मिडिल ईस्ट में जंग को 23 दिन हो गए हैं. आज जंग का 24वां दिन है. इन 23 दिनों में करीब 2500 लोग मारे जा चुके हैं. अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए, ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन से जवाब दिया, लेबनान में जमीनी लड़ाई शुरू हो गई और होर्मुज की खाड़ी बंद होने से दुनिया का तेल रुक गया. यह जंग अब सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रही. इसने पूरी दुनिया को एक नए संकट में धकेल दिया है.
अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के अंदर अब तक 1500 से 2000 लोग मारे जा चुके हैं. इनमें सैनिक, सुरक्षा अधिकारी और आम नागरिक सब शामिल हैं. इसके अलावा लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ लड़ाई में भी सैकड़ों लोगों की जान गई है. सब मिलाकर यह आंकड़ा 2500 के करीब पहुंच चुका है और हर दिन बढ़ रहा है.
ईरान में टार्गेट किलिंग - एक-एक करके मारे गए बड़े नेता
इस जंग में इजरायल ने एक खास रणनीति अपनाई. सिर्फ इमारतें और हथियार नहीं, बल्कि ईरान के बड़े नेताओं और कमांडरों को सीधे निशाना बनाओ. 28 फरवरी सबसे बड़ा झटका लगा. जंग के पहले ही दिन चार बड़े नाम मारे गए.
अली खामेनेई: ईरान के सुप्रीम लीडर. तेहरान के उनके निजी परिसर पर हमला हुआ और वो मारे गए. इस हमले में उनकी बेटी, बहू और पोता भी मारे गए. यह ईरान के लिए सबसे बड़ा झटका था.
रियर एडमिरल अली शमखानी: ईरान की डिफेंस काउंसिल के सचिव. ये वो शख्स थे जो ईरान की पूरी रक्षा नीति बनाते थे.
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मेजर जनरल मोहम्मद पकपूर: IRGC के बड़े कमांडर. जमीनी, हवाई और मिसाइल रणनीति के मुख्य दिमाग.
मेजर जनरल अब्दोलरहीम मूसवी: ईरान की सशस्त्र सेनाओं के चीफ ऑफ स्टाफ. यानी वो शख्स जो ईरान की पूरी फौज - आर्मी, एयरफोर्स, नेवी, IRGC सबके बीच तालमेल बिठाते थे. इनके जाने से ईरान का कमांड सिस्टम लगभग टूट गया.
17 मार्च को फिर दो बड़े नामों को अमेरिका-इजरायल ने एलिमिनेट किया. तेहरान के बाहर एक गुप्त बैठक में इजरायल ने हमला किया और दो और नेता मारे गए.
अली लारीजानी: सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव और सुप्रीम लीडर के राजनीतिक सलाहकार. वो वही शख्स थे जो बातचीत के रास्ते से जंग खत्म करने के हक में थे. उनके मारे जाने से शांति की एक बड़ी उम्मीद भी खत्म हो गई.
गुलामरेजा सुलेमानी: बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के बड़े कमांडर. ये वो ताकत है जो ईरान के अंदर और बाहर जमीनी ऑपरेशन चलाती है।
इन हत्याओं ने ईरान के भीतर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. आखिर इजरायल को इन गुप्त ठिकानों की जानकारी कैसे मिल रही है? क्या ईरान के अंदर से ही कोई जानकारी लीक हो रही है?
लेबनान में जमीनी हमला - अब सिर्फ हवाई नहीं, जमीन पर भी लड़ाई
लेबनान में जंग एक नए मोड़ पर आ गई है. इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ जमीनी हमला शुरू कर दिया है. हवाई हमलों के बाद अब टैंक और पैदल सैनिक भी मैदान में उतर आए हैं.
इजरायल का कहना है कि वो हिजबुल्लाह के रॉकेट अड्डे, हथियारों के भंडार और बंकर तबाह करना चाहता है. कई गांव खाली करा दिए गए हैं. लोग अपना घर-बार छोड़कर भाग रहे हैं. मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि इजरायल ने व्हाइट फॉस्फोरस जैसे खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल किया है जो आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाते हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है.
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होर्मुज में खतरा - दुनिया का तेल रुका
होर्मुज की खाड़ी जंग का सबसे बड़ा आर्थिक हथियार बन गई है. ईरान ने इस रास्ते को लगभग बंद कर दिया है और धमकी दी है कि जो जहाज निकलने की कोशिश करेगा उस पर ड्रोन और मिसाइल से हमला होगा. इस रास्ते से दुनिया का 20 फीसदी तेल और बड़ी मात्रा में LPG गुजरती है. रास्ता बंद होने से
तेल के दाम आसमान छू रहे हैं. जहाजों का बीमा महंगा हो गया है. भारत समेत पूरे एशिया में ऊर्जा की सप्लाई पर असर पड़ रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को लगातार धमकी मिल रही है. ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान होर्मुज का रास्ता नहीं खोलता है तो अगले 48 घंटे में वह उनके पावर प्लांट पर हमले शुरू कर देगा.
आगे क्या?
24 दिनों में यह जंग सिर्फ ईरान और इजरायल की लड़ाई नहीं रही. इसने दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सप्लाई और राजनीतिक संतुलन को हिला दिया है.
अगर जल्द कोई शांति की कोशिश नहीं हुई तो मौतों का आंकड़ा और बढ़ेगा, होर्मुज और बंद रहेगा और दुनिया का यह हिस्सा और गहरे संकट में जाएगा.
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