'ट्रंप होते कौन हैं...', पेजेश्कियान का सवाल, बोले- परमाणु ईरान का अधिकार

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने न्यूक्लियर अधिकारों को लेकर अमेरिका पर सीधा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि कोई भी देश ईरान से उसके अधिकार नहीं छीन सकता. दूसरी तरफ अमेरिका इसी जिद्द पर है कि ईरान पहले अपना परमाणु प्रोग्राम ड्रॉप करे.

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (Photo- ITG) ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (Photo- ITG)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 19 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:16 PM IST

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि उनका देश अपने न्यूक्लियर अधिकारों पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा. उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती देते हुए कहा कि अमेरिका को यह तय करने का कोई हक नहीं है कि ईरान क्या कर सकता है और क्या नहीं.

राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कहा, "ट्रंप कहते हैं कि ईरान अपने न्यूक्लियर अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, लेकिन यह नहीं बताते कि आखिर किस जुर्म में? वो कौन होते हैं किसी देश के अधिकार छीनने वाले?" उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर मुद्दे को लेकर टकराव जारी है.

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अमेरिका का साफ कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना उसकी प्राथमिकता है. वहीं ईरान बार-बार कहता आया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा, लेकिन अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर किसी तरह की पाबंदी मानने को तैयार नहीं है.

ईरान जंग नहीं चाहता- पेजेशकियान

राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अपने बयान में यह भी साफ किया कि ईरान जंग चाहता नहीं है, लेकिन अगर उस पर दबाव बनाया गया तो वह पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने कहा कि उनका देश अपनी रक्षा कर रहा है और कोशिश कर रहा है कि यह संघर्ष "सम्मान के साथ" खत्म हो.

ईरान का मौजूदा रुख साफ तौर पर दो हिस्सों में बंटा नजर आता है. एक तरफ वह बातचीत के लिए तैयार है और समझौते की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह यह भी दिखा रहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार है.

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अमेरिका पर 'डकैती' का आरोप

हाल के दिनों में ईरान की तरफ से कुछ ऐसे संकेत भी आए हैं, जिन्हें बातचीत के लिहाज से सकारात्मक माना जा रहा है. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट को कमर्शियल जहाजों के लिए खोलने की बात कही थी. लेकिन इसके तुरंत बाद रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अलग रुख अपनाते हुए पाबंदी जारी रखने की बात कह दी और अमेरिका पर "पायरेसी" यानी समुद्र में डकैती करने का आरोप लगाया.

इस तरह के अलग-अलग बयानों से साफ है कि ईरान इस पूरे मामले में अपने पास ज्यादा से ज्यादा विकल्प रखना चाहता है. वह एक तरफ बातचीत में मजबूत स्थिति बनाना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ दबाव भी बनाए रखना चाहता है.

आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच एक और दौर की बातचीत की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में पेजेशकियान का यह बयान एक तरह से साफ मैसेज भी है. ईरान बातचीत करेगा, लेकिन अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा.

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