US के 'सस्ते जुगाड़' की निकली हवा! तेहरान ने किया मार गिराने का दावा

ईरान ने अमेरिकी सेना के लुकास वन-वे अटैक ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है, जिसे ईरान के शाहेद ड्रोन के समान बताया जा रहा है. शाहेद ड्रोन कम लागत और उच्च मारक क्षमता के लिए जाने जाते हैं. ईरान ने अब तक कुल 131 विदेशी ड्रोन गिराने का दावा किया है.

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'लुकास' को शाहेद ड्रोन का क्लोन बताया जा रहा है. (Photo- AP) 'लुकास' को शाहेद ड्रोन का क्लोन बताया जा रहा है. (Photo- AP)

सुबोध कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:05 AM IST

ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी सेना के एक 'लुकास' (LUCAS) वन-वे अटैक ड्रोन को मार गिराया है. दिलचस्प बात ये है कि 'लुकास' ड्रोन मॉडल को ईरान के अपने 'शाहेद' ड्रोन के समान बताया जा रहा है. शाहेद ड्रोन अपनी कम लागत और घातक मारक क्षमता के लिए जाने जाते हैं.

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'फार्स न्यूज' ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें क्षतिग्रस्त अमेरिकी ड्रोन को दिखाया गया है. ईरान लगातार अमेरिकी और अन्य विदेशी ड्रोनों को निशाना बना रहा है और ये इंटपसेप्शन भी उसी का हिस्सा है. 

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ईरान का कहना है कि इस कार्रवाई के साथ ही अब तक गिराए गए ड्रोनों की कुल संख्या 131 तक पहुंच गई है.

शाहेद-136 ड्रोन लगभग 3.5 मीटर लंबा और 2.5 मीटर चौड़ा होता है. इसका वजन करीब 200 किलोग्राम है. इसका खास 'तिकोना' (Delta Wing) डिजाइन इसे हवा में उड़ते समय काफी स्थिर रखता है.

शाहेद ड्रोन की तरह काम करता है लुकास!

लुकास एक 'वन-वे अटैक' ड्रोन है, जिसे आत्मघाती ड्रोन भी कहा जाता है. ये ड्रोन टारगेट से टकराकर तबाह हो जाता है और एक जोरदार धमाका करता है. दावा किया जाता है कि लुकास का डिजाइन ईरान के 'शाहेद-136' ड्रोन से बहुत हद तक मिलता-जुलता है. शाहेद की तरह इसमें भी 'डेल्टा विंग'का इस्तेमाल किया गया है. ये कम ऊंचाई पर उड़ने और रडार की नजरों से बचने में सक्षम माना जाता है.

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कैसे काम करता है शाहेद ड्रोन?

शाहेद ड्रोन में पीछे की तरफ एक छोटा पिस्टन इंजन लगा होता है, जिसे 'पुशर प्रोपेलर' कहते हैं. इसकी अधिकतम रफ्तार 185 किलोमीटर प्रति घंटा है. ये एक बार में 2000 से 2500 किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के ठिकाने तक पहुंच सकता है. इस ड्रोन में 30 से 50 किलोग्राम तक का शक्तिशाली विस्फोटक लगा होता है, जो टकराते ही बड़ा धमाका करता है.

शाहेद ड्रोन को ट्रक के ऊपर बने एक स्टैंड से लॉन्च किया जाता है. एक साथ कई ड्रोन छोड़कर दुश्मन पर 'स्वार्म अटैक' (झुंड में हमला) किया जा सकता है. इसे चलाने के लिए GPS और INS सिस्टम का इस्तेमाल होता है. इसे पहले से ही टारगेट बताकर प्रोग्राम कर दिया जाता है.

यह भी पढ़ें: शाहेद ड्रोन की बौछार में फंसा अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम! ईरान की नई रणनीति से बढ़ी टेंशन

इसकी कीमत बहुत कम है, इसलिए ईरान और रूस जैसे देश इसे हजारों की संख्या में बना सकते हैं. कम लागत की वजह से इसे 'सस्ता और घातक' हथियार माना जाता है.

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