कौन हैं अरुण सुब्रमण्यम... एक भारतीय जज जिसने दिया ट्रंप को झटका, पलट दिया सरकार का एक बड़ा फैसला

भारतीय मूल के अमेरिकी जज अरुण सुब्रमण्यम ने ट्रंप प्रशासन की ओर से डेमोक्रेट शासित राज्यों में बच्चों की देखभाल, परिवार सहायता और सामाजिक सेवाओं से जुड़ी करीब 10 अरब डॉलर की फंडिंग रोकने के फैसले पर अस्थायी रोक लगा दी है. जज ने कहा कि अचानक फंड रोकने से गरीब परिवारों और कमजोर वर्गों को गंभीर नुकसान हो सकता है और प्रक्रिया में कानूनी खामियां हैं.

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जज अरुण सुब्रमण्यम को पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार में नियुक्त किया गया था. (File Photo: ITG) जज अरुण सुब्रमण्यम को पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार में नियुक्त किया गया था. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • वॉशिंगटन,
  • 12 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:15 PM IST

अमेरिका में भारतीय मूल के एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट जज का फैसला इन दिनों राजनीतिक विवाद का बड़ा कारण बन गया है. पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की ओर से नियुक्त जज अरुण सुब्रमण्यम ने ट्रंप प्रशासन को डेमोक्रेट शासित राज्यों में योजनाओं के लिए दी जाने वाली अरबों डॉलर की फंडिंग रोकने से अस्थायी रूप से रोक दिया है. इसके बाद MAGA समर्थकों और ट्रंप के करीबी लोगों ने जज पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं.

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न्यूयॉर्क टाइम्स की 9 जनवरी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज अरुण सुब्रमण्यम ने एक अस्थायी आदेश जारी करते हुए ट्रंप प्रशासन को करीब 10 अरब डॉलर की फंडिंग रोक पर फिलहाल अमल न करने का निर्देश दिया. यह फंडिंग बच्चों की देखभाल, परिवार सहायता और सामाजिक सेवाओं से जुड़ी थी और इसका असर न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया, मिनेसोटा, इलिनॉय और कोलोराडो जैसे राज्यों पर पड़ता.

ट्रंप प्रशासन ने रोक दी थी फंडिंग

ट्रंप प्रशासन ने इस महीने की शुरुआत में यह फंडिंग रोकने का ऐलान किया था. सरकार का कहना था कि राज्य सरकारों की ओर से चलाई जा रही योजनाओं में धोखाधड़ी और टैक्सपेयर्स के पैसों के गलत इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंताएं हैं. खासतौर पर मिनेसोटा में डे-केयर से जुड़े कथित घोटालों का हवाला दिया गया था, जिसे ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति, इमिग्रेशन और सरकारी खर्च से जोड़ा गया.

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कोर्ट पहुंचे कई राज्य

हालांकि प्रभावित राज्यों ने अदालत का रुख किया और कहा कि फंडिंग रोकना गैरकानूनी है. राज्यों का तर्क था कि इससे कांग्रेस के बजट अधिकार का उल्लंघन होता है और तय प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया. उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले से गरीब परिवारों, बच्चों और दिव्यांग लोगों को तुरंत नुकसान होगा. इन कटौतियों में करीब 7.3 अरब डॉलर की पारिवारिक सहायता, 2.4 अरब डॉलर की चाइल्ड केयर फंडिंग और अन्य सामाजिक योजनाएं शामिल थीं.

न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने इस फैसले को परिवारों के लिए बड़ी राहत बताया और कहा कि यह उन लोगों के लिए जरूरी फंड है, जिनकी जिंदगी इन योजनाओं पर निर्भर है.

कौन हैं जज अरुण सुब्रमण्यम

45 साल के अरुण श्रीनिवास सुब्रमण्यम अमेरिका की संघीय अदालत में सबसे युवा जजों में गिने जाते हैं. साल 2023 में वह न्यूयॉर्क के साउदर्न डिस्ट्रिक्ट में नियुक्त होने वाले पहले दक्षिण एशियाई जज बने. पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2022 में उनका नाम भेजा था और सीनेट ने सीनेटर चक शूमर की सिफारिश पर मंजूरी दी थी.

अरुण सुब्रमण्यम का जन्म 1979 में पिट्सबर्ग में हुआ था. उनके माता-पिता भारत से अमेरिका आए थे. उन्होंने कंप्यूटर साइंस और इंग्लिश में पढ़ाई की और बाद में कोलंबिया लॉ स्कूल से कानून की डिग्री हासिल की. उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की जज रूथ बेडर गिन्सबर्ग सहित कई वरिष्ठ जजों के साथ काम किया है.

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वकील के तौर पर उन्होंने जटिल मामलों में अपने मुवक्किलों के लिए एक अरब डॉलर से ज्यादा की रकम हासिल करवाई और प्रो बोनो मामलों में भी सक्रिय भूमिका निभाई. जज के तौर पर उन्हें शांत और संतुलित फैसलों के लिए जाना जाता है. 2025 में चर्चित सीन ‘डिडी’ कॉम्ब्स केस में सजा के दौरान भी उनके फैसले की काफी चर्चा हुई थी.

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