दुनिया भर से 15 लाख से ज्यादा मुसलमान इस वक्त सऊदी अरब में जमा हैं. मकसद है हज, जो इस्लाम के पांच बड़े फर्जों में से एक है. सोमवार से हज का आधिकारिक आगाज हो गया. लेकिन इस बार हज सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि ईरान-अमेरिका जंग के बीच दुनिया भर के मुसलमानों के लिए एक बड़ी उम्मीद और दुआ का मौका बन गया है.
इस साल 15 लाख से ज्यादा लोग सिर्फ दूसरे देशों से आए हैं. इनमें मिस्र, इंडोनेशिया, भारत समेत दुनिया के कोने-कोने से लोग शामिल हैं. मिस्र की एक हाजी समया अब्दुल मुनीम ने कहा कि वो बहुत खुश हैं. उनके शब्द थे, 'यह एहसास बयान नहीं किया जा सकता. मैं एक नेमत में हूं.'
अमेरिका के वर्जीनिया से आए पॉलिटिकल साइंटिस्ट यूसुफ चौहौद ने मीना के तंबू शहर से बताया कि यह हज उनके लिए एक नई शुरुआत जैसा है. उन्होंने कहा कि हज जिंदगी की सबसे मुश्किल चीजों में से एक है, लेकिन जो चीज इतनी मायने रखती हो वो आसान तो होगी नहीं.
मक्का में इस वक्त भीषण गर्मी पड़ रही है. हाजी छाते लेकर चल रहे हैं, हाथ के पंखे इस्तेमाल कर रहे हैं. वॉलंटियर पानी की बोतलें बांट रहे हैं और पानी की फुहारें छिड़क रहे हैं ताकि लोग तेज गर्मी में ठीक रहें.
अब इस हज का सबसे बड़ा पहलू, जो इसे बाकी सालों से अलग बनाता है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया. इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज की खाड़ी में तनाव बढ़ गया है, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. इससे तेल और गैस की कीमतें आसमान छू गईं और दुनिया भर की इकोनॉमी पर असर पड़ा. अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी भी कर दी जो एक महीने से ज्यादा से जारी है. अप्रैल में एक नाजुक सीजफायर हुआ, लेकिन हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं.
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इस पूरे तनाव का असर हज यात्रियों पर भी पड़ा. दुनिया के सबसे ज्यादा मुसलमानों वाले देश इंडोनेशिया में सरकार को खास तैयारियां करनी पड़ीं और यह सुनिश्चित करना पड़ा कि एक्स्ट्रा खर्चा हाजियों पर न डाला जाए. भारत में भी हज की तैयारी सामान्य रही, लेकिन तेल की बढ़ी कीमतों की वजह से यात्रा महंगी हो गई.
इन सब हालात के बावजूद हाजी यहां पहुंचे, क्योंकि यह उनके लिए जिंदगी का सबसे बड़ा सपना होता है. कई लोग सालों से पैसे जोड़ते हैं, पर्मिट का इंतजार करते हैं, और दुआ करते हैं कि एक बार मक्का जाने का मौका मिले.
हज में दुनिया भर के हर रंग, हर भाषा, हर तबके के मुसलमान एक जगह जमा होते हैं, सब एक जैसे कपड़े पहनते हैं, कोई अमीर-गरीब नहीं, कोई ऊंच-नीच नहीं. यही इस यात्रा की सबसे खास बात है.
इनपुट: AP
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