खामेनेई की मौत के बाद किसे मिलेगी ईरान की कमान? ये 2 नाम आ रहे सामने

अमेरिका-इजरायल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि हुई है. अब ईरान की सत्ता पर किसका कब्जा होगा, इस पर चर्चा शुरू हो गई है. बता दें कि ईरान में सुप्रीम लीडर देश का सबसे शक्तिशाली पद होता है.

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इजरायली-अमेरिकी हमलों में खामेनेई की मौत होने की खबरें हैं. (Photo: AFP) इजरायली-अमेरिकी हमलों में खामेनेई की मौत होने की खबरें हैं. (Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:55 AM IST

अमेरिका-इजरायल का ईरान पर हमला जारी है और ईरान भी हर हमले का करारा जवाब दे रहा है. इस बीच डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू ने हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने का दावा किया है. ईरानी मीडिया (प्रेस टीवी) ने भी खामेनेई के मौत की पुष्टि की है. ऐसे में सवाल ये है कि खामेनेई के बाद ईरान की सत्ता कौन संभालेगा?

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ईरान बहुत जल्द नए सुप्रीम लीडर की घोषणा करने वाला है. ईरान के संविधान के 'विलायत-ए-फकीह' सिद्धांत के मुताबिक, सुप्रीम लीडर का पद सिर्फ एक बड़े धार्मिक विद्वान (मौलवी) को ही मिल सकता है. हालांकि, खामेनेई ने अपनी जिंदगी में किसी उत्तराधिकारी का नाम तय नहीं किया था.
 
खामेनेई के बाद इस्लामी गणराज्य ईरान के सुप्रीम लीडर की रेस में दो लोगों के नाम सामने आ रहे हैं. पहला नाम खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई का है और दूसरा नाम ईरान के संस्थापक अयातुल्ला खुमैनी के पोते हसन खुमैनी का है.

ईरान की सत्ता पर कब्जा किसी चुनौती से कम नहीं

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की मानें तो वर्तमान में किसी भी व्यक्ति के पास खामेनेई जैसी ऑथोरिटी नहीं है. इसीलिए किसी भी उत्तराधिकारी को क्रांतिकारी गार्ड और बड़े धार्मिक निकायों जैसे शक्तिशाली संस्थानों पर नियंत्रण हासिल करना एक बड़ी चुनौती होगी.

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ईरान की सत्ता का फैसला 'विशेषज्ञों की परिषद' करती है, जिसमें 88 बड़े धार्मिक विद्वान (मौलवी) शामिल होते हैं. ये परिषद ही आधिकारिक तौर पर नए सुप्रीम को चुनती है. लेकिन पर्दे के पीछे असली ताकत उन 'पावर ब्रोकर्स' के हाथ में होती है जो देश की व्यवस्था चलाते हैं. 

ईरान की सत्ता में IRGC की अहम भूमिका

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ईरान की चुनी हुई सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर काम करता है और सीधे सर्वोच्च नेता को जवाबदेह होता है. ये देश की सबसे शक्तिशाली और सबसे सुसज्जित सैन्य शाखा है. रॉयटर्स के मुताबिक, शनिवार के हमलों में IRGC कमांडर मोहम्मद पाकपुर की भी मौत हो गई है. ये विकास सत्ता के आंतरिक संतुलन को बदल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामी गणराज्य के भविष्य को आकार देने में IRGC की भूमिका अहम होगी.

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वर्तमान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को उदारवादी माना जाता है, लेकिन वो भी हमलों का निशाना बने हैं और उनकी स्थिति अभी साफ नहीं है. इसीलिए ईरान की सत्ता में आने वाले समय में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है.

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