ओमान तट के पास एक कमर्शियल जहाज पर हमला हुआ है. इस जहाज पर कुल 28 लोग सवार थे. इनमें से 24 भारतीय थे. दुखद बात यह है कि इस हमले के बाद 3 भारतीय लापता बताए जा रहे हैं. जबकि 21 भारतीय को सफलतापूर्वक बचा लिया गया है. ये घटना 10 जून की है. भारत ने इस हमले की कड़ी निंदा की है.
जिस जहाज पर हमला किया गया है उसका नाम सेटेबेलो है. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जहाज पर मौजूद 24 भारतीय क्रू सदस्यों में से अब तक 21 भारतीयों को बचा लिया गया है और तीन भारतीय लापता बताए जा रहे हैं. मंत्रालय ने कहा कि ओमान में भारतीय दूतावास स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और चल रहे खोज और बचाव अभियान में ओमान के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रहा है.
रॉयटर्स ने ब्रिटिश मैरीटाइम सिक्योरिटी ग्रुप एम्ब्रे के हवाले से लिखा है कि, "यह शायद ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी करने के लिए अमेरिकी ऑपरेशन का नतीजा था. पहले भी क्रू को चेतावनी दी गई है कि हमले की स्थिति में वे जहाज के पिछले हिस्से के बजाय अगले हिस्से (बो) पर इकट्ठा हों."
मैरीटाइम सिक्योरिटी से जुड़े एक और सूत्र ने भी कहा कि हो सकता है कि जहाज पर अमेरिकी मिसाइल से हमला हुआ हो.
अमेरिकी राजनयिक तलब
वहीं इस मामले में भारत ने बुधवार को नई दिल्ली में अमेरिका के 'चार्ज डी अफेयर्स' को तलब किया और कड़ा विरोध दर्ज कराया. विदेश मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी (अमेरिका) नागराज नायडू ने टैंकर 'सेटेबेलो' पर हुए हमले के बाद अमेरिका के 'चार्ज डी अफेयर्स' जेसन मीक्स को तलब किया. भारत ने जहाज पर हुए हमले की निंदा की और समुद्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस हमले पर प्रतिक्रिया नहीं दी है.
पश्चिम एशिया में सुरक्षा की अस्थिर स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए भारत ने इस समुद्री हमले को सीधे तौर पर उस इलाके में चल रहे बड़े भू-राजनीतिक तनाव से जोड़ा है.
हमले बहुत चिंताजनक हैं
विदेश मंत्रालय ने कहा, "इस इलाके में जहाजों पर लगातार हो रहे हमले बहुत चिंताजनक हैं और ये इलाके में चल रहे संघर्ष का सीधा नतीजा हैं." मंत्रालय ने शांति बहाल करने के लिए तुरंत युद्धविराम और कूटनीतिक बातचीत के ज़रिए जल्द समाधान निकालने की अपील की.
भारत ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि वैश्विक व्यापार मार्गों को भू-राजनीतिक तनाव के असर से बचाया जाना चाहिए. सरकार ने आम लोगों के बुनियादी ढांचे और कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने को तुरंत रोकने की मांग की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के सख्ती से पालन के साथ अहम जलमार्गों से जहाजों की आवाजाही को बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित करें.
रॉयटर्स के अनुसार यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स एजेंसी ने बताया कि पलाऊ के झंडे वाला एक केमिकल/ऑयल प्रोडक्ट टैंकर ओमान के सोहर बंदरगाह से 20 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में था, तभी उसके इंजन रूम में आग लगने की सूचना मिली.
ब्रिटिश मैरीटाइम रिस्क मैनेजमेंट ग्रुप 'वैनगार्ड' के अनुसार, यह जहाज 'सेटेबेलो' था और ओमान की नौसेना ने जहाज की मदद के लिए भेजी गई आपातकालीन कॉल (डिस्ट्रेस कॉल) पर तुरंत कार्रवाई की.
1 जून को ओमान के तट के पास था जहाज
मरीन ट्रैफ़िक शिप-ट्रैकिंग प्लेटफ़ॉर्म के अनुसार टैंकर आंशिक रूप से भरा हुआ था और आखिरी बार 1 जून को ओमान के तट के पास देखा गया था.
अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरान से जुड़े जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाना शुरू किया था, जब ईरान ने दुनिया के तेल और गैस के मुख्य रास्ते, होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को बहुत कम कर दिया था.
सेंटकॉम ने 8 जून को कहा कि अमेरिकी सेना ने नियमों का पालन न करने वाले सात जहाजों को रोक दिया, नियमों का पालन करने वाले 134 जहाजों का रास्ता बदल दिया और मानवीय सहायता ले जा रहे 42 जहाजों को जाने दिया.
शिवानी शर्मा / प्रणय उपाध्याय