अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ताबड़तोड़ अटैक किए. लेकिन बढ़ती जंग के साथ ईरान की मिसाइल और ड्रोन दागने की क्षमता को बड़े पैमाने पर चोट पहुंची है. हालांकि, वो अब भी इतना काबिल है कि पड़ोसी देशों और इजरायल को नुकसान पहुंचा सकता है.
जंग की शुरुआत और वर्तमान स्थिति के बीच का अंतर चौंकाने वाला है. अमेरिका और इजरायल के साथ लड़ते-लड़ते ईरान को अब 18 दिन हो गए हैं. 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत हुए हमलों ने ईरान के सैन्य तंत्र को काफी हद तक प्रभावित किया है.
युद्ध के पहले 24 घंटों में ईरान ने UAE पर 167 मिसाइलें (बैलिस्टिक और क्रूज) और 541 ड्रोन दागे थे. अल जजीरा और यूएई रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, युद्ध के 15वें दिन ये संख्या घटकर 4 मिसाइलें और 6 ड्रोन ही रह गई.
पहले दिन के मुकाबले भारी गिरावट
इजरायल के 'इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज' के मुताबिक, इजरायल पर होने वाले हमलों में भी भारी कमी आई है. शुरुआत में जहां रोजाना करीब 100 मिसाइलें आती थीं, अब उनकी संख्या सिंगल डिजिट में सिमट गई है. पेंटागन का कहना है कि पहले दिन के मुकाबले मिसाइल लॉन्चिंग में 90% और ड्रोन हमलों में 86% की कमी आई है.
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व्हाइट हाउस और ट्रंप का दावा
व्हाइट हाउस ने भी शनिवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा, 'ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता तबाह हो गई है. उनकी नौसेना को कॉम्बैट इनइफेक्टिव घोषित किया गया है. ईरान के आसमान पर अब हमारा पूरा वर्चस्व है.'
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी रविवार को दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की ड्रोन बनाने की क्षमता को पूरी तरह खत्म कर दिया है.
ईरान अब भी कैसे कर रहा है हमले?
सवाल ये उठता है कि अगर क्षमता इतनी कम हो गई है, तो ईरान अब भी मिसाइलें कैसे दाग रहा है? रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान एक विशाल देश है और जब तक जमीन पर सेना नहीं उतरती, उसकी क्षमता को जीरो करना नामुमकिन है.
सीक्रेट लॉन्चर्स का इस्तेमाल कर रहा ईरान
वाशिंगटन के नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेविड देस रोशेस का कहना है कि ईरान ने उन मिसाइलों और लॉन्चर्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है जिन्हें जंग से पहले खुफिया जगहों पर छिपा दिया गया था. उन्होंने कहा, 'ईरान अब सैन्य ठिकानों के बजाय एक या दो मिसाइलों से नागरिक और वाणिज्यिक बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है.'
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उनके मुताबिक सैन्य नजरिए से ये बहुत अहम नहीं है, इसे सिर्फ 'उत्पीड़न की आग' कहा जा सकता है, जिसका मकसद पड़ोसी देशों के अलर्ट सिस्टम को थकाना और लोगों को डराना है.
ईरान के लॉन्चर्स तबाह करना चाहते हैं इजरायल-अमेरिका
इजरायल और अमेरिका की मुख्य रणनीति ईरान की सत्ता के साथ-साथ लॉन्चर्स को बर्बाद करना भी रहा है. सैटेलाइट और रडार के जरिए मिसाइल लॉन्च होने वाले स्थान को तुरंत पहचाना जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने ईरान के अनुमानित 410-440 लॉन्चर्स में से 290 लॉन्चर्स को सेवा से बाहर कर दिया है.
क्या है ईरान का मास्टरप्लान?
जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स के विशेषज्ञ हमीदरेज़ा अजीज़ी का मानना है कि ईरान की रणनीति अब एक 'वेटिंग गेम' है. ईरान का आकलन है कि उसके मिसाइल खत्म होने से पहले खाड़ी देशों और इजरायल की डिफेंस मिसाइलें खत्म हो सकती हैं.
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