाद टॉक्स से पहले क्या आशंकाएं जता रहे पाकिस्तानी

पाकिस्तानी मीडिया में इस्लामाबाद को पीस ब्रोकर के रूप में प्रोजेक्ट किया जा रहा है. PM शहबाज शरीफ की कूटनीति की तारीफ हो रही है, लेकिन इजरायल को बार-बार काम खराब करने वाला बताया जा रहा है. पाकिस्तान के अखबार लेबनान हमले, ईरान पर स्ट्राइक और इजरायल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कह रहा है कि वो वार्ता को डिरेल करने की कोशिश कर रहा है.

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इस्लामाबाद में ईरान वार्ता से पहले तैनात सुरक्षाकर्मी. (Photo: AFP) इस्लामाबाद में ईरान वार्ता से पहले तैनात सुरक्षाकर्मी. (Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:34 PM IST

पाकिस्तान में ईरान सीजफायर पर वार्ता से पहले वहां की मीडिया इजरायल के खिलाफ माहौल बना रही है. पाकिस्तान के अखबार डॉन ने अपने संपादकीय में लिखा है कि इजरायल इस वार्ता को डिरेल करने के लिए हर तरकीब अपना रहा है. इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने एक्स पोस्ट में इजरायल के खिलाफ जहरबुझी टिप्पणी की थी. पाकिस्तान टुडे और जियो न्यूज भी ऐसी ही एकपक्ष के कमेंट कर रहे हैं. 

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डॉन ने लिखा है कि, "इजरायल इस बात से बहुत नाराज है कि ईरान को तबाह करने की उसकी और अमेरिका की मिली-जुली कोशिश नाकाम रही है; इजरायली मीडिया में इस बात को लेकर सरकार की खूब आलोचना हो रही है कि वह इस क्रूर युद्ध में अपने लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रही."

अखबार ने आगे लिखा है कि अब ऐसा लगता है कि तेल अवीव ने अपना गुस्सा लेबनान के लोगों पर निकालने का फैसला कर लिया है, और वह भी ईरान के सहयोगी हिज़्बुल्लाह को निशाना बनाने के नाम पर. इस देश में तथाकथित 'दाहिये सिद्धांत' (Dahieh Doctrine) के तहत जान-बूझकर आम नागरिकों को निशाना बनाया गया है. जो कि एक युद्ध अपराध ह. लेकिन इज़राइल के लिए इस तरह के हमले करना कोई नई बात नहीं है; वह दशकों से पूरे मध्य-पूर्व में ऐसे हमले करता आ रहा है.

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डॉन ने पाकिस्तान सरकार का पक्ष रखने की नीति अपनाते हुए  कहा है कि, "यह इजरायल ही था, जिसने कथित तौर पर मिस्टर ट्रंप को गलत इंटेलिजेंस दी कि ईरान को आसानी से कैसे हराया जा सकता है. इससे US को ईरान के साथ युद्ध के लिए राजी किया. अब ऐसा लगता है कि तेल अवीव यह पक्का करने के लिए हर चाल चल रहा है कि नई शांति प्रक्रिया फेल हो जाए, और मिडिल ईस्ट में दुश्मनी फिर से शुरू हो जाए. मिस्टर ट्रंप को यह तय करना होगा कि क्या वह सच में ‘अमेरिका फर्स्ट’ रखना चाहते हैं, या इज़रायल के कहने पर चलना चाहते हैं, भले ही इस प्रोसेस में पूरा इलाका जल जाए."

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पाकिस्तान टुडे ने अपने संपादकीय में लिखा है कि "शुरुआती संकेत चिंताजनक हैं, क्योंकि इजरायली विमानों ने लेबनान पर हमले जारी रखे हैं. यह किसी गलतफहमी का नतीजा नहीं है; अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा करते समय साफ तौर पर कहा था कि इसमें लेबनान भी शामिल है.इजरायल ने लेबनान पर भी हमला किया, जहां ऐसा लगता है कि वह इलाके पर कब्ज़ा करने और यहां तक कि सीमा बदलने की कोशिश में लगा है."

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अखबार कहता है कि यह ऐसी ही हरकत है जिस पर पाकिस्तान को इन बातचीत में मुख्य मध्यस्थ होने के नाते नजर रखनी चाहिए और इसे रोकने की कोशिश करनी चाहिए. 

जियो न्यूज ने ईरान के नेता मोजतबा खामेनेई के बयान को प्रमुखता दी है. इस बयान में उन्होंने अमेरिका इजरायल की ओर इशारा करते हुए कहा है कि ईरान जंग तो नहीं चाहता है लेकिन इस युद्ध के 'गुनहगारों' को नहीं छोड़ा जाएगा.

द नेशन ने ईरान की तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने एक विश्वसनीय सूत्र के हवाले से बताया है कि अगर इजरायल लेबनान पर अपने हमले के दौरान सीज़फायर का उल्लंघन करना जारी रखता है, तो ईरान इस समझौते से पीछे हट जाएगा.

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने टेलीग्राम पर यह कसम खाई है कि वह लेबनान में किए गए अत्याचारों और सीजफायर की शर्तों का उल्लंघन करने के लिए इजरायल को सज़ा देगा. 

PAK रक्षा मंत्री का पोस्ट

शांति वार्ता से पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने X पर इजरायल के खिलाफ काफी सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया है. ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को 'मानवता के लिए अभिशाप' और कैंसर बताया. साथ ही लेबनान में हमलों को "नरसंहार" बताया. उन्होंने लिखा कि गाजा, ईरान और अब लेबनान में निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं, जबकि इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है. इजरायल ने इस पोस्ट की तीखी आलोचना की, जिसके बाद आसिफ ने ये पोस्ट डिलीट कर दी. 
 

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