भारी बमबारी के बावजूद नहीं डगमगाई ईरान की सत्ता, US इंटेलिजेंस का दावा- 'इस्लामी शासन नहीं गिरने वाली'

अमेरिका और इजरायल के लगातार हमलों के बावजूद ईरान की इस्लामी सरकार फिलहाल मजबूत बनी हुई है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारी बमबारी और शीर्ष नेताओं की मौत के बाद भी तेहरान की सत्ता गिरने के किसी तत्काल खतरे में नहीं है और सरकार अब भी देश पर नियंत्रण बनाए हुए है.

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US-इजरायल की इंटेलिजेंस का मानना है कि ईरानी शासन आज भी मजबूत है. (Photo- Reuters) US-इजरायल की इंटेलिजेंस का मानना है कि ईरानी शासन आज भी मजबूत है. (Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:12 AM IST

अमेरिका और इजरायल के लगातार हवाई हमलों के बावजूद ईरान की इस्लामी सरकार अभी भी मजबूती से खड़ी हुई है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब दो हफ्तों से जारी भारी बमबारी के बाद भी ईरान की सत्ता गिरने के किसी तत्काल खतरे के संकेत नहीं मिले हैं.

मामले से जुड़े तीन सूत्रों के मुताबिक एक न्यूज एजेंसी ने बताया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को मिली कई रिपोर्ट्स में लगभग एक जैसी बात सामने आई है. एक सूत्र ने कहा कि खुफिया विश्लेषण लगातार यही संकेत दे रहा है कि ईरान की सरकार फिलहाल गिरने की स्थिति में नहीं है और वह अब भी देश की जनता और प्रशासनिक तंत्र पर नियंत्रण बनाए हुए है.

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ताजा आकलन पिछले कुछ दिनों में तैयार की गई रिपोर्ट्स पर आधारित है. यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर अमेरिका के भीतर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह 2003 के बाद अमेरिका के 'सबसे बड़े सैन्य अभियान' को जल्द समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं.

ईरान की धार्मिक सत्ता अब भी संगठित!

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान के कट्टरपंथी नेता सत्ता में मजबूती से बने रहते हैं, तो युद्ध को स्वीकार्य तरीके से खत्म करना आसान नहीं होगा. खुफिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 28 फरवरी को हुए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत के बावजूद देश की धार्मिक सत्ता अभी भी संगठित बनी हुई है. इसी दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया था.

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इजरायल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी बंद कमरे में हुई चर्चाओं का हवाला देते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह युद्ध ईरान की धार्मिक सरकार के पतन तक पहुंचेगा. सूत्रों का कहना है कि जमीनी हालात लगातार बदल रहे हैं और आने वाले समय में ईरान के अंदर की स्थिति अलग दिशा भी ले सकती है.

ईरान में कई ठिकानों पर US-इजरायल का स्ट्राइक

युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है. इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, परमाणु ठिकाने और ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे. इन हमलों में खामेनेई के अलावा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के कई वरिष्ठ कमांडर भी मारे गए हैं. IRGC ईरान की एक शक्तिशाली अर्धसैनिक ताकत है जो देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा ढांचे के बड़े हिस्से पर प्रभाव रखती है.

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इसके बावजूद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का कहना है कि IRGC और धार्मिक नेतृत्व की संरचना अभी भी सक्रिय है और अंतरिम नेतृत्व देश पर नियंत्रण बनाए हुए है. इस बीच ईरान के वरिष्ठ शिया धर्मगुरुओं की संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित कर दिया है.

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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और इजरायल वास्तव में ईरान की सरकार को गिराना चाहते हैं तो इसके लिए जमीनी हमला यानी ग्राउंड ऑपरेशन करना पड़ सकता है. हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल ईरान में अमेरिकी सैनिक भेजने की संभावना से स्पष्ट इनकार नहीं किया है.

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