बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाई-प्रोफाइल बैठक चल रही थी. दोनों नेताओं के एजेंडे में ईरान, होर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया का तनाव बड़े मुद्दे थे. लेकिन इसी बीच एक ऐसी घटना हुई जिसने सबका ध्यान खींच लिया.
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के पास चीन की एक सिक्योरिटी कंपनी से जुड़े जहाज को सीज कर लिया. यह जहाज हांगकांग में रजिस्टर्ड कंपनी सिनोगार्ड्स मरीन सिक्योरिटी का था और इसका नाम हुई चुआन बताया गया है. जहाज होंडुरास के झंडे के तहत ऑपरेट हो रहा था.
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कंपनी के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने जहाज को गुरुवार को रोका और "डॉक्यूमेंटेशन और कंप्लायंस इंस्पेक्शन" के नाम पर उसे ईरानी जलक्षेत्र की तरफ ले गए. बताया गया कि जहाज UAE के फुजैराह तट से करीब 38 नॉटिकल मील दूर एंकर पर खड़ा था.
पहली बार रोका गया चीनी जहाज
यह घटना इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार किसी निजी सिक्योरिटी जहाज को इस तरह रोका गया है. माना जा रहा है कि ईरान यह संदेश देना चाहता है कि वह होर्मुज के आसपास किसी भी तरह की हथियारबंद सुरक्षा गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा, चाहे वह उसके करीबी साझेदार चीन से जुड़ी कंपनी ही क्यों न हो.
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हालांकि सिनोगार्ड्स कंपनी ने यह साफ नहीं किया कि उस समय जहाज "फ्लोटिंग आर्मरी" यानी समुद्र में हथियार रखने वाले प्लेटफॉर्म के तौर पर इस्तेमाल हो रहा था या नहीं. लेकिन इस इलाके में प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनियां अक्सर जहाजों की सुरक्षा के लिए समुद्र में हथियार स्टोर करती हैं.
चीन ईरान का आर्थिक सहयोगी
इस पूरी घटना ने चीन और ईरान के रिश्तों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. चीन लंबे समय से ईरान का बड़ा आर्थिक और कूटनीतिक सहयोगी रहा है. लेकिन ट्रंप-जिनपिंग बैठक के बीच चीनी जहाज को रोके जाने को कई लोग तेहरान का सख्त संदेश मान रहे हैं कि सुरक्षा और होर्मुज के मुद्दे पर वह किसी को भी छूट देने के मूड में नहीं है.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क