गाजा में सेना उतारेगा पाकिस्तान, पर हमास को नहीं मानता दुश्मन... क्या है मुनीर का मकसद?

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान गाजा में अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन के तहत सुरक्षाबलों को तैनात करने के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तानी सैनिक हमास को हथियार डालने पर मजबूर करने में शामिल नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि गाजा में सेना भेजने का फैसला प्रधानमंत्री ने फील्ड मार्शल से सलाह के बाद लिया है.

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गाजा में सेना भेजेगा पाकिस्तान. (File Photo: ITG) गाजा में सेना भेजेगा पाकिस्तान. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 9:51 AM IST

पाकिस्तान गाजा में सेना भेजने के लिए तैयार हो गया है. इसकी पुष्टि पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने की है. उन्होंने शनिवार को कहा कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन के तहत गाजा में सुरक्षाबलों को तैनात करने के लिए तैयार है, लेकिन PAK सैनिक फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास को हथियार डालने पर मजबूर नहीं करेंगे. हम वहां शांति के लिए जा रहे हैं.

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पाकिस्तानी विदेश मंत्री का ये बयान अमेरिकी मध्यस्थता वाले गाजा शांति समझौते पर चर्चा तेज होने के बीच आया है, जिसमें मुस्लिम बहुल देशों के सैनिकों से बने अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) की स्थापना का प्रावधान है. उन्होंने बताया कि गाजा में सेना भेजने का फैसला प्रधानमंत्री ने फील्ड मार्शल से परामर्श के बाद लिया है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इशाक डार ने कहा, 'पाकिस्तान केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्पष्ट रूप से परिभाषित आदेश के तहत ही सेना भेजेगा और पाकिस्तानी सेना हमास को निरस्त्र करने में कोई भूमिका नहीं निभाएगी.'

'हमारा काम पीसकीपिंग का है'

डार ने जोर देकर कहा कि हमास को निरस्त्र करने का मुद्दा पहले रियाद में दो-राज्य समाधान पर हुई बातचीत के दौरान उठा था. पाकिस्तान इस तरह के किसी भी प्रयास में भाग नहीं लेगा. हम इसके लिए तैयार नहीं हैं. ये हमारा काम नहीं है, बल्कि ये फिलिस्तीनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारी है. हमारा रोल शांति स्थापना (पीसकीपिंग) का है, न कि शांति लागू (पीस एनफोर्समेंट) करने की.'

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उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान का काम शांति सुनिश्चित करना है. हम अपनी सेनाएं भेजने को तैयार हैं, लेकिन गाजा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल का आदेश स्पष्ट रूप से निर्धारित होना चाहिए.'

जनादेश स्पष्ट होने पर ही भेजी जाएगी सेना

डार ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिद्धांत रूप से पाकिस्तान की भागीदारी पर सहमति दे दी है, लेकिन ये ISF के जनादेश और कार्यक्षेत्र के स्पष्ट होने पर निर्भर करेगा. इंडोनेशिया ने इस मिशन के लिए 20,000 सैनिकों की पेशकश की है. पिछले महीने अटकलें थीं कि पाकिस्तान को हमास को निरस्त्र करने की भूमिका सौंपी जा सकती है, जिससे देश में राजनीतिक विरोध पैदा हो गया था. रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तो सरकारी प्रवक्ता के इस तरह के बयानों को बेबुनियाद और अस्वीकार्य बताकर निंदा भी की थी.

सुरक्षा परिषद का समर्थन

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने पिछले हफ्ते गाजा संघर्ष को खत्म करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए एक अमेरिकी प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इसमें ISF की तैनाती को भी अधिकार दिया गया था. पाकिस्तान समेत तेरह सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया, जबकि रूस और चीन ने मतदान से दूर रहे. हालांकि, हमास ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय बल की निंदा की. UNSC का प्रस्ताव ISF को हथियारों और सैन्य बुनियादी ढांचे को नष्ट करके गाजा के विसैन्यीकरण का समर्थन करने के लिए अधिकृत करता है.

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बता दें कि पाकिस्तान लंबे वक्त से फिलिस्तीन मुद्दे पर मुखर रहा है और हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने से इनकार करता आया है. इस नए बयान से साफ है कि इस्लामाबाद गाजा में ऐसी किसी भूमिका से बचना चाहता है जो उसे फिलिस्तीनी प्रतिरोध के खिलाफ खड़ा कर दे.

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