ब्रिक्स में PAK की टेरर स्टोरी EXPOSED, तीन माह में ऐसे सफल हुई भारत की रणनीति

चीन को आतंक के खिलाफ मनाने के लिए भारतीय वार्ताकारों ने पिछले तीन महीने बीजिंग के साथ इस पर काम किया. दिलचस्प बात ये है कि ये बातचीत उस समय चल रही थी, जब दोनों देशों के बीच डोकलाम विवाद भी चर्चा में था.

Advertisement
ब्रिक्स समिट ब्रिक्स समिट

लव रघुवंशी

  • नई दिल्ली,
  • 05 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 10:19 AM IST

ब्रिक्स समिट में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है. चीन की इच्छा ना होते हुए भी ब्रिक्स के पांच देशों के साझा घोषणा पत्र में पहली बार पाकिस्तान में पाले पोसे जा रहे आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का साफ तौर पर नाम लिया गया है. इस साझा घोषणा पत्र में ब्रिक्स देशों ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों के साथ-साथ तालिबान, आईएसआईएस और अलकायदा के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की मांग की है.

Advertisement

'इंडियन एक्सप्रेस' की खबर के मुताबिक चीन को आतंक के खिलाफ मनाने के लिए भारतीय वार्ताकारों ने पिछले तीन महीने बीजिंग के साथ इस पर काम किया. दिलचस्प बात ये है कि ये बातचीत उस समय चल रही थी, जब दोनों देशों के बीच डोकलाम विवाद भी चर्चा में था. वार्ता के दौरान भारतीय पक्ष ने चीनी वार्ताकारों से कहा कि एक 'प्रमुख शक्ति' के रूप में उनके देश को 'बड़ी जिम्मेदारी' की भूमिका निभानी चाहिए. भारतीय पक्ष को चीन को यह आश्वस्त करने में तीन महीने लग गए कि आतंकवादी संगठनों का नाम शामिल करने पर बीजिंग ऐसा लगेगा कि वो एक 'मेजर पावर' की जिम्मेदारियां निभा रहा है.

इस रणनीति में प्रमुख तत्वों में से एक ये रहा है कि ऐसे समय में जब के नेतृत्व में अमेरिका वैश्विक शासक की भूमिका में खड़ा नहीं उतर रहा है तो भारत को लगा कि चीनी वैश्विक स्तर पर उस नेतृत्व के स्थान पर कब्जा करने के लिए उत्सुक होंगे. राजनयिकों को ये तब लगा, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इस साल के शुरू में दावोस गए और वैश्वीकरण के समर्थक बन गए. एक समय में ट्रंप के तहत नए अमेरिकी प्रशासन को संरक्षणवाद के लिए पक्षपात के रूप में देखा जा रहा था. इसलिए शियामन घोषणा पत्र भी ब्रिक्स समूह के संदर्भ में 'संरक्षणवाद' का विरोध करती है.

Advertisement

इस साल जब ने वॉशिंगटन में ट्रंप से मुलाकात की और आतंकवादी समूहों का नाम रखा गया, सूत्रों ने कहा कि तब ब्रिक्स घोषणा में आतंकवाद के पैराग्राफ पर चीन से हस्ताक्षर करने के बारे में पहली बातचीत शुरू हुई. उन्हें बताया गया कि जब से वे दुनिया में अग्रणी ताकत हैं, तो उन्हें आतंकवाद पर एक नैतिक और राजनीतिक स्थिति लेनी चाहिए. उनसे बात करने के कुछ हफ्तों के बाद, वे वैश्विक स्तर पर अच्छा दिखने की संभावना पर काफी उत्साहित थे.

इस कामयाबी के बाद भारतीय पक्ष को उम्मीद है कि अब जैश के सरगना मसूद अजहर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने की राह खुलेगी. चीन मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने वाले प्रस्ताव पर से अपना टैक्नीकल होल्ड हटा लेगा.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »