इजरायल की राजधानी तेल अवीव में बीते 12 घंटों की शांति के बाद एक बार फिर हवाई हमलों के सायरन गूंज उठे हैं. इजरायल के अंदर अलग-अलग इलाकों में 1,230 से ज्यादा बार अलर्ट साउंड किए गए हैं, जो युद्ध के और तेज होने का संकेत देते हैं. इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने पिछले 24 घंटों में ईरान के 170 ठिकानों को निशाना बनाया है और इस दौरान करीब 400 बमों और एम्युनिशन का इस्तेमाल किया गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक सार्थक बातचीत का दावा जरूर कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर ईरान और इजरायल की तरफ से लगातार पलटवार जारी है. अमेरिका ने ईरान की एयरफोर्स, नौसेना, मिसाइल लॉन्च क्षमता और मिसाइल बनाने वाली इंडस्ट्रियल कैपेसिटी को ध्वस्त करने के चार अहम मकसद तय किए हैं.
ट्रंप प्रशासन की 4 से 6 हफ्ते की डेडलाइन खत्म होने से पहले इजरायल और अमेरिका जल्दी से जल्दी बड़े टार्गेट्स को हासिल कर अपनी जीत सुनिश्चित करना चाहते हैं.
सोशल मीडिया पर नैरेटिव और दावों की जंग
मैदानी जंग के साथ-साथ दोनों देशों के बीच एक मनोवैज्ञानिक युद्ध और नैरेटिव की लड़ाई भी चल रही है. ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और एफ-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया है. हालांकि, अमेरिकी सेंटकॉम ने इसकी पुष्टि नहीं की है. दोनों ही पक्ष सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल करते हुए अपनी ताकत और बढ़त दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. ईरान यह मैसेज देना चाहता है कि वह इतने हमलों के बावजूद अमेरिकी और इजरायली विमानों को टारगेट करने में सक्षम है.
इजरायली हमलों ने ईरान के इस्फहान और राजधानी तेहरान के सैन्य ठिकानों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है. तस्वीरें और अलग-अलग इलाकों से मिल रही विध्वंस की रिपोर्टें बताती हैं कि ईरान के मिसाइल डंप और कमांड एंड कंट्रोल स्ट्रक्चर को भारी क्षति हुई है. आईडीएफ का मुख्य फोकस ईरान की उन जगहों को तबाह करना है जहाँ उसने मिसाइलें और गोला-बारूद जमा कर रखा है.
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अमेरिकी विदेश मंत्री के 4 बड़े टार्गेट्स
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने साफ किया है कि इस युद्ध में अमेरिका के चार अहम मकसद हैं. पहला टार्गेट ईरान की वायु सेना को ध्वस्त करना है, दूसरा उसकी नौसेना की क्षमता खत्म करना है, तीसरा मिसाइल लॉन्चिंग कैपेसिटी को मिटाना है और चौथा ईरान की मिसाइल निर्माण की औद्योगिक क्षमता को नष्ट करना है. अमेरिका इन टार्गेट्स को हासिल करने के बेहद करीब पहुंच रहा है, जिससे ईरान की भविष्य की सैन्य ताकत को सीमित किया जा सके.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करने का भारी दबाव है. अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप 4 से 6 हफ्ते की तय विंडो के अंदर इस युद्ध के खत्म होने का ऐलान कर सकते हैं, चाहे होर्मुज स्ट्रेट खुले या न खुले. इसी कम समय की खिड़की का फायदा उठाते हुए इजरायल और अमेरिका की सेनाएं रणनीतिक रूप से जरूरी बड़े टार्गेट्स को एंगेज कर रही हैं, जिससे जंग खत्म होने से पहले ईरान की क्षमता को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके.
प्रणय उपाध्याय